Trump Jinping Meeting : वो 3 मुद्दे, जिसकी वजह से जिनपिंग-ट्रंप की मीटिंग पर रहेगी भारत की पैनी नजर

Trump Jinping Meeting : वो 3 मुद्दे, जिसकी वजह से जिनपिंग-ट्रंप की मीटिंग पर रहेगी भारत की पैनी नजर


वाशिंगटन के आसमान में जैसे ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का विमान लैंड करेगा और एंड्रयूज एयरफोर्स बेस पर डोनाल्ड ट्रंप उनका भव्य स्वागत करेंगे, पूरी दुनिया का ध्यान इस मीटिंग पर रहेगा. देखने में तो ये दो सुपरपावर्स के बीच एक रूटीन मीटिंग लग सकती है, लेकिन बंद कमरों में जो कूटनीतिक ‘खिचड़ी’ पकने वाली है, उसका सीधा असर नई दिल्ली के सुरक्षा और कूटनीतिक गणित पर पड़ेगा. यही वजह है कि वाशिंगटन में हो रही इस महा-मुलाकात पर भारत बिल्कुल पैनी नजर जमाए बैठा है.

6 महीने में दूसरी मुलाकात: वाशिंगटन में जिनपिंग का ग्रैंड वेलकम

साल 2017 में फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में हुई ऐतिहासिक बैठक के बाद ये पहला मौका है जब शी जिनपिंग अमेरिकी सरजमीं पर कदम रख रहे हैं. वाशिंगटन पहुंचे जिनपिंग और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने शानदार स्वागत किया.

इस मुलाकात की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि पिछले 6 महीनों के भीतर दोनों नेता दूसरी बार आमने-सामने हैं. इससे पहले इसी साल मई में ट्रंप चीन दौरे पर गए थे. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने साफ कहा कि इतने कम समय में राष्ट्राध्यक्षों का एक-दूसरे के देश जाना बेहद ऐतिहासिक है. अब व्हाइट हाउस की बैठकों और शाही भोज के जरिए दोनों देश अपनी पुरानी खटास मिटाकर नई शुरुआत करने की फिराक में हैं.

टैरिफ की जंग और ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ का पेंच

सत्ता में वापसी करते ही डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर भारी-भरकम टैरिफ थोपकर आर्थिक जंग छेड़ दी थी. लग रहा था कि दोनों देशों के रिश्ते पूरी तरह पटरी से उतर जाएंगे, लेकिन तभी चीन ने अपना सबसे बड़ा तुरुप का इक्का फेंक दिया, ‘क्रिटिकल मिनरल्स’!

  • स्मार्टफोन, टीवी स्क्रीन, इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EVs), सेमीकंडक्टर और आधुनिक हथियार बनाने के लिए ये खनिज रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं और इस मार्केट पर चीन का ही राज है.
  • पूरी दुनिया के क्रिटिकल मिनरल्स खनन पर चीन का 70% कब्जा है.
  • इन्हें प्रोसेस और रिफाइन करने के काम पर चीन का 90% से ज्यादा दबदबा है.

जैसे ही चीन ने इनके एक्सपोर्ट पर कड़े नियम लगाए, अमेरिकी कंपनियों के पसीने छूट गए. इसी मजबूरी के चलते दोनों देशों ने ट्रेड वॉर को रोककर बातचीत का रास्ता चुना. ट्रंप की पूरी कोशिश होगी कि अमेरिका को इन खनिजों की सप्लाई फिर से बिना रुकावट मिलती रहे.

वो 3 मुद्दे, जिनकी वजह से भारत नजरें गड़ाए है

दुनिया भले ही इस मीटिंग को व्यापार और अर्थव्यवस्था के नजरिए से देख रही हो, लेकिन भारत की नजरें उन तीन मुद्दों पर टिकी हैं जो सीधे उसकी सुरक्षा और रणनीतिक स्थिति से जुड़े हैं.

  1. क्वाड पर असर: 2017 में जब चीन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दादागीरी शुरू की, तो अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर ‘क्वाड’ को दोबारा खड़ा किया. भारत के लिए क्वाड चीन के दबदबे के खिलाफ एक मजबूत कवच रहा है. लेकिन अगर ट्रंप और जिनपिंग के बीच दोस्ती गहरी होती है, तो क्वाड का भविष्य और भारत के प्रति अमेरिका का रुख ढीला पड़ सकता है.
  2. खड़ा हो सकता है G-2 : कूटनीति की भाषा में ‘G-2’ का मतलब है जब अमेरिका और चीन आपस में हाथ मिलाकर ये तय करने लगें कि पूरी दुनिया कैसे चलेगी. ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ-साथ भारत, जापान और यूरोप जैसे सहयोगियों को अलर्ट रहना पड़ेगा. अगर ये नया समीकरण बनता है, तो ये दुनिया के लिए बड़ा खतरा हो सकता है.
  3. अनसुलझा बॉर्डर विवाद: चीन भारत का सबसे ताकतवर पड़ोसी है. 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण रहे हैं. भले ही सीमा पर अभी कुछ शांति दिख रही हो, लेकिन विवाद का कोई पक्का हल नहीं निकला है. ऐसे में अगर अमेरिका का झुकाव चीन की तरफ बढ़ता है, तो भारत के सुरक्षा गणित में बड़ी हलचल मच सकती है.

चीन अमेरिका की मेज पर और क्या-क्या बड़े मुद्दे हैं?

ताइवान और ‘वन चाइना’ पॉलिसी: ताइवान चीन के लिए एक ‘रेड लाइन’ है. चीन लगातार अमेरिका से ताइवान को हथियार न बेचने की मांग करता आया है. फिलहाल ट्रंप ने ताइवान के लिए 14 अरब डॉलर की हथियारों की डील रोक रखी है, जिसे चीन अपने लिए राहत मान रहा है.

AI की जंग: एआई की इस रेस में अमेरिका फिलहाल आगे है, लेकिन चीन भी तेजी से उसके पीछे दौड़ रहा है. दोनों नेता इस नई तकनीक के नियमों और दबदबे पर बात करेंगे.

ग्लोबल वॉर और तनाव: दुनिया में चल रहे दो सबसे बड़े युद्धों, रूस-यूक्रेन संघर्ष और मिडिल ईस्ट संकट पर भी दोनों नेताओं के बीच गहरी बातचीत होगी.



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