कोर्ट जाने से पहले भरना था 50% जुर्माना! क्या थे चालान निपटारे के नए नियम?
Agency:एजेंसियां
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दिल्ली सरकार ने नए ट्रैफिक चालान निपटारे के नियमों पर रोक लगा दी है. 14 सितंबर को नए नियमों की अधिसूचना जारी की गई थी. इसमें कोर्ट जाने से पहले प्रशासिनक अधिकारियों के सामने चालान पर आपत्ति दर्ज करानी थी. इसके बाद कोर्ट में चालान को चुनौती तभी दी जा सकती है, जब चालान का आधा जुर्माना जमा कर दिया जाए.
दिल्ली सरकार ने ट्रैफिक चालान सेटलमेंट के नए नियम पर रोक लगा दी है. (फोटो-सोशल मीडिया)
दिल्ली सरकार में ट्रैफिक चालान निपटारे का काम फिलहाल पुराने नियमों के आधार पर ही होगा. वकीलों के दबाव में सरकार ने विवादित नए नियमों पर रोक लगा दी है. वकीलों की समन्य समिति ने इसके लिए मांग पत्र दिया था. सबसे ज्यादा विवाद उस नियम पर था, जिसमें कोर्ट में चालान को चुनौती देने से पहले ही 50 प्रतिशत चालान फीस जमा करना था. नियमों के विरोध में 24 सितंबर को वकीलों ने मार्च का ऐलान किया था, जिसे फिलहाल टाल दिया गया है.
दिल्ली सरकार ने 14 सितंबर को एक आदेश जारी कर चालान निपटारे के नियमों के बदलाव किया था. विरोध होने पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशन की समन्वय समिति के प्रतिनिधमंडल के साथ बैठक की और इस पर रोक लगा दी. अब आपत्तियों की सुनवाई के बाद नियमों पर फैसला लिया जाएगा.
आखिर क्या थे वे विवादित नियम?
- दिल्ली सरकार ने 14 सितंबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के रूल 167 में संशोधन कर एक नई अधिसूचना जारी की थी. इसमें ट्रैफिक चालान के निपटारे और उसे अदालत में चुनौती की प्रक्रिया को ही बदल दिया था. इसके तहत दिल्ली के 14 विभागों के नामित अधिकारियों को चालानों पर आपत्ति सुनने का अधिकार दिया गया था. यानी दिल्ली में कटे किसी भी चालान के लिए पहले वाहन चालक इन अधिकारियों के सामने आपत्ति दर्ज करानी होती. यह आपत्ति सबूतों के साथ ऑनलाइन दर्ज होती. जबकि सामान्य नियम के तहत चालान को कोर्ट में सीधे चुनौती दी जा सकती है, जहां न्यायिक मजिस्ट्रेट मामले की सुनवाई करता है.
- सबसे ज्यादा विवाद कोर्ट जाने से पहले चालान की आधी फीस जमा करने को लेकर था. नियम के मुताबिक अगर संबंधित अधिकारी किसी वाहन चालक की आपत्ति को निरस्त कर देता है तो कोर्ट में इसे चुनौती देने से पहले चालान की आधी फीस जमा करनी होगी. यानी अगर किसी का चालान 10 हजार रुपये का है तो उसे 5 हजार रुपये जमा करने होते. उसके बाद ही वह कोर्ट में चालान को चुनौती दे सकता है.
- तीसरा और महत्वपूर्ण नियम था 45 दिन की समय सीमा. इसमें चालान को चुनौती देने या जुर्माने का भुगतान करने के लिए अधिकतम 45 दिन का ही वक्त दिया गया था. अगर कोई इस समय सीमा को नहीं मानता तो ये मान लिया जाएगा कि व्यक्ति को चालान पर कोई आपत्ति नहीं है. इसके बाद वाहन की आरसी या ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी सरकारी सेवाएं ब्लॉक करने की व्यवस्था की जाएगी.
- नियम के तहत बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की व्यवस्था लागू की गई थी, जिसमें किसी चालक पर एक साल में 5 या उससे ज्यादा बार ट्रैफिक नियम तोड़ने पर उसका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने का की भी व्यवस्था की गई थी.
वकीलों ने क्यों जताया था विरोध?
वकीलों ने नए नियमों का विरोध किया. उनका कहना था कि चालान सही है या गलत इसका फैसला कोई अधिकारी कैसे कर सकता है. यह तो न्यायपालिका का अधिकार है. अगर अधिकारी ये करने लगेंगे तो न्यायिक पक्रिया प्रभावित होगी. इसके अलावा आधी फीस को लेकर भी वकीलों ने आपत्ति जताई थी. उनका तर्क था कि नया नियम आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को कैसे न्याय दिला पाएगा, क्योंकि वह चालान को कोर्ट में चुनौती देने के लिए चालान की आधी फीस कहां से जमा करेगा.
सरकार का क्या है कहना?
वकीलों ने इन नियमों को वापस लेने के लिए दिल्ली सरकार से मांग की थी. इसके खिलाफ वकीलों ने 24 सितंबर को न्यायिक कार्य से बिहष्कार के अलावा उप राज्यपाल का आवास घेरने का ऐलान कर दिया था. वकीलों ने चेतावनी दी थी कि जब तक इस अधिसूचना को वापस नहीं लिया जाएगा, तब तक विरोध जारी रहेगा. परिवहन मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने सीएम, कानून मंत्री और वकीलों के साथ बैठक के बाद कहा कि मांगपत्र में जो मांगें की गईं हैं उन पर विचार किया जाएगा और उसी आधार पर नियम तय होंगे. फिलहाल इन नियमों पर रोक लगा दी गई है.