छत्तीसगढ़ का सबसे अनोखा गणेश पंडाल! प्रसाद की जगह गायों के लिए रखा चारा-गुड़, गौ सेवा का खास संदेश

छत्तीसगढ़ का सबसे अनोखा गणेश पंडाल! प्रसाद की जगह गायों के लिए रखा चारा-गुड़, गौ सेवा का खास संदेश


बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में गणेशोत्सव पर एक से बढ़कर एक आकर्षक गणेश पंडाल बनाए गए हैं लेकिन तिलक नगर का पंडाल अपनी अनोखी थीम और संदेश को लेकर लोगों का ध्यान खींच रहा है. यहां भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को सामान्य प्रसाद के बजाय गौ सेवा का अवसर मिल रहा है. पंडाल में गायों के लिए हरे चारे और गुड़ की विशेष व्यवस्था की गई है. श्रद्धालु भी इस पहल में भागीदारी करते हुए गायों को चारा खिला रहे हैं. इस पंडाल की थीम गौ संरक्षण और गौ सम्मान पर आधारित है ताकि गणेश उत्सव के माध्यम से समाज को गौ सेवा और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी का संदेश दिया जा सके.

समिति से जुड़े शुभम दीक्षित ने लोकल 18 से कहा कि देशभर में चल रहे ‘गौ सम्मान आह्वान’ अभियान की पहल से प्रेरणा लेते हुए इस बार पंडाल की थीम गौ संरक्षण रखी गई है. इसका उद्देश्य समाज को गौ माता की सेवा, सुरक्षा, संरक्षण और सम्मान के लिए जागरूक करना है. गणेश उत्सव के दौरान अलग-अलग पंडालों में विभिन्न धार्मिक और पर्यटन स्थलों की थीम देखने को मिलती है लेकिन समिति ने इस बार समाज और गौ संरक्षण से जुड़े संदेश को प्राथमिकता दी है.

प्रसाद की जगह गायों के लिए हरा चारा और गुड़
उन्होंने कहा कि पंडाल में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गायों को हरा चारा और गुड़ खिलाने की व्यवस्था की गई है. आमतौर पर पंडालों में भंडारे और प्रसाद की व्यवस्था होती है लेकिन यहां समिति ने गायों के लिए विशेष व्यवस्था करने का निर्णय लिया. श्रद्धालु भी इस पहल में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं और गौ सेवा कर रहे हैं.

प्लास्टिक के इस्तेमाल को लेकर संदेश
समिति का कहना है कि गौ संरक्षण केवल गायों को चारा खिलाने तक सीमित नहीं है, समाज को प्लास्टिक के कम इस्तेमाल और भोजन को प्लास्टिक में नहीं फेंकने के लिए भी जागरूक होना चाहिए. कई बार सड़कों पर गोवंश प्लास्टिक और कचरा खाने को मजबूर होते हैं. ऐसे में लोगों को अपने स्तर पर भी जिम्मेदारी समझनी होगी.

22 साल से पंडाल समिति से जुड़े हैं हसनेम खान
पंडाल समिति से लंबे समय से जुड़े हसनेम खान ने कहा कि वह करीब 22 वर्षों से गणेश उत्सव समिति के साथ जुड़े हुए हैं. अक्सर देखने को मिलता है कि सड़क पर गोवंश एक्सीडेंट में घायल हो जाते हैं. कई बार लोग उन्हें देखकर भी आगे निकल जाते हैं. ऐसे में उन्होंने समिति के सदस्यों के साथ गौ संरक्षण और गौ सेवा को लेकर इस तरह की पहल करने की बात रखी. उनका कहना है कि घायल या बीमार गोवंश दिखने पर लोगों को आगे आकर मदद करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या संबंधित लोगों को सूचना देनी चाहिए.

गाय के महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश
पार्थ दीक्षित ने कहा कि पंडाल की खासियत यही है कि इसकी थीम भारतीय संस्कृति और गाय के महत्व से जुड़ी है. समय के साथ लोगों की जीवनशैली और सोच में बदलाव आया है, जिसके कारण गौ संरक्षण को लेकर जागरूकता भी जरूरी हो गई है. इसी संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए पंडाल में गायों के लिए हरे चारे और गुड़ की व्यवस्था की गई है. बाहर से गणेश प्रतिमा के दर्शन करने आने वाले लोग भी इस गौ सेवा में अपनी भागीदारी निभा सकते हैं.

धार्मिक मान्यताओं में गाय का विशेष महत्व
गणेश पूजा के लिए पहुंचे देवेश दीक्षित ने कहा कि भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं में गाय का विशेष महत्व माना गया है. इस पंडाल के माध्यम से लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि गाय को केवल दूध प्राप्त करने के साधन के रूप में न देखा जाए बल्कि उसकी सेवा और देखभाल की जिम्मेदारी भी समझी जाए. पंडाल में किसी तरह का अनावश्यक तामझाम नहीं किया गया है बल्कि पूरा सेटअप उसी संदेश के अनुरूप रखा गया है.

गौ सेवा के लिए लोगों को प्रेरित करना उद्देश्य
सतीश दीक्षित ने कहा कि वह स्वयं लंबे समय से गौ सेवा से जुड़े हुए हैं. इस पंडाल का मुख्य उद्देश्य यही है कि गणेश जी के दर्शन करने आने वाले लोग गौ सेवा के लिए प्रेरित हों. समिति ने कोशिश की है कि पंडाल में आने वाले हर व्यक्ति को एक ऐसा संदेश मिले, जिसे वह अपने जीवन में भी अपना सके.

श्रद्धालुओं को पसंद आ रही पहल
तिलक नगर में बनाए गए इस गणेश पंडाल में दर्शन के साथ गौ सेवा की व्यवस्था लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. यहां श्रद्धालु गायों के लिए रखे हरे चारे और गुड़ में अपनी भागीदारी कर रहे हैं. समिति का कहना है कि आने वाले समय में भी गणेश उत्सव के माध्यम से सामाजिक सरोकार से जुड़ी अलग-अलग थीम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा.



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