सीतामढ़ी में बारिश ने बढ़ाया धान की खेती करने वालों का बजट, किसान से जानें खर्च कम करने के उपाय

सीतामढ़ी में बारिश ने बढ़ाया धान की खेती करने वालों का बजट, किसान से जानें खर्च कम करने के उपाय


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बारिश ने बढ़ाया धान की खेती करने वालों का बजट, जानें खर्च कम करने के उपाय

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Sitamarhi Paddy Farming: सीतामढ़ी में कम बारिश और मानसून की अनिश्चितता से धान किसानों की परेशानी बढ़ गई है. बारिश नहीं होने के कारण किसान इंजन और पंप सेट से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं. इससे खेती की लागत काफी बढ़ गई है. किसान अरुण महतो के अनुसार, एक कट्ठा खेत में धान की खेती पर करीब 1000 रुपये तक खर्च हो रहा है. अब तक चार बार सिंचाई की जा चुकी है और फसल तैयार होने तक दो से तीन बार और पानी देना पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश की कमी में खेत में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है. समय पर सिंचाई और दवा के इस्तेमाल से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.

सीतामढ़ी: मानसून की अनिश्चितता और कम बारिश के कारण इस बार धान की खेती करने वाले किसानों को काफी परेशानी हो रही है. बारिश नहीं होने से किसानों को फसल बचाने के लिए इंजन और पंप सेट से खेतों की सिंचाई करनी पड़ रही है. इससे धान की खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. किसान अरुण महतो के अनुसार, इस बार धान की फसल को बचाने के लिए बार-बार पानी देना पड़ रहा है. बारिश नहीं होने की वजह से खेती का खर्च काफी बढ़ गया है. उन्होंने बताया कि एक कट्ठा खेत में धान की खेती करने और उसकी देखभाल करने में करीब 1000 रुपये तक खर्च हो रहे हैं.

200 रुपये प्रति कट्ठा खर्च
अरुण महतो के अनुसार, केवल धान की रोपाई के लिए ही 200 रुपये प्रति कट्ठा खर्च करना पड़ा है. वहीं, खेत की जुताई और हल चलाने में करीब 300 से 400 रुपये तक का खर्च आया है. इस तरह रोपाई और जुताई में ही करीब 500 रुपये खर्च हो गए. इसके बाद खाद, दवा और सिंचाई का खर्च अलग से जुड़ रहा है. बारिश की कमी के कारण खेतों में अब तक चार बार सिंचाई की जा चुकी है. किसान का कहना है कि धान की फसल को पूरी तरह तैयार होने और कटाई के योग्य बनने में अभी समय लगेगा. इस दौरान कम से कम दो से तीन बार और खेतों में पानी देना पड़ सकता है.

धान की फसल का बेहतर विकास
अरुण महतो ने बताया कि धान की फसल के बेहतर विकास के लिए मौसम के अनुसार सिंचाई करना जरूरी है. सामान्य स्थिति में हर 8, 10 या 15 दिनों के अंतराल पर खेत में पानी देना पड़ता है. अगर बीच में अच्छी बारिश हो जाती है, तो करीब 15 दिनों तक सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती. लेकिन बारिश नहीं होने पर हर 8 दिन के आसपास खेत में पानी देना जरूरी हो जाता है.

पानी देने में अतिरिक्त खर्च
बारिश की कमी का सीधा असर किसानों की लागत पर पड़ रहा है. डीजल या अन्य साधनों से पंप चलाकर पानी देने में अतिरिक्त खर्च हो रहा है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बारिश होने से सिंचाई का खर्च कुछ कम होगा. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सूखे जैसी स्थिति में धान की फसल को बचाने के लिए सिंचाई का सही प्रबंधन जरूरी है. खेत में हल्की नमी बनाए रखना चाहिए. इससे धान के पौधों की जड़ों को सूखने से बचाया जा सकता है.

जरूरी दवाओं का छिड़काव
किसान अरुण महतो का कहना है कि अगर समय पर खेत में पानी दिया जाए और जरूरी दवाओं का छिड़काव किया जाए, तो फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है. उनके अनुसार, मौसम साथ रहा और जरूरत के अनुसार सिंचाई होती रही, तो आश्विन महीने तक धान की फसल अच्छी तरह पककर तैयार हो सकती है. इससे बेहतर उत्पादन मिलने की भी उम्मीद है.



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