जीवन में कठिनाइयां आएगी पर जीत अंततः सत्य की, सुप्रीम कोर्ट से ₹5 करोड़ का जुर्माना वापस मिलने पर गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का संदेश

जीवन में कठिनाइयां आएगी पर जीत अंततः सत्य की, सुप्रीम कोर्ट से ₹5 करोड़ का जुर्माना वापस मिलने पर गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का संदेश


जीवन में हर व्यक्ति को सुखद और दुखद, दोनों ही तरह के समय से गुजरना पड़ता है. जब भी कोई समस्या आती है, तो या तो हम उसे नकार देते हैं. यह कहकर कि कोई समस्या नहीं है या फिर हम उसे लेकर चिंता करने बैठ जाते हैं और उसे पहले से ज्यादा बड़ा बना देते हैं. दोनों में से कोई भी तरीका मददगार नहीं है. नकारने से समस्या खत्म नहीं होती है और न ही चिंता करने से उसका समाधान होता है. सबसे पहली बात यह स्वीकार करना है कि समस्या है. फिर उसे छोटा और समाधान-योग्य मानें. यदि यह लोगों से जुड़ी है, तो उनसे दूर भागने के बजाय उनके संपर्क में रहें. कम बोलें और समय को अपना काम करने दें. एक साथ आएं और उत्सव मनाएं. जब आप समस्या को कुछ समय के लिए किनारे रख देते हैं, तो अक्सर आप पाते हैं कि समय के साथ उसका समाधान स्वतः हो जाता है.

दुख से निपटने के 4 तरीके
जब कोई समस्या आती है, तो समाधान खोजने के बजाय, हम अक्सर यह देखने लगते हैं कि वह कितनी बड़ी हो सकती है और सबसे बुरे परिणामों की कल्पना करने लगते हैं. लेकिन आपके सामने आने वाली हर समस्या आपके भीतर छिपे कौशल, प्रतिभा और क्षमता को खोजने का एक अवसर है. यह आपकी वास्तविक क्षमता को उजागर करने के लिए है. किसी कठिन परिस्थिति से उबरने के चार तरीके हैं. पहला यह विश्वास रखना कि यह कठिन समय भी बीत जाएगा. सब कुछ बदलता है और अराजक स्थितियां भी बदलती हैं. दूसरा है आपका अपना अनुभव. जिस तरह आपके पास अतीत में समस्याओं से निपटने की ऊर्जा, साहस और ताकत थी, वैसे ही भविष्य के लिए भी है. तीसरा तरीका है दूसरों के साथ साझा करना और उनकी सेवा करना. यदि आप हमेशा अपने बारे में सोचते हैं, तो आपकी समस्या अजेय बन जाती है. जब आप बाहर निकलते हैं और देखते हैं कि दुनिया में क्या हो रहा है, तो आपको एहसास होता है कि समस्याओं से जूझने वाले आप अकेले नहीं हैं. चौथा तरीका है एक उच्च शक्ति पर विश्वास. जो काम आप अपने प्रयासों से नहीं कर सकते, वह आप अपनी प्रार्थनाओं से कर सकते हैं. आप अपने दुखों और कठिनाईयों में अकेले नहीं हैं. एक उच्च शक्ति आपके साथ है. उस पर विश्वास रखें.

ध्यान में गहराई से जाने पर मिलते हैं रास्ते
अतीत से प्राप्त ज्ञान, आध्यात्मिक अभ्यास, शौर्य और विश्वास जीवन के कठिन दौर से पार पाने में मदद करते हैं. समस्याएं और चुनौतियां हर किसी के जीवन में आती हैं. ज्ञान और भक्ति जीवन की चुनौतियों और समस्याओं को आसानी से पार करने की शक्ति देते हैं. कठिन समय के दौरान, अपने संपूर्ण स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. शरीर को सक्रिय रखें. सैर पर जाएं, प्राणायाम, सुदर्शन क्रिया और ध्यान का अभ्यास करें. ये अभ्यास आपको प्रचुर मात्रा में जीवन ऊर्जा देते हैं और मन व शरीर को मजबूत करते हैं, जिससे आपको कठिन परिस्थितियों से उबरने में मदद मिलती है. सांसारिक गतिविधियों में हमेशा कोई न कोई खामी रहेगी. इसके बारे में ज्यादा न सोचें या उनमें पूर्णता खोजने की कोशिश न करें. जब हम आध्यात्मिक मार्ग और ध्यान में गहराई तक जाते हैं, तो हम चुनौतियों से ऊपर उठना सीखते हैं.

