जर्जर हालत, झोपड़ी और टीन में चल रहे सरकारी स्कूल, बड़वानी में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती ग्राउंट रिपोर्ट

जर्जर हालत, झोपड़ी और टीन में चल रहे सरकारी स्कूल, बड़वानी में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती ग्राउंट रिपोर्ट


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बड़वानी जिले में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत और सरकारी दावों में अंतर नजर आ रहा है. जिले के ग्रामीण आदिवासी इलाकों में कहीं स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे हैं, तो कहीं झोपड़ी में, तो कही अतिरिक्त कक्ष और सामुदायिक भवन में बैठकर बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ रही है. न्यूज 18 की टीम ने जिले के अलग-अलग इलाकों की स्कूलों की हकीकत देखी. देखिए ग्राउंड रिपोर्ट.

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ड़वानी जिले में शिक्षा व्यवस्था और सरकारी दावों की जमीनी हकीक़त

बड़वानी. बड़वानी जिले में सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत ये है कि कहीं बच्चों के सिर पर पक्की छत नहीं है, तो कहीं स्कूल की इमारत ही इतनी जर्जर है कि हर वक्त हादसे का खतरा बना रहता है. पानसेमल तहसील के डोलजर आम्बा में स्कूल का संचालन झोपड़ी में हो रहा है. बच्चे कच्ची जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने पर मजबूर हैं. शिक्षक तो अपना दायित्व बखूबी निभा रहे हैं और बच्चों को उचित शिक्षा दे रहे है लेकिन भवन नहीं होने से छात्रों को बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जहां बच्चों को सुरक्षित स्कूल भवन की जगह इसी अस्थायी व्यवस्था में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है. मौसम खराब हो या बारिश, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी सुरक्षा भी चिंता का विषय बन जाती है.

ग्राम तिल्ली खेत में स्कूल के लिए इस्तेमाल हो रहा पुराना भवन भी बदहाल है. भवन की छत पर डाली गई टीन की चादरें लंबे समय से खराब हो चुकी हैं और कई जगह पर सड़ चुकी हैं. ऐसे भवन में बच्चों की पढ़ाई जारी है, जबकि जर्जर छत कभी भी परेशानी खड़ी कर सकती है. पाटी ब्लॉक में भी कई स्कूलों की हालत कुछ ऐसी ही है. कहीं भवन जर्जर है तो कहीं स्कूल के पास बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. बारिश के दिनों में इन स्कूलों की परेशानी और बढ़ जाती है. ग्रामीणों के मुताबिक कई बार छत से पानी टपकने के कारण बच्चों की किताबें और स्कूल बेग भीग जाता है और पढ़ाई प्रभावित होती है.

माध्यमिक विद्यालय भामि गांव 

राजपुर तहसील के भामि गांव में माध्यमिक विद्यालय के लिए सामुदायिक भवन का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसका भवन 2007-08 में ही बना था जिसकी छत गिर चुकी थी अस्थाई व्यवस्था करते हुए टीन शेड डाल दिया गया था वो भी हवा आंधी में दो बार उड़ गया था जिसे तीसरी बार लगाया गया है. हालात ये है कि उस टीन शेड में इतने छेद हो गए कि बारिश का पानी सीधे अंदर आता है इसलिए उस विद्यालय को सामुदायिक भवन में शिफ्ट कर दिया है और जर्जर माध्यमिक भवन में आंगनबाड़ी लगाई जा रही है.

इन तमाम परेशानियों के बीच बच्चे पढ़ाई करते नजर आते हैं. किसी को झोपड़ी में बैठकर अपना भविष्य संवारना पड़ रहा है, तो कोई जर्जर भवन में खतरों के बीच पढ़ाई कर रहा है. सरकार शिक्षा पर करोड़ों रुपये खर्च करने की बात करती है, लेकिन इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक भवन अब भी बड़ी जरूरत बना हुआ है.

माध्यमिक विद्यालय ग्राम पाल्या

ग्राम पाल्या में भी माध्यमिक विद्यालय जर्जर होने के बाद शिक्षकों ने मरम्मत कराई जिससे समस्या खत्म तो नहीं हुई लेकिन कम जरूर हुई लेकिन खत्म नहीं हुई जिसके चलते स्कूल के आसपास अलग-अलग अतिरिक्त कक्ष में स्कूल संचालित की जा रही है उन अतिरिक्त कक्ष की भी दीवारों में दरार आ चुकी है.

इस मामले में जब बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह से बात की गई, तो उनका कहना है कि जिले में कई नए स्कूल भवन स्वीकृत हो चुके हैं जिनका कार्य चल रहा है. भवन विहीन और जर्जर स्कूलों के लिए भी शासन स्तर पर मांग भेजी गई है और मरम्मत भी कराई जाएगी, साथ ही शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है.



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