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मऊगंज में नल-जल योजना से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. करीब छह महीने बाद EOW ने PHE के तत्कालीन इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज की है. जांच में 3 करोड़ 85 लाख 900 रुपये के भुगतान, अधूरे निर्माण और गुणवत्ताहीन काम से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आने की बात कही गई है.
मऊगंज में नल-जल योजना के तहत भ्रष्टाचार के आरोप
सीधी. मध्यप्रदेश के मऊगंज में नल-जल योजना में 3 करोड़ 85 लाख 900 रुपये के भुगतान, अधूरे निर्माण और गुणवत्ताहीन काम से जुड़े गंभीर तथ्य सामने हैं. जिसके बाद प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है. मामला राज्य सरकार और केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजन जल जीवन मिशन से जुड़ा है. जहां साल 2021-22 में मऊगंज जिले के नईगढ़ी विकासखंड के विभिन्न गांवों में शुरू हुई नल-जल योजना के तहत पानी की टंकी, पाइपलाइन, पंप हाउस, सबमर्सिबल मोटर और घर-घर नल कनेक्शन का काम होना था. जांच के अनुसार ठेकेदार को 3 करोड़ 85 लाख 900 रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन जांच में आरोप है कि निर्धारित काम पूरा होने से पहले ही भुगतान कर दिया गया. खटखरी गांव में नवनिर्मित पानी की टंकी पहली जलभराव में ही ढह गई.
वहीं कई जगह पाइपलाइन गांव के बाहर तक ही बिछाई गई और घरों के भीतर नल फिटिंग और सर्कुलर स्टैंड पोस्ट नहीं बनाए गए. करह उर्फ खैरागढ़ में पांच मोटर पंप के स्थान पर एक सबमर्सिबल मोटर मिलने की बात जांच में कही गई है. 740 घरेलू कनेक्शन के दावे के बावजूद घरों में नल फिटिंग नहीं मिली. शिवराजपुर में ओवरहेड टैंक और सम्पवेल अधूरे पाए गए, जबकि जुड़मनिया रघुनाथ में मुख्य पाइपलाइन भी आधे गांव तक ही बिछी मिली.
इन अधिकारियों के खिलाफ हुई एफआईआर
योजना के तहत निर्माण कार्य नौ महीने में पूरा किया जाना था, लेकिन जांच के अनुसार करीब पांच साल बाद भी कई काम अधूरे रहे और संबंधित गांवों में जल प्रदाय शुरू नहीं हो सका. ऐसे में करोड़ों रुपये के भुगतान और जमीन पर अधूरे काम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए. EOW ने तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जे.पी. द्विवेदी, सहायक यंत्री संजय पाण्डेय, उपयंत्री ए.पी. तिवारी और ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है. अब EOW की विवेचना में यह सामने आएगा कि भुगतान और निर्माण में किसकी क्या भूमिका थी.
विभाग और ठेकेदार पर उठे गंभीर सवाल
बहरहाल मऊगंज की नल-जल योजना में करोड़ों रुपये के भुगतान के बावजूद अधूरे और गुणवत्ताहीन निर्माण ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. EOW की FIR के बाद अब जांच का दायरा बढ़ गया है. जांच एजेंसी भुगतान प्रक्रिया, निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल करेगी. हालांकि, FIR होने के बाद से ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है. फिलहाल इस कार्रवाई से संबंधित विभाग और ठेकेदार पर गंभीर सवाल उठे हैं. ऐसे में देखना दिलचस्प किया होगा कि आखिर पूरे मामले में ईओडब्ल्यू कब तक निष्पक्ष कार्यवाही कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई कर पाने में सफल हो सकेगा.