पॉटी रोकना शरीर के बस में कितना? दौड़ते वक्त क्यों फेल हो जाता है कंट्रोल, क्या कहती है साइंस

पॉटी रोकना शरीर के बस में कितना? दौड़ते वक्त क्यों फेल हो जाता है कंट्रोल, क्या कहती है साइंस


पॉटी अगर आए तो 5 मिनट के अंदर मल त्याग कर लें. अगर ज्यादा देर तक इसे रोकने की कोशिश की तो पाचन तंत्र प्रभावित होता है. मुंबई के कोलोरेक्टल सर्जन डॉ. हुसैन घीवाला कहते हैं कि असल में पॉटी लगती ही तब है जब ये बहुत जरूरी हो. ये नेचुरल संकेत है, जिसे ज्यादा रोकने से कब्ज-बबावीर जैसी समस्याएं हो सकती हैं. हालांकि कई बार हालात विपरीत होते हैं.

कभी व्यक्ति ऐसी जगह होता है जहां वह फ्रेश नहीं हो सकता. वह पॉटी रोकना चाहता है, मगर चाहकर भी ऐसा नहीं कर पाता. हाल ही में ऐसा हुआ ऑस्ट्रेलियाई एथलीट जोआना विएट्रजिक के साथ. रेस के दौरान उनकी तबीयत खराब हुई और उनके कपड़ों में ही पॉटी हो गई. हालांकि उन्होंने रेस जारी रखी और जीत भी हासिल की. मगर विवाद होने पर बाद में उन्हें जीत छोड़नी पड़ी और माफी भी मांगनी पड़ी. मगर क्या ये जोआना के बस में था?

बीजिंग में क्या हुआ था?

चीन की राजधानी बीजिंग में पिछले दिनों हायरोक्स फिटनेस रेस का आयोजन किया गया था. इस रेस में 8 किलोमीटर दौड़ लगानी होती है और हर एक किलोमीटर के बाद एक वर्कआउट करना होता है. इसमें स्लेज पुश, स्लेज पुल, रोइंग और फार्मर्स कैसी जैसे वर्कआउट होते हैं. जोआना इस दौड़ के दौरान अस्वस्थ हो गईं ओर पॉटी पर कंट्रोल नहीं कर सकीं. हालांकि उन्हें रेस जारी रखने की अनुमति दी गई और उन्होंने जीत भी हासिल की.

बाद में हाइजीन को लेकर सवाल उठे. सोशल मीडिया पर बहस हुई कि आखिर पॉटी के बावजूद उन्हें इसकी अनुमति क्यों दी गई थी. इसके बाद हायरॉक्स को तथा जोआना को इसके लिए माफी मांगनी पड़ी. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बीजिंग में जो हुआ उसके लिए चीन के लोगों अपने साथियों तथा आयोजकों से माफी मांगती हूं.

क्या पॉटी रोकना किसी के बस में है?

किसी भी इंसान के लिए पॉटी रोकना बेहद मुश्किल होता है. दरअसल हमारा शरीर दिमाग को इसका संकेत तब भेजता है जब रेक्टम यानी मलाशय भर जाता है. दिमाग को संकेत भेजने के बाद जब तक हम उस पर प्रतिक्रिया करते हैं तब तक उसे रोकने का काम हमारी एनल स्फिंक्टर नाम की मांशपेशी करती है, लेकिन यदि तबीयत खराब है यानी लूज मोशन है या पेट सबंधी और कोई दिक्कत है तो इसे कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. खासतौर से हायरॉक्स जैसी प्रतियोगिता में क्योंकि इसमें दौड़ के साथ शारीरिक गतिविधि भी करनी होती है.

दौड़ते समय क्या होता है?

PubMed ने इसे लेकर एक स्टडी प्रकाशित की है. इसमें बताया गया कि दौड़ या एक्सरसाइज के दौरान खून का बड़ा हिस्सा मांसपेशियों, दिल और फेफड़ों की ओर जाता है. इससे पाचन तंत्र में ब्लड सर्कुलशन कम हो जाता है. वैज्ञानिक इसे एक्सरसाइज इनडस्ड गैस्ट्रोटेंशियल सिंड्रोम कहते हैं. इससे आंतों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और पेड़ में मरोड़, गैस और दस्त जैसे हालात बनते हैं.

क्या इसे किया जा सकता है कंट्रोल?

किसी भी प्रतियोगिता के दौरान ऐसे ज्यादातर मामलों में शरीर में पानी की कमी होना या दौड़ से पहले खाया गया खाना, स्ट्रेस को कारण माना जाता है. हालांकि रिसर्च में ये भी दावाकिया गया है कि दौड़ते समय शरीर लगातार ऊपर नीचे उछलने और झटकों की वजह से आंतों और मलाशय पर दबाव पड़ता है. इसे फीकल इनकॉन्टिनेंस कहते हैं, जिससे व्यक्ति कंट्रोल खो देता है और कपड़ों के गंदे होने की संभावना बढ़ जाती है.

ऐसी की एक रिसर्च में 109 एथलीटों में से 12 प्रतिशत ये माना कि दौड़ के दौरान कभी न कभी उन्हें भी ऐसी स्थिति महसूस हुई, जब उनका कंट्रोल खो गया. PubMed में ही जून 2023 में प्रकाशित एक रिसर्च में 2000 एथलीट पर सर्वे किया गया. इसमें पाया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पॉटी, लूज मोशन और कंट्रोल खो देने की समस्या ज्यादा सामने आई है. इस रिसर्च में 7 प्रतिशत लोगों ने माना कि कभी न कभी प्रतियोगिता के दौरान उनका कंट्रोल लूज हुआ.

पॉटी रोकने से क्या होता है?

मुंबई के कोलोरेक्टल सर्जन डॉ. हुसैन घीवाला की वेबसाइट पर पॉटी रोकने के खतरों के बारे में बताया गया है. इसके मुताबिक जब आप जानबूझकर पॉटी रोकते हैं. तो मलाशय कुछ देर के लिए शिथिल हो जाता है, व्यक्ति को लगता है कि समस्या हल हो गई, लेकिन ऐसा नहीं होता. इससे हालात बिगड़ती हैं और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. वह कहते हैं कि अगर पॉटी महसूस हो तो हर हाल में 5 मिनट के अंदर शरीर की प्रतिक्रिया कराएं.



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