दिल्ली की सड़कों से 1 लाख पुरानी बत्तियां हटेंगी, दिवाली तक 20 हजार स्मार्ट लाइटें लगाने का प्लान, ₹473 करोड़ होंगे खर्च

दिल्ली की सड़कों से 1 लाख पुरानी बत्तियां हटेंगी, दिवाली तक 20 हजार स्मार्ट लाइटें लगाने का प्लान, ₹473 करोड़ होंगे खर्च


नई दिल्ली: राजधानी की सड़कों पर पसरे अंधेरे और डार्क स्पॉट्स से अब लोगों को निजात मिलने वाली है. दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग यानी PWD ने शहर के पूरे स्ट्रीट लाइट नेटवर्क को हाईटेक और स्मार्ट बनाने का बहुत बड़ा खाका खींच लिया है. PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह ने इस मेगा प्रोजेक्ट का ऐलान करते हुए साफ किया है कि आने वाले त्योहारों से पहले शहर का बुनियादी ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा. इस योजना के पहले चरण के तहत दिवाली तक दिल्ली के प्रमुख इलाकों में 20 हजार पुरानी और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को हटाकर उनकी जगह स्मार्ट LED लाइटें लगाई जाएंगी. इसके बाद जनवरी महीने तक इस आंकड़े को 1 लाख तक पहुंचाने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि राजधानी का कोई भी कोना अंधेरे में न रहे.

दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा और सड़क हादसों को रोकने के लिए सड़कों पर पर्याप्त रोशनी होना बेहद जरूरी माना जाता है. कई इलाकों में लंबे समय से स्ट्रीट लाइट खराब रहने की वजह से डार्क स्पॉट्स बन जाते हैं, जो असामाजिक तत्वों को बढ़ावा देते हैं. PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह ने बताया कि स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम का सीधा कनेक्शन महिलाओं और आम नागरिकों की सुरक्षा से है. जब पूरी दिल्ली रात में दूधिया रोशनी से नहाई रहेगी, तब सड़क हादसों के ग्राफ में भी भारी गिरावट आएगी. इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 473 करोड़ रुपये तय की गई है. इस भारी-भरकम बजट में केवल नई लाइटें लगाने का काम ही नहीं होगा, बल्कि अगले पांच वर्षों तक उनका पूरा ऑपरेशन और मेंटेनेंस भी शामिल रहेगा.

बिना शिकायत किए कैसे ठीक हो जाएगी खराब बत्ती?

पहले के पारंपरिक सिस्टम में जब कोई स्ट्रीट लाइट खराब होती थी, तब नागरिकों को PWD दफ्तर में कॉल करके या पोर्टल पर जाकर शिकायत दर्ज करानी पड़ती थी. कई बार शिकायत दर्ज होने के हफ्तों बाद तक तकनीकी टीम मौके पर नहीं पहुंच पाती थी. अब इस पूरी लाचार व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकने की तैयारी कर ली गई है.

PWD मुख्यालय में एक अत्याधुनिक सेंट्रलाइज्ड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर बनाया जा रहा है. इस कंट्रोल रूम से दिल्ली भर में लगने वाली हर एक स्मार्ट लाइट की चौबीसों घंटे रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी. सिस्टम इतना एडवांस होगा कि कहीं भी किसी खंभे पर लाइट बंद होते ही कंट्रोल रूम के डैशबोर्ड पर तुरंत अलर्ट आ जाएगा. इसके बाद विभागीय टीम किसी नागरिक की शिकायत का इंतजार किए बिना फौरन फील्ड में जाकर उसे ठीक करेगी.

रिमोट से कंट्रोल होंगी दिल्ली की सड़कें

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन सभी स्मार्ट LED लाइटों को रिमोट से ऑपरेट और कंट्रोल करने की सुविधा दी जा रही है. मौसम में बदलाव, अचानक आए घने कोहरे या दिन ढलते ही जरूरत के हिसाब से लाइटों की चमक को कंट्रोल सेंटर से ही कम या ज्यादा किया जा सकेगा. इसके अलावा अगर किसी इलाके में कोई आपात स्थिति बनती है, तो वहां की लाइटों को मुख्यालय से ही तुरंत मैनेज किया जा सकेगा. तकनीक के इस जबर्दस्त इस्तेमाल से फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की मनमानी पर पूरी तरह लगाम लगेगी और पूरा नेटवर्क ऑटोमेटेड तरीके से काम करेगा.

कैसे होगी सालाना 30 करोड़ रुपये के सरकारी खजाने की बचत?

सड़कों पर पहले से लगी पुरानी और पारंपरिक सोडियम लाइटें बहुत ज्यादा बिजली की खपत करती थीं, जिसके कारण सरकार पर हर महीने बिजली बिल का भारी बोझ पड़ता था. अब ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए एनर्जी एफिशिएंट स्मार्ट LED लगाई जा रही हैं.

अधिकारियों के एनालिसिस के मुताबिक, इस कदम से बिजली बिल और बार-बार होने वाले मेंटेनेंस खर्च में सालाना करीब 30 करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी. यह बचत आने वाले सालों में प्रोजेक्ट की लागत को खुद-ब-खुद पूरा करने में मदद करेगी. इसके साथ ही कार्बन फुटप्रिंट में भी बड़ी कमी आएगी.

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