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US Poverty Line : अमेरिका में गरीबी का पैमाना भारत से काफी अलग है. अमेरिका में गरीबी केवल कमाई नहीं, बल्कि परिवार का आकार, शहर और जीवन-यापन के खर्च से तय होती है.
यदि किसी परिवार की सालाना आमदनी इन तय सीमाओं से नीचे आती है, तो वह सरकार की नजर में गरीब माना जाता है. (Photo : AI)
नई दिल्ली. भारत में अगर कोई शख्स हर महीने 1.27 लाख रुपये कमाता है यानी सालाना ₹15.3 लाख रुपये तो उसे समाज में एक शानदार और संपन्न मिडिल क्लास आदमी माना जाता है. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि दुनिया के सबसे रईस और ताकतवर देश अमेरिका में इतना कमाने वाला इंसान ‘दरिद्र’ कहलाता है. जी हां, अमेरिका में अगर किसी अकेले व्यक्ति की सालाना आय 15.3 लाख रुपये ($15,960) रुपये है तो वह वहां की सरकार की नजरों में वह गरीबी रेखा के नीचे (BPL) आता है. अगर परिवार 4 लोगों का है और सालाना कमाई ₹31.6 लाख से कम है, तो पूरा परिवार ही गरीबी रेखा से नीचे माना जाएगा.
यह कोई मनमाना आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक सख्त अमेरिकी संघीय कानून काम करता है. 1981 के ऑम्निबस बजट रिकॉन्सिलिएशन एक्ट (OBRA) की धारा 673(2) के तहत अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) को हर साल गरीबी दिशानिर्देशों (Poverty Guidelines) को अपडेट करना अनिवार्य होता है. अमेरिका में गरीबी रेखा, अमेरिकी शहरी उपभोक्ताओं के महंगाई सूचकांक (CPI-U) के आधार पर तय होती है. 2026 के नए पावर्टी गाइडलाइंस निर्धारित करने में 2024 और 2025 के बीच महंगाई में 2.63% की हुई वृद्धि को आधार बनाया गया है.
अमेरिका में कैसे तय होती है गरीबी रेखा?
अमेरिका में सिर्फ नौकरी या पद नहीं देखा जाता, बल्कि यह देखा जाता है कि कुल घरेलू कमाई (Household Income) में कितने पेट पल रहे हैं. साथ ही गरीबी सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि आप कितना कमा रहे हैं, बल्कि इस बात से तय होती है कि परिवार के आकार और शहर के खर्चों के बाद आपके हाथ में क्या बचता है. अमेरिकी सरकार की 2026 की आधिकारिक गाइडलाइंस के मुताबिक अलग-अलग परिवारों के लिए गरीबी रेखा की सीमा भिन्न-भिन्न हैं-
- 1 अकेला व्यक्ति: करीब $15,960 सालाना (लगभग ₹15.3 लाख)
- 2 लोगों का परिवार: करीब $21,640 सालाना (लगभग ₹20.7 लाख)
- 3 लोगों का परिवार: करीब $27,320 सालाना (लगभग ₹26.2 लाख)
- 4 लोगों का परिवार: करीब $33,000 सालाना (लगभग ₹31.6 लाख)
₹15 लाख कमाने वाला भी गरीब
क्यों?
कागजों पर ₹15 से ₹30 लाख बहुत बड़ी रकम लग सकती है, लेकिन न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को या शिकागो जैसे शहरों में कॉस्ट ऑफ लिविंग यानी जीवन-यापन की लागत बहुत ज्यादा है. इन शहरों में एक छोटे 1-BHK फ्लैट का किराया ही ₹1.4 लाख से ₹2.4 लाख महीने तक पहुंच जाता है. अमेरिका में बिना इंश्योरेंस डॉक्टर की एक सामान्य विजिट भी हजारों रुपये की पड़ जाती है. बच्चों की डे-केयर फीस और अन्य जरूरी काम के लिए भी बहुत पैसा लगता है.
कौन तय करता है अमेरिका में गरीबी का स्तर?
अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग (HHS) को हर साल गरीबी दिशानिर्देशों (Poverty Guidelines) को अपडेट करना होता है. यह एक लंबी प्रक्रिया है. अमेरिकी जनगणना ब्यूरो (Census Bureau) पहले बुनियादी ‘गरीबी मानक’ (Poverty Thresholds) तय करता है. फिर स्वास्थ्य विभाग आम जनता और वेलफेयर योजनाओं की पात्रता तय करने के लिए इसका एक सरलीकृत रूप यानी पावर्टी गाइडलाइंस जारी करता है.