सऊदी अरब की धमकी के आगे ब्रिटेन ने टेके थे घुटने… अब हूतियों के खिलाफ देंगे साथ

सऊदी अरब की धमकी के आगे ब्रिटेन ने टेके थे घुटने… अब हूतियों के खिलाफ देंगे साथ


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सऊदी अरब की धमकी के आगे ब्रिटेन ने टेके थे घुटने… अब हूतियों के खिलाफ साथ

Agency:एजेंसियां

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सऊदी अरब और ब्रिटेन के बीच सालों पहले हथियारों की सबसे बड़ी डील हुई थी. अल-यामामा हथियार डील से जुड़े एक मामले में ही सऊदी ने ब्रिटेन को ऐसा अल्टीमेटम दिया था कि अंग्रेजों को घुटने टेकने पड़े थे. अब जब हूतियों के खिलाफ सऊदी अकेले पड़ गया है तो ब्रिटेन ने ही मदद का हाथ आगे बढ़ाया है.

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ब्रिटेन के पूर्व पीएम टोनी ब्लेयर 2024 में सऊदी दौरे के दौरान (फोटो सोर्स- मिनिस्ट्री ऑफ इकॉनॉमी एंड प्लानिंग, सऊदी अरब)

हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब जब अकेले पड़ा तो ब्रिटेन ने मदद का हाथ बढ़ाया है. दोनों देश बरसों से एक-दूसरे के मजबूत साथी रहे हैं. मगर दोनों देशों के बीच एक दौर ऐसा भी आया था जब सऊदी की एक धमकी के आगे ब्रिटेन को घुटने टेकने पड़े थे. यह मामला दोनों देशों के बीच हुए सबसे बड़े हथियार सौदे अल-यामामा से जुड़ा था. तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को इस धमकी के आगे झुककर ऐसा फैसला करना पड़ा था, जिसे लेकर उनकी खूब निंदा हुई थी. ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने भी उन्हें खूब लताड़ा था.

प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ब्रिटेन की रक्षात्मक सैन्य मदद का आश्वासन दिया है. उन्होंने बताया कि खुद सऊदी ने इसके लिए अनुरोध किया था. फिलहाल ब्रिटेन ने सऊदी के जहाजों को एयर टू एयर रिफ्यूलिंग की मदद का भरोसा दिया है. इसमें ब्रिटेन का सैन्य विमान हवा मे ही सऊदी के फाइटर जेट को फ्यूल दे देगा. इससे अरब देश के सैन्य विमानों को एयरबेस नहीं लौटना पड़ेगा और वे लंबे समय तक हवा में रहरकर हूतियों के खिलाफ अभियान को तेज कर पाएंगे. ब्रिटेन के इस भरोसे के बाद फिर

क्या था अल यामामा हथियार सौदा?

अल-यामामा ब्रिटेन और सऊदी के बीच अब तक का हुआ सबसे बड़ा हथियार सौदा था. इसमें एक दुनिया की बड़ी रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी BAE सिस्टम्स मध्यस्थ की तरह थी. इस समझौते पर 1985 में सहमति बनी और 1988 में इस पर साइन किए गए. ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की 19 साल पुरानी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते के तहत ब्रिटेन ने सऊदी को 72 टॉरनेडो विमान, 30 हॉक ट्रेनर जेट और 30 अन्य ट्रेनर विमान बेचने पर सहमति जताई थी. 1993 में यह समझौता रिन्यू हुआ और सऊदी ने फिर ब्रिटेन ने 48 टॉरनेडो विमान खरीद पर सहमति जताई. समझौते के तीसरे चरण में 72 यूरोफाइटर टाइफून विमानों का भी सौदा तय हुआ. मगर इस हथियार सौदे के साथ ही एक विवाद भी सामने आया, जिसमें ब्रिटेन की खूब फजीहत हुई.

60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रिश्वत

1988 में समझौते पर साइन होने के कुछ दिन बाद ही इस समझौते पर विवाद शुरू हो गए. इनमें सबसे बड़ा विवाद रिश्वतखोरी का रहा. इसके आरोप BAE कंपनी और सऊदी के शाही परिवार पर लगे. जो कभी खत्म नहीं हुए. साल 2004 में ब्रिटेन ने इस जांच को आगे बढ़ाया और जांच एजेंसी सीरियर फ्रॉड ऑफिस ने BAE के स्विस खातों की जांच शुरू की. इस पर सऊदी अरब भड़क गया. दरअसल जांच में सामने आया कि इस पूरे घोटाले के लिए एक नया फंड बनाया गया था. द गार्जियन ने इस पर BAE फाइल्स नाम की सीरीज चलाकर कई खुलासे किए थे.

इसमें सामने आया था कि कंपनी ने टेंडर हासिल करने के लिए शाही परिवार के राजकुमारों और अधिकारियों को 6 अरब पाउंड यानी तकरीबन 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रिश्वत दी थी. इसके लिए शैल कंपनियों और स्विव बैंक खातों का प्रयोग किया गया था. आरोप तो यहां तक लगे थे कि शाही परिवार के एक सदस्य को ही 100 करोड़ पाउंड से ज्यादा की घूस दी गई थी, जिससे आलीशन एयरबेस A340 विमान खरीदा गया था.

कैसे ब्रिटेन ने टेक दिए थे घुटने?

द गार्जियन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जब SFO की टीम ने शाही परिवार के पास पहुंचने की कोशिश की तो सऊदी के कान खड़े हो गए. सितंबर 2006 में स्विस अधिकारी एसएफओ को बैंक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने वाले थे. इसी भी सऊदी ने धमकी देनी शुरू कर दी. रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी ने कहा कि अगर जांच जारी रही तो वे अलकायदा आतंकियों के बारे में ब्रिटेन को खूफिया जानकारी देना बंद कर देंगे. दावा तो यहां तक किया गया कि SFO अधिकारियों को धमकी दी गई कि जांच जारी रखी तो ब्रिटिश सड़कों पर ही ब्रिटिश नागरिकों की जान जाएगी. दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया गया.

आखिरकार दिसंबर 2006 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल लॉर्ड गोल्डस्मिथ ने हाउस ऑफ लॉर्ड में बताया कि जांच को रोक दिया गया था. बाद में सामने आया कि तत्कालीन पीएम टोनी ब्लेयर ने खुद इस जांच को रोकने का आदेश दिया था. इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया गया था. बाद में ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने खुद टोनीब्लेयर के इस फैसले को सऊदी के सामने घुटने टेकना बताया था.



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