‘गब्बर इस बैक 2’ जीरो बजट में बनी पूरी फिल्म! मोबाइल से शूट कर युवाओं ने दिखाई क्रिएटिविटी, इस दिन होगी रिलीज

‘गब्बर इस बैक 2’ जीरो बजट में बनी पूरी फिल्म! मोबाइल से शूट कर युवाओं ने दिखाई क्रिएटिविटी, इस दिन होगी रिलीज


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किशोर कुमार की नगरी खंडवा के एक गांव के युवाओं के हुनर सबको हैरान कर दिया है. जहां एक फिल्म बनाने में करोड़ रुपए खर्च होते थे वहीं इन युवाओं ने जीरो बजट में पूरी फिल्म बना दी है. फिल्म का नाम ‘गब्बर इस बैक 2 (2.0)’ है. इसका ट्रेलर आते ही सोशल मीडिया पर काफी चर्चा शुरू हो गई है. फिल्म 20 अक्टूबर को निमाड़ क्रिएशन यूट्यूब चैनल पर रिलीज की जाएगी.

कहा जाता है कि हुनर किसी बड़े मंच, महंगे कैमरे या लाखों रुपये के बजट का मोहताज नहीं होता. अगर जुनून और कुछ अलग करने की चाह हो तो मोबाइल फोन से भी फिल्म बनाई जा सकती है. इसका उदाहरण देखने को मिला है किशोर कुमार की नगरी खंडवा के ग्राम मलगांव खेगांव में, जहां गांव के युवाओं ने मिलकर करीब एक घंटे की पूरी फिल्म तैयार कर दी. खास बात यह है कि इस फिल्म के लिए न कोई बड़ा कैमरा खरीदा गया, न स्टूडियो बनाया गया और न ही किसी बड़े प्रोडक्शन हाउस की मदद ली गई. गांव के युवाओं ने मोबाइल फोन से ही फिल्म की शूटिंग की और गांव, खेत, सड़क और आसपास के जंगलों को अपना शूटिंग लोकेशन बना लिया. फिल्म का नाम ‘गब्बर इस बैक 2 (2.0)’ है. इसका ट्रेलर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर फिल्म को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. फिल्म 20 अक्टूबर को निमाड़ क्रिएशन यूट्यूब चैनल पर रिलीज की जाएगी.

फिल्म के डायरेक्टर कमलेश पटेल बताते हैं कि इस फिल्म में गांव के करीब 15 से 17 युवाओं ने काम किया है. खास बात यह है कि इनमें से कोई नौकरी करता है तो कोई खेती-किसानी से जुड़ा है. फिल्म बनाना इनका कोई पूरा समय का काम नहीं है, बल्कि शौक और जुनून है. कमलेश बताते हैं कि इससे पहले टीम ने 17 मिनट की पहली फिल्म ‘गब्बर इस बैक’ बनाई थी, जिसे लोगों ने काफी पसंद किया. इसके बाद टीम का हौसला बढ़ा और उन्होंने दूसरी फिल्म बनाने का फैसला किया. इस बार टीम ने करीब एक घंटे की कॉमेडी फिल्म तैयार की है. वे कहते हैं कि फिल्म बनाने के लिए उनके पास न कोई बड़ा प्रोड्यूसर था, न बड़ी टीम, न महंगे कैमरे और न स्टूडियो. मोबाइल फोन और आपसी सहयोग से ही पूरी फिल्म तैयार की गई.

नौकरी और खेती के बाद करते थे फिल्म की शूटिंग
इन युवाओं के लिए फिल्म बनाना आसान नहीं था. दिन में कोई अपनी नौकरी करता था तो कोई खेत में काम करता था. इसके बाद जब समय मिलता, तब सभी मिलकर फिल्म की शूटिंग के लिए निकलते थे.किसी ने फिल्म में अभिनय किया, किसी ने कैमरा संभाला तो किसी ने एडिटिंग और दूसरी तकनीकी जिम्मेदारियां उठाईं. इसी तरह धीरे-धीरे करीब एक साल की मेहनत के बाद फिल्म तैयार हुई.फिल्म की शूटिंग के लिए गांव की ही अलग-अलग लोकेशन का इस्तेमाल किया गया. खेत, सड़क, गांव के आसपास के इलाके और जंगल फिल्म में दिखाई देंगे. यानी फिल्म के लिए अलग से बड़े सेट बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ी.

बचपन में स्टेज पर करते थे नाटक, वहीं से मिला आइडिया
फिल्म के दूसरे डायरेक्टर भावेश पटेल पत्रकार और कलाकार भी हैं. वे बताते हैं कि गांव में रहते हुए बचपन से ही स्टेज पर नाटक करने का मौका मिलता रहा. वहीं से अभिनय और फिल्म बनाने का विचार आया. भावेश का कहना है कि छोटे शहर और गांव के बच्चों में भी काफी टैलेंट होता है. जरूरत सिर्फ इस बात की है कि उन्हें अपना हुनर दिखाने का मौका मिले. इसी सोच के साथ उन्होंने गांव के युवाओं के साथ मिलकर फिल्म बनाने का फैसला किया और मोबाइल से ही इस काम की शुरुआत कर दी.

मोबाइल बना कैमरा, गांव बना पूरा फिल्म सेट
आज के दौर में मोबाइल फोन युवाओं के हाथ में सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है. मलगांव के इन युवाओं ने इसी मोबाइल को अपना कैमरा बनाया और अपनी क्रिएटिविटी को फिल्म का रूप दे दिया. फिल्म की खासियत यह भी है कि इसमें काम करने वाले कलाकार किसी बड़े शहर से नहीं आए हैं. ये सभी इसी क्षेत्र के युवा हैं, जो अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और काम के साथ समय निकालकर अभिनय और फिल्म निर्माण कर रहे हैं. निमाड़ क्रिएशन की टीम का कहना है कि फिल्म के जरिए वे यह बताना चाहते हैं कि अगर किसी युवा के अंदर कुछ करने का जुनून है तो संसाधनों की कमी उसके रास्ते में हमेशा रुकावट नहीं बन सकती. शुरुआत छोटे स्तर से भी की जा सकती है.

अब गांव के इन युवाओं को अपनी फिल्म ‘गब्बर इस बैक 2 (2.0)’ के रिलीज होने का इंतजार है. 20 अक्टूबर को फिल्म यूट्यूब पर आएगी और इसके बाद दर्शक देख सकेंगे कि गांव के इन युवाओं ने मोबाइल फोन से अपनी सोच और कहानी को किस तरह पर्दे पर उतारा है.



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