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Painkiller Overuse Harm Kidney: अगर आपको दर्द की दवा खाने की आदत है तो इसे तुरंत रोक दें वरना किडनी डैमेज हो सकता है. यह बात हम नहीं बल्कि सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने कही है. सीडीएससीओ ने कहा है कि पेनकिलर और एंटीबायटोटिक के बढ़ते इस्तेमाल से देश में किडनी की समस्या भी बढ़ रही है. इसलिए सीडीएससीओ ने चेतावनी जारी कर पेनकिलर और एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक इस्तेमाल पर तत्काल रोक लगाने की बात कही है.
दर्द की दवा किस तरह करती है किडनी को डैमेज.
Pain Killer Drug Harm Kidney : पेट में दर्द, पांव में दर्द, घुटनों में दर्द, बदन में दर्द जैसे ही शुरू होता है लोग दर्द की दवा खा लेते हैं. उन्हें इससे तत्काल राहत तो मिल जाती है. पर ये आदतों में शुमार होने लगती है. लेकिन एक दिन ऐसा आता है जब किडनी खराब होने लगती है. इसलिए दवाओं के इस्तेमाल पर नियंत्रण करने वाले सरकारी नियामक सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने चेतावनी जारी की है. सीडीएससीओ एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि पेनकिलर दवाइयों के गलत इस्तेमाल और ओवरयूज के कारण क्रोनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए ऐसी दवाइयां बिना डॉक्टरों की पर्ची से न ली जाए. इतना ही नहीं सीडीएससीओ ने एंटीबायोटिक के भी गलत इस्तेमाल पर अकुंश लगाने की बात कही है. आखिर दर्द की दवा किडनी को डैमेज क्यों करती है. इस विषय पर हमने मेदांता अस्पताल में रीनल केयर डिपार्टमेंट के एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. वरुण जैन से बात की.
क्यों धड़ल्ले से नहीं लेनी चाहिए ये दवा
डॉ. वरुण जैन ने बताया कि अपने मन से ही नहीं लोकल लेवल पर जो बिना एमबीबीएस वाले डॉक्टर (क्वैक) होते हैं, वे भी बुखार, सिर दर्द, पेट दर्द, पांव दर्द जैसी समस्याओं में नॉन स्टेरॉयड एंटी-इंफ्लामेटरी ड्रग (NSAID) का धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं. उन्हें पता ही नहीं होता है कि जरूरत से अधिक या मामूली परेशानी होने पर इन दवाओं का सेवन नहीं किया जाना चाहिए. कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें पहले से किडनी की परेशानी होती हैं लेकिन उन्हें पता नहीं होता क्योंकि किडनी की परेशानी सामने आने के तुरंत कोई लक्षण नहीं दिखता. अगर ऐसे लोग एनएसएआईडी दवा का सेवन करते हैं, तो उनके लिए यह ज्यादा परेशानी का सबब है. यह दवा धीरे-धीरे किडनी के फिल्टर पर असर करने लगती है. अगर दर्द की दवा का लगातार ली जाए तो ऐसे लोगों की किडनी डैमेज तक हो सकती है. इसलिए दर्द की दवा का सेवन डॉक्टरों की सलाह से ही लें.
दर्द की दवा किडनी को कैसे करती है डैमेज
डॉ. वरुण जैन ने बताया कि हम सब जानते हैं कि किडनी का काम छन्नी यानी फिल्टर का है. यह खून से टॉक्सिक चीजों को पेशाब के रास्ते बाहर भेज देती है और अच्छी चीजों को अंदर ही रख लेती है. किडनी में खून को छानने के लिए लाखों छोटी-छोटी छन्नी यानी फिल्टर होते हैं. इन्हें नेफ्रॉन कहा जाता है. इन नेफ्रॉन तक खून पहुंचाने के लिए बाल से भी हजारों गुना बारीक नलिकाएं होती हैं. जब खून इन नलिकाओं से होकर नेफ्रॉन में जाता है तो किडनी गंदगी को छानकर पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देती है और साफ खून को वापस शरीर में भेज देती है. यहां प्रेशर की जरूरत होती है ताकि खून अंतिम नेफ्रोन तक पहुंच सके. इसके लिए किडनी के अंदर ब्लड प्रेशर का बना रहना भी जरूरी है.इस काम को सुचारु रूप से चलाने के लिए किडनी में प्रोस्टाग्लैंडीन नाम का एक केमिकल होता है. यह केमिकल नेफ्रोन तक पहुंचने वाली खून की छोटी-छोटी लाखों नलिकाओं को चौड़ा और ढीला करता है. इससे खून का बहाव वहां तक आसानी से होने लगता है. NSAID दवा प्रोस्टाग्लैंडीन को ब्लॉक कर देती है. दूसरी ओर शरीर में जब दर्द और सूजन होती है तो भी प्रोस्टाग्लैंडीन केमिकल बनाता है. यही केमिकल दिमाग तक दर्द का संदेश पहुंचाता है. यानी दर्द को बढ़ाने के लिए प्रोस्टाग्लैंडीन ही जिम्मेदार है. इस दर्द से बचने के लिए हम दर्द की दवा लेते हैं. यह दवा प्रोस्टाग्लैंडीन बनाने वाले एंजाइम COX-1 और COX-2 को ब्लॉक कर देती है. इससे दर्द तो बंद हो जाता है लेकिन इसके साथ ही किडनी में प्रोस्टाग्लैंडीन बनना भी बंद हो जाता है. अगर हम इन दवाओं का कभी-कभार सेवन करें तो प्रोस्टाग्लैंडीन दोबारा से बनना शुरू हो जाता है लेकिन अगर इसका लगातार सेवन करें तो किडनी में कई तरह की परेशानियां होने लगती है.
