अखिलेश यादव ने रायबरेली से क्यों फूंका PDA रथ का बिगुल? राहुल गांधी के किले में सपा का गुप्त प्लान समझें

अखिलेश यादव ने रायबरेली से क्यों फूंका PDA रथ का बिगुल? राहुल गांधी के किले में सपा का गुप्त प्लान समझें


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Akhilesh Yadav PDA Rath Yatra Raebareli: पिछले कई दिनों से यूपी में PDA रथ की खूब चर्चा हो रही है. उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच अखिलेश यादव इस PDA रथयात्रा की शुरुआत करने वाले हैं और इसके लिए रायबरेली शहर को चुना गया है. अब सबसे बड़ा सवाल है कि यूपी में इतने जिले होने के बावजूद सपा ने राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र से ही यात्रा शुरू करने का फैसला क्यों किया? इसके पीछे सपा का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण क्या है? तो बिना देर किए कांग्रेस के गढ़ में सपा के सियासी प्लान को डिकोड करते हैं और समझते हैं कि 2027 के चुनाव के लिहाज से इसका क्या असर पड़ सकता है.

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रायबरेली से PDA रथयात्रा की शुरुआत सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के हाथों होगा.

Akhilesh yadav pda rath yatra raebareli: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से नए समीकरण बनते दिख रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी PDA रथयात्रा की शुरुआत के लिए रायबरेली को चुना है. यह वही रायबरेली है, जहां से राहुल गांधी लोकसभा सांसद हैं और जिसे कांग्रेस के मजबूत गढ़ के तौर पर देखा जाता है. ऐसे में अखिलेश का यहां से PDA का बिगुल फूंकना कई सवाल खड़े करता है. आखिर इस एक जिले के पीछे सपा का कौन सा सामाजिक और राजनीतिक गणित है?

आइए PDA रथ यात्रा के पीछे सपा का ‘गुप्त प्लान’ डिकोड करें

  1. ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ और सीट शेयरिंग का दांव: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ‘इंडिया गठबंधन’ का हिस्सा हैं. लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे (Seat Sharing) को लेकर खींचतान जारी है. कांग्रेस लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद यूपी में अपने लिए अधिक सीटों की मांग कर रही है, जबकि सपा खुद को राज्य में ‘बड़े भाई’ की भूमिका में देखती है. ऐसे में राहुल गांधी के क्षेत्र रायबरेली में रथ उतारकर अखिलेश ने कांग्रेस को सीधा संदेश दिया है कि सपा राज्य की सभी 403 सीटों पर जमीनी तौर पर मजबूत है और वह बैकफुट पर नहीं आएगी.
  2. 2. स्थानीय विवाद को ‘PDA’ के राष्ट्रीय नैरेटिव में बदलना: 17 सितंबर को रायबरेली के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में आरएसएस के छात्र संगठन एबीवीपी (ABVP) और सपा की छात्रसभा के बीच तीखी झड़प हुई थी. सपा का आरोप है कि प्रशासन ने उनके नेताओं को निशाना बनाया है. अखिलेश यादव ने इस स्थानीय छात्र विवाद को लपका और इसे “PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के सम्मान पर हमला” करार दे दिया. इसी के विरोध स्वरूप उन्होंने हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी (OBC) और बछरावां से विधायक श्याम सुंदर भारती (पासी/दलित) के समर्थन में रायबरेली से इस यात्रा का शंखनाद कर दिया है.
  3. 3. कांग्रेस के गढ़ में ‘गैर-यादव OBC’ और ‘दलित’ वोट बैंक की स्वतंत्र घेराबंदी: रायबरेली का बछरावां और हरचंदपुर क्षेत्र लोधी (OBC) और पासी (दलित) मतदाताओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील और निर्णायक है. सपा का पारंपरिक वोट बैंक यादव और मुस्लिम माना जाता रहा है, लेकिन अखिलेश अब तेजी से गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलितों को अपने पाले में ला रहे हैं. कांग्रेस के गढ़ में इन जातियों के बीच सीधे अपनी पैठ बनाकर सपा यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अगर भविष्य में गठबंधन में कोई दरार आती है, तो भी उसका खुद का कैडर बेस मजबूत रहे.
  4. 4. ‘भाजपा का असली विकल्प हम ही हैं’- वर्चस्व की लड़ाई: अखिलेश यादव इस यात्रा के जरिए यह मनोवैज्ञानिक संदेश भी दे रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में भाजपा (BJP) से सीधे मुकाबला करने और उसे जमीन पर हराने की ताकत केवल समाजवादी पार्टी के पास ही है. कांग्रेस के मजबूत गढ़ में कदम रखकर वे यह जताना चाहते हैं कि यूपी की राजनीति का केंद्र लखनऊ और सपा ही है, न कि दिल्ली का कोई केंद्रीय नेतृत्व.
  5. रायबरेली में सपा की अपनी जमीन भी है, चार सीटों पर बने थे विधायक: रायबरेली सिर्फ कांग्रेस का गढ़ ही नहीं है. बल्कि सपा की यहां मजबूत पेशकश भी है. यहां पर 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीटों में से सपा ने चार पर जीत दर्ज की थी. बछरावां से श्याम सुंदर भारती, हरचंदपुर से राहुल लोधी, सरेनी से देवेंद्र प्रताप सिंह और ऊंचाहार से मनोज कुमार पांडेय चुनाव जीते थे. बाद में मनोज कुमार पांडेय बीजेपी में चले गए. इसके बाद रायबरेली जिले में सपा के तीन विधायक रह गए. मौजूदा समय में बछरावां, हरचंदपुर और सरेनी विधानसभा सीटें सपा के पास हैं. यही वजह है कि पार्टी के लिए रायबरेली पूरी तरह बाहरी जमीन नहीं है.
  6. तीन विधायक, तीन सामाजिक संदेश: रायबरेली में सपा के मौजूदा तीन विधायकों का सामाजिक समीकरण भी इस यात्रा के साथ जोड़ा जा रहा है. हरचंदपुर के विधायक राहुल लोधी को लोधी समाज और बछरावां के विधायक श्याम सुंदर भारती को पासी समाज से जोड़ा जाता है. सरेनी से सपा विधायक देवेंद्र प्रताप सिंह हैं. PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की राजनीति अखिलेश यादव की सपा की प्रमुख रणनीतियों में शामिल रही है. ऐसे में रायबरेली जैसे जिले में यात्रा शुरू करके पार्टी अपने इस सामाजिक समीकरण को जमीन पर दिखाने की कोशिश करती नजर आती है. रथ पर डॉ. भीमराव आंबेडकर और सामाजिक न्याय से जुड़े प्रतीकों का इस्तेमाल भी इसी राजनीतिक संदेश का हिस्सा है.

