UP IAS Transfer List, Ranvir Prasad IAS: कौन हैं IAS रणवीर प्रसाद? IIT कानपुर से पढ़ाई, 6 जिलों में DM रहे, अब बने यूपी पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन

UP IAS Transfer List, Ranvir Prasad IAS: कौन हैं IAS रणवीर प्रसाद? IIT कानपुर से पढ़ाई, 6 जिलों में DM रहे, अब बने यूपी पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन


UP IAS Transfer List, Ranvir Prasad IAS: उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारी अब एक ऐसे आईएएस अधिकारी के हाथों में है, जिनका प्रशासनिक अनुभव काफी लंबा है और जिनकी पढ़ाई भी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से हुई है.2000 बैच के आईएएस अधिकारी रणवीर प्रसाद ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के ऊर्जा विभाग का कार्यभार संभाल लिया. उन्हें प्रमुख सचिव ऊर्जा और अतिरिक्त ऊर्जा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड के अध्यक्ष का दायित्व भी संभालेंगे. उन्हें यूपीएसएलडीसी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है.शक्तिभवन पहुंचकर पदभार संभालने से पहले रणवीर प्रसाद प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद और उपभोक्ता मामले से जुड़े दायित्व संभाल रहे थे.

कौन हैं आईएएस रणवीर प्रसाद?

रणवीर प्रसाद उत्तर प्रदेश कैडर के 2000 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं.वह मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा पास की और आईएएस बने.4 सितंबर 2000 को उनकी आईएएस में नियुक्ति हुई. उनकी सरकारी सेवा में एंट्री 7 सितंबर 2000 को हुई थी.उनकी शैक्षणिक योग्यता इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक है.उन्होंने आईआईटी कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है.

IIT कानपुर से इंजीनियरिंग और फिर IAS

रणवीर प्रसाद की पढ़ाई इंजीनियरिंग की रही है लेकिन उन्होंने आगे का करियर प्रशासनिक सेवा में बनाने का फैसला किया. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा के जरिए आईएएस में जगह बनाई. 2000 बैच में उनका सेलेक्‍शन हुआ और इसके बाद उनकी प्रशासनिक यात्रा शुरू हुई. उन्होंने प्रशिक्षