success story | ghaziabad gda | women story | पति की मौत के बाद भी नहीं टूटा हौसला, आज गाजियाबाद में GDA की कमान संभाल रहीं कनिका, सफलता की रोचक कहानी

success story | ghaziabad gda | women story | पति की मौत के बाद भी नहीं टूटा हौसला, आज गाजियाबाद में GDA की कमान संभाल रहीं कनिका, सफलता की रोचक कहानी


Last Updated:

Ghaziabad News: पति के निधन के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए डॉ. कनिका कौशिक ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) में ओएसडी बनकर सफलता की नई कहानी लिखी है. उन्होंने मुश्किल वक्त में खुद को संभाला और अब प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभा रही हैं.

गाजियाबाद: कभी-कभी जिंदगी एक पल में पूरी तरह बदल जाती है. जिस वक्त इंसान को अपने सबसे बड़े सहारे की जरूरत होती है, उसी वक्त उसे खुद किसी और का सहारा बनना पड़ता है. गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की ओएसडी डॉ. कनिका कौशिक की जिंदगी में भी वर्ष 2023 में ऐसा ही मोड़ आया, जब उनके पति का अचानक निधन हो गया. पीछे रह गए तीन छोटे बच्चे और उनके भविष्य की पूरी जिम्मेदारी. बड़ी बेटी उस वक्त नौ साल की थी, जबकि जुड़वां बेटा और बेटी सिर्फ तीन साल के थे. दुख की इस घड़ी में कनिका ने खुद को हालात के हवाले करने के बजाय बच्चों को अपनी ताकत बनाया और जिंदगी को दोबारा खड़ा करने का फैसला किया. आज वह GDA में ओएसडी की जिम्मेदारी संभाल रही हैं.

पढ़ाई से शुरू हुआ सफर
27 मार्च 1989 को दिल्ली में जन्मीं कनिका की स्कूली पढ़ाई फरीदाबाद के अशोक मेमोरियल पब्लिक स्कूल से हुई. इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के PGDAV कॉलेज से बीकॉम ऑनर्स किया और मार्केटिंग व फाइनेंस में एमबीए किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद महिंद्रा एंड महिंद्रा में मार्केटिंग एसोसिएट के तौर पर करियर शुरू किया और सेल्स के क्षेत्र में काम किया.

शादी के बाद भी जारी रहा करियर
साल 2013 में शादी के बाद कनिका मेरठ चली गईं. यहां भी पढ़ाई और नौकरी का सिलसिला जारी रखा. बीएड करने के बाद सोफिया गर्ल्स स्कूल में करीब तीन साल शिक्षिका रहीं. एक कक्षा में करीब 62 छात्राओं को संभालने के अनुभव ने उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित की, जिसका फायदा आगे प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने में मिला.

पति के निधन के बाद बच्चों को बनाया ताकत
साल 2023 में पति के निधन के बाद कनिका के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीन छोटे बच्चों को संभालने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की थी. उन्होंने तय किया कि बच्चों की जिंदगी पर इस हादसे का असर हावी नहीं होने देंगी और कनिका को पति की जगह सरकारी नौकरी मिली. ऑफिस के दौरान बच्चे परिवार के सदस्यों की देखरेख में रहते हैं और कनिका काम के बीच भी उनकी पढ़ाई और जरूरतों पर नजर रखती हैं. शाम को वह बच्चों के साथ समय बिताती हैं. उनका कहना है कि वह अपने बच्चों के लिए मां और पिता दोनों की भूमिका निभाना चाहती हैं. वह चाहती हैं कि बच्चे उन्हें देखकर सीखें कि जिंदगी में कैसी भी परिस्थिति आए, हार नहीं माननी चाहिए.

2024 में GDA में मिली जिम्मेदारी
16 मार्च 2024 को उन्हें पति के स्थान पर GDA में ओएसडी की जिम्मेदारी मिली. शुरुआत में लैंड एक्विजिशन, एन्फोर्समेंट के जोन-1 और 2, कमर्शियल और एडवर्टाइजमेंट जैसे काम सौंपे गए. फील्ड में डिमोलिशन की कार्रवाई और सरकारी कामकाज उनके लिए नया अनुभव था. सरकारी कामकाज हिंदी में होने के कारण शुरुआत में परेशानी हुई, लेकिन उन्होंने मेहनत से सब सीखा और जिम्मेदारियां संभालीं.

सम्मान और नई पहचान
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास के क्षेत्र में योगदान के लिए वर्ष 2025 में उन्हें मुख्यमंत्री और दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से महिला सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित किया गया. अब उनके प्रशासनिक सफर में एक और उपलब्धि जुड़ी है. उन्हें पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन यानी लोक प्रशासन में मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिली है, जो सोर्बोन इंटरनेशनल, फ्रांस की ओर से प्रदान की गई है. इसके बाद अब उनकी पहचान डॉ. कनिका कौशिक के रूप में होगी.

कनिका का संदेश है कि महिलाएं आत्मविश्वास रखें और किसी भी परिस्थिति में हार न मानें. कॉरपोरेट से टीचिंग और फिर प्रशासन तक का उनका सफर तीन बच्चों की जिम्मेदारी के बीच खुद को संभालकर आगे बढ़ने और नई पहचान बनाने की कहानी है.



Source link