राहुल लोधी के घर से क्यों शुरुआत?

अखिलेश यादव के रायबरेली कार्यक्रम में हरचंदपुर के सपा विधायक राहुल लोधी का घर भी खास पड़ाव है. कार्यक्रम के मुताबिक अखिलेश वहां पहुंचकर कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे और चाय पर बातचीत करेंगे. इसके बाद रथयात्रा से जुड़े कार्यक्रम होंगे. राहुल लोधी को गैर-यादव OBC चेहरे के तौर पर पेश किए जाने का राजनीतिक महत्व है. सपा की PDA राजनीति में पिछड़े वर्ग की भूमिका अहम है. इसलिए एक OBC विधायक के आवास से स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच कार्यक्रम करना पार्टी के सामाजिक समीकरण को स्थानीय स्तर पर जोड़ने वाला कदम माना जा रहा है.

सपा के लिए असली परीक्षा PDA रथ यात्रा के बाद भी है?

रायबरेली से PDA रथ का आगाज सपा के 2027 अभियान का एक शुरुआती पड़ाव है. इस एक कार्यक्रम से चुनावी नतीजे या गठबंधन की अंतिम तस्वीर तय नहीं होती. लेकिन इससे तीन चीजें साफ तौर पर चर्चा में आई हैं. पहली, सपा PDA के सामाजिक समीकरण को लेकर मैदान में उतर रही है. दूसरी, रायबरेली में उसके तीन मौजूदा विधायकों के जरिए पार्टी अपनी विधानसभा स्तर की मौजूदगी दिखा रही है. तीसरी, कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे की बातचीत के बीच रायबरेली जैसे इलाकों में सपा की हुंकार भरना बड़ी बात है. इसका परिणाम क्या होगा?  2027 में इसका कितना चुनावी असर होगा, यह आगे की राजनीतिक गतिविधियों और गठबंधन की तस्वीर साफ होने के बाद ही सामने आएगा.



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