बलिया: बेशक अंकुरित चना, मूंग और सोयाबीन के बीज का सेवन लाभकारी होता हैं, लेकिन बात अगर अंकुरित और हरे आलू की करे, तो कई भ्रम लोगो को परेशान करते है. आलू , प्याज और लहसुन हमारी रसोई के अहम हिस्सा भी हैं, लेकिन इनकी खुदाई के बाद सही भंडारण न होने पर ये खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए समस्या बन सकते हैं. नमी के संपर्क में आने पर आलू में अंकुरण के साथ हरे धब्बे भी पड़ सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, आलू के हरे हिस्से में सोलेनिन नामक विषैला तत्व बढ़ सकता है, इसलिए ऐसे आलू के सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए. अंकुरित आलू के सेवन से भी बचने की सलाह दी जाती है. ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण है कि आलू, प्याज और लहसुन को कैसे सुरक्षित रखा जाए ताकि वे जल्दी खराब न हों और खाने के लिए सुरक्षित रहें.
अंकुरित आलू हो जाता है विषैला
श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय बलिया के मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि आलू, प्याज और लहसुन जैसी कंद वाली फसलें, यदि खुदाई के बाद ठीक से संग्रहित न की जाएं, तो उनमें अंकुरण हो सकता है. लहसुन और प्याज में अंकुरण से बचने के लिए उन्हें नमी वाले स्थानों से दूर रखना चाहिए. इसी तरह, आलू भी नमी के संपर्क में आते ही अंकुरित होने लगता है. इन्हें हवादार जगह पर रखना सबसे अच्छा होता है. प्रो. सिंह ने आगे बताया कि आलू में नीले और हरे रंग के धब्बे बन जाते हैं, जो इसे खाने में विषैला बना देते हैं. ये धब्बे तब पड़ते हैं जब आलू खेत में होता है और सूरज की किरणों के संपर्क में आता है. आलू में सोलेनिन नामक एक पिगमेंट होता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है और आलू को विषैला बना देता है. ऐसे विषैले आलू का सेवन करने से पेट संबंधी कई बीमारियां हो सकती हैं. यदि आपके आलू में हरा भाग है और आप उसे खाना चाहते हैं, तो हरे भाग को अलग कर दें.
अंकुरित आलू खाने से सेहत को होता है नुकसान
अंकुरित आलू के संबंध में प्रो. सिंह ने सलाह दी कि यदि आलू में अंकुरण आ जाए तो उसे न खाएं. अंकुरित आलू में स्टार्च की मात्रा अंकुरण की ओर चली जाती है, जिससे आलू में स्टार्च की मात्रा कम हो जाती है और वह स्वादहीन हो जाता है. ध्यान रखें कि अंकुरित आलू न खाएं और यदि अंकुरण की संभावना बन रही है तो उसे तोड़ दें. किसी भी खाद्य वस्तु का अंधाधुंध प्रयोग नहीं करना चाहिए. आलू एक स्टार्च वाली फसल है और अधिक मात्रा में स्टार्च का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. अधिक मात्रा में आलू खाने से शरीर का वजन बढ़ता है और शरीर में पहुंचा स्टार्च ग्लूकोज में परिवर्तित होकर शुगर की मात्रा को बढ़ाने का कार्य करता है. इसलिए, डायबिटीज के मरीजों के लिए आलू का सेवन स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है.
जितना ज्यादा आलू पुराना होता जाता है, उसमें स्टार्च की मात्रा बढ़ती जाती है. हरी सब्जियां मिलने पर आलू का इस्तेमाल कम से कम करें या बिल्कुल न करें. भिंडी, करेला और परवल जैसी सब्जियों में आलू न डालें. हालांकि, हरी सब्जियों में आलू की मात्रा कम से कम रखें. हर सब्जी में आलू का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर सब्जी का अलग-अलग रासायनिक गुण होता है और उसमें आलू डालने से आलू जैसा स्वाद आने लगता है, जिससे उस हरी सब्जी के औषधीय गुण कमजोर हो जाते हैं.