दवा किडनी पर इस तरह असर करेगी
डॉ. वरुण जैन बताते हैं कि लगातार दर्द की दवा लेने पर प्रोस्टाग्लैंडीन का बनना रुक जाएगा. इससे खून लाने वाली नसें सिकुड़ जाएगी. अगर ये नसें सिकुड़ी रहेगी तो यहां तक यानी नेफ्रॉन तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंचेगी. शुरुआत में इस कारण पहले मामूली वैसोमोटर इंज्युरी होती है. यानी नेफ्रोन तक जो नसें पहुंचती है उसमें अपने आप फैलने-सिकुड़ने में दिक्कत होने लगेगी. लेकिन सालों से अगर कोई व्यक्ति अक्सर दर्द की दवा खाता है तो प्रोस्टाग्लैंडीन का बनना लगातार बंद रहेगा. इसका नतीजा आखिर में यह होगा कि ऑक्सीजन की कमी के कारण नेफ्रॉन की कोशिकाएं मरने लगेंगी. फिर किडनी में फिल्टर का काम नहीं हो पाएगा और किडनी बहुत कम खून को छानेगा. इससे किडनी में खून का बहाव कम हो जाएगा, पेशाब कम बनेगा और शरीर में पानी और सोडियम जमा होने लगेगा. शरीर में पानी जमा होने से पैरों में सूजन और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाएगी. लगातार या बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर लेने से किडनी के टिशूज में एलर्जिक रिएक्शन जैसी सूजन आ सकती है. इससे किडनी अचानक काम करना बंद कर सकती है. यानी एक्यूट किडनी इंजरी हो सकती है. आसान भाषा में कहें तो ज्यादा और लगातार दर्द की दवा खाने से किडनी में खून की सप्लाई कम हो सकती है जिससे किडनी धीरे-धीरे या अचानक छानने की अपनी क्षमता खो सकती है.
लोकल डॉक्टर और मुश्किल खड़ी करते हैं
डॉ. वरुण जैन ने बताया कि जब कोई लगातार दर्द की दवा लेते हैं तो इससे अंदर ही अंदर किडनी में परेशानी चलने लगती है और इसके लक्षण भी सामने आने लगते हैं. इसमें कुछ समय बुखार रहता है. पैरों में सूजन होने लगती है, पेशाब कम बनता और पेट में दर्द भी होता है. जब बर्दाश्त नहीं हो पाता और इस स्थिति में अगर क्वैक डॉक्टर के पास चले जाते हैं या जो बिना मेडिकल कोर्स किए डॉक्टरी करने लगते हैं, वे इस स्थिति को और अधिक बिगाड़ देते हैं. वे इस स्थिति में NSAID इंजेक्शन लगा देते हैं. यह पहले से ली जा रही दवा का इंजेक्शन वाला रूप है जो और परेशानी पैदा करती है.
क्या न करें
डॉ. वरुण जैन बताते हैं कि अगर मरीज को शुगर की बीमारी है, अगर उसे ब्लड प्रेशर है, या पहले कभी भी किडनी से संबंधित कोई दिक्कत हुई है, या किडनी जांच में कुछ गड़बड़ रही है तो ऐसे मामलों में जब तक डॉक्टर न कहें भूलकर भी दर्द की दवा न खाएं. जब डॉक्टर पर्ची भी लिखें तभी दर्द की दवा खाएं. अगर बुखार है तो कोशिश करें कि सिर्फ पैरासिटामोल ही खुद से लें.