विश्व संस्कृति महोत्सव
वर्ष 2016 में, हमने यमुना के तट पर विश्व संस्कृति महोत्सव (World Culture Festival) का आयोजन किया था. हमने यमुना को ही क्यों चुना? 2010 में, ‘मेरी दिल्ली मेरी यमुना’ अभियान के माध्यम से, हमारे हजारों स्वयंसेवक दिल्ली को साफ करने के लिए एक साथ आए थे. हमने यमुना से लगभग 700 टन कचरा- जैकेट, चप्पलें और हर तरह का कूड़ा-कचरा निकाला था. नदी की स्थिति देखकर, मैंने सोचा कि यदि दुनिया भर के लोग विश्व संस्कृति महोत्सव के लिए इसके तट पर आएंगे, तो शायद अधिकारियों का ध्यान इसकी सफाई और जीर्णोद्धार की ओर जाएगा. हमने सभी संबंधित अधिकारियों से आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कीं. फिर हमने कुछ असाधारण रचा, सात एकड़ का तैरता हुआ मंच, जिसमें 155 देशों के 36,602 कलाकार और लोग शामिल थे. दुनिया भर से सैकड़ों गणमान्य व्यक्ति, राष्ट्राध्यक्ष और 2,500 धार्मिक व आध्यात्मिक नेता आए थे. पोप के प्रतिनिधि, धर्माचार्य, सीरिया के ग्रैंड मुफ्ती, मिस्र, अमेरिका, क्यूबा, रूस, यूक्रेन के नेता, मंत्री, सुदूर पूर्व के बौद्ध भिक्षु- विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और राष्ट्रों के लोग एक मंच पर एक साथ आए. तीन दिवसीय इस उत्सव में लगभग 37 लाख लोग शामिल हुए. हमने पर्यावरण का पूरा ध्यान रखा. मंच का निर्माण धातु की चादरों और खंभों का उपयोग करके जमीन की खुदाई किए बिना किया गया था. जब हमने इसे हटाया, तो उन प्लेटों के नीचे तब भी घास उग रही थी. फिर भी, कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही, यह आरोप लगाया गया कि हमने यमुना के बाढ़ के मैदानों को नुकसान पहुंचाया है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने हमें पर्यावरण मुआवजे के रूप में ₹5 करोड़ जमा करने का आदेश दिया, भले ही कार्यक्रम अभी शुरू भी नहीं हुआ था. केवल दो दिन बचे थे और दुनिया भर से अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्ति आ रहे थे. मैं उस काम के लिए भुगतान नहीं करना चाहता था जो हमने किया ही नहीं था. मैंने कहा कि मैं जेल जाने के लिए तैयार हूं, लेकिन मैं सच्चाई के लिए खड़ा रहूंगा. अंततः, कार्यक्रम को दांव पर लगा देख, हमारे लोगों ने अनुरोध किया कि हम आदेश का पालन करें और हमने आरोपों का विरोध जारी रखते हुए राशि जमा कर दी.

जीत सत्य की लेकिन झूठ का भी दौर चलता है
यह मामला सालों तक चलता रहा. मीडिया ट्रायल हुआ और यह आरोप बार-बार दोहराया गया कि विश्व संस्कृति महोत्सव ने यमुना को नुकसान पहुंचाया है. लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी. हम धैर्य के साथ सच्चाई के पक्ष में खड़े रहे. आज, 10 साल बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने सत्य की पुष्टि की है. इसने हमारे रुख को सही ठहराया है. अदालत ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के फैसले और हमारे खिलाफ सभी परिणामी व अंतरिम कार्रवाइयों को रद्द कर दिया, और निर्देश दिया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश के अनुपालन में जमा किए गए ₹5 करोड़ वापस किए जाएं. इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि न्यायालय ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य कार्यक्रम और कथित पर्यावरणीय क्षति के बीच आवश्यक संबंध स्थापित नहीं करते हैं. यह उस बात की याद दिलाता है जो मैनें 2017 में साझा की थी – विजय अंततः सत्य की ही होगी, लेकिन उसके पहले झूठ का भी अपना एक दौर चलेगा.



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