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Bhind News: एक पिता अपने बच्चों के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार रहता है. अब एक पिता अपने बच्चे की मनौती पूरी होने के बाद कीलों की सैया पर दंडवत यात्रा करने निकला है. यूपी के इटावा जिले से चला ये पिता भिंड जिले के प्रसिद्ध ऐतिहासिक धार्मिक स्थल डॉक्टर हनुमान मंदिर तक पहुंचना चाहता है. अब उसकी ये यात्रा चर्चा का विषय बनी हुई है.
बच्चे की खातिर पिता का बड़ा तप
Bhind News: आस्था जब अटूट हो तो इंसान मुश्किल से मुश्किल राह भी पार कर जाता है. ऐसी ही आस्था, संकल्प और विश्वास की अद्भुत तस्वीर इटावा जिले के विजयपुर गांव से सामने आई है, जिसने हर किसी को आस्था और विश्वास की भक्ति में शराबोंर कर दिया है. उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के विजयपुर निवासी धर्मेंद्र अपने 8 साल के बेटे की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. धर्मेंद्र के मुताबिक उन्होंने देश के बड़े-बड़े डॉक्टरों से बेटे का इलाज कराया, लेकिन कहीं आराम नहीं मिला.
बेटे के लिए मांगी मनौती
थक-हारकर करीब 4 महीने पहले वे दंदरौआ धाम, डॉक्टर हनुमान जी महाराज की शरण में पहुंचे. दरबार में उन्होंने मनौती मांगी कि अगर उनका बेटा स्वस्थ हो गया, तो वे अपने गांव विजयपुर से दंदरौआ धाम तक कीलों की सैया पर दंडवत यात्रा करेंगे.
धर्मेंद्र बताते हैं कि मनौती के कुछ दिन बाद जब वे बेटे को जांच के लिए दिल्ली लेकर गए, तो उसकी रिपोर्ट बिल्कुल सामान्य आई. रिपोर्ट देखते ही उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और उन्होंने अपने संकल्प को पूरा करने की ठान ली.
कोई भी संकट नहीं रोक पाया रास्ता
इसी संकल्प को पूरा करने के लिए धर्मेंद्र ने 12 सितंबर से विजयपुर से दंदरौआ धाम तक दंडवत यात्रा शुरू की. तपती जमीन हो, पथरीले रास्ते हों या लोगों की भीड़ या फिर तेज बारिश. हनुमान जी का ध्यान करते हुए धर्मेंद्र लगातार कीलों की सैया पर लेटकर दंडवत करते हुए अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं. आज उनकी यात्रा का 11वां दिन है और वे भिंड पहुंच चुके हैं. उनका लक्ष्य करीब 25 दिनों में दंदरौआ धाम पहुंचकर अपनी मनौती पूरी करना है.
चर्चा का विषय बनी उनकी यात्रा
धर्मेंद्र कहते हैं कि ये यात्रा मेरे बेटे के स्वस्थ होने की खुशी और दंदरौआ सरकार के प्रति मेरी आस्था का प्रतीक है. एक पिता की आंखों में बेटे के ठीक होने की खुशी, माथे पर आस्था का तिलक और कीलों पर तपस्या करते कदम. धर्मेंद्र की ये दंडवत यात्रा इन दिनों पूरे चंबल अंचल में चर्चा का विषय बनी हुई है. लोग रास्ते में रुक-रुककर उनके हौसले को सलाम कर रहे हैं.