चंद्रयान-3 से समुद्र मंथन तक, हर साल नई थीम, खरगोन के इस परिवार की अनोखी परंपरा

चंद्रयान-3 से समुद्र मंथन तक, हर साल नई थीम, खरगोन के इस परिवार की अनोखी परंपरा


Ganesh Jhanki Tradition: गणेशोत्सव में आपने बड़े-बड़े पंडाल और आकर्षक झांकियां तो खूब देखी होंगी, लेकिन खरगोन में एक परिवार ने अपने घर के कमरे को ही झांकी के रूप में सजा दिया है. जमींदार मोहल्ले में जगदीश भावसार ने घर में गणेश स्थापना की है और इस बार रामायण के एक प्रसंग को डिजिटल तकनीक के जरिए जीवंत किया है. इसमें निषादराज नाव से भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा नदी पार कराते नजर आ रहे हैं. किनारे में गांव के लोग खड़े है जो रामजी को कुछ क्षण और रुकने की विनती करते हुए दिखाई दे रहे है.

खास बात यह है कि झांकी में सिर्फ पात्रों को खड़ा नहीं किया गया है, बल्कि इसे चलित स्वरूप दिया गया है. डिजिटल उपकरणों और लाइटिंग इफेक्ट्स की मदद से नदी में पानी बहता दिखाई देता है. नाव भी पानी में हिचकोले खाती नजर आती है. इस दृश्य को देखने के लिए मोहल्ले के साथ शहरभर से भी लोग पहुंच रहे हैं.

45 साल से निभा रहे झांकी सजाने की परंपरा
वे पिछले 45 साल से गणेशोत्सव के दौरान अपने घर में झांकियां सजाते आ रहे हैं. उन्हें यह शौक अपने पिता से मिला. बचपन में पिता को झांकी तैयार करते देखते-देखते उन्होंने भी इसे अपनी परंपरा बना लिया. वे कहते है कि, पहले शहरों में गणेशोत्सव के दौरान जगह-जगह झांकियां देखने को मिलती थीं. लेकिन समय के साथ यह परंपरा कम होती गई और लोग दूसरे कामों में व्यस्त हो गए. इसके बावजूद उन्होंने झांकियां बनाना नहीं छोड़ा. उनका कहना है कि गणेश उत्सव में झांकी लोगों को जोड़ने का काम करती है और पर्व का उत्साह भी बढ़ाती है.

एक महीने पहले शुरू कर देते हैं तैयारी
जगदीश भावसार ने बताया कि, झांकी तैयार करने का काम गणेशोत्सव से करीब एक महीने पहले शुरू हो जाता है. वे अपने परिवार के साथ मिलकर इसकी तैयारी करते हैं. पत्नी और बच्चे भी झांकी बनाने में उनका सहयोग करते हैं. हर साल अलग थीम चुनते हैं और उसे छोटे आकार की चलित झांकी के रूप में तैयार करते हैं. आधुनिक डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर पानी, रोशनी, आवाज और दूसरे इफेक्ट्स के जरिए दृश्य को ज्यादा जीवंत बनाने की कोशिश करते है.

इस बार दिखाया रामायण का प्रसंग
इस वर्ष झांकी में रामायण के उस प्रसंग को चुना गया है, जब वनवास के दौरान भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण जंगल से होते हुए गंगा नदी के किनारे पहुंचते हैं. यहां निषादराज उन्हें नाव से गंगा पार कराने में सहायता करते हैं. झांकी में निषादराज नाव चला रहे हैं और भगवान राम, माता सीता व लक्ष्मण नाव में बैठे दिखाई देते हैं. नदी में बहता पानी और नाव के हिलने का दृश्य डिजिटल इफेक्ट्स की मदद से तैयार किया गया है. इससे देखने वालों को ऐसा अनुभव होता है, जैसे पूरा प्रसंग उनकी आंखों के सामने घट रहा हो.

मनोरंजन के साथ संदेश देने की कोशिश
जगदीश का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ लोगों का मनोरंजन करना नहीं है. बल्कि वे हर साल ऐसी थीम चुनने की कोशिश करते हैं, जिससे धार्मिक, सामाजिक या ज्ञान से जुड़ा कोई संदेश भी लोगों तक पहुंचे. बरहाल, झांकी देखने आने वाले लोग भी उनके प्रयास की सराहना कर रहे हैं. छोटे से स्थान में तकनीक और पारंपरिक झांकी का मेल लोगों को खासा पसंद आ रहा है और यह झांकी हर किसी को आकर्षित कर रही है.

पहले भी बना चुके हैं कई अलग-अलग झांकियां
जगदीश भावसार इससे पहले भी कई अलग-अलग विषयों पर झांकियां तैयार कर चुके हैं. इनमें समुद्र मंथन, चंद्रयान-3, राम-रावण युद्ध, हनुमान और सुरसा का प्रसंग, कृष्ण जन्मोत्सव और द्रौपदी चीरहरण जैसी झांकियां प्रमुख रूप से शामिल हैं. हर साल नई थीम और नए प्रयोग के साथ झांकी तैयार करने की उनकी कोशिश रहती है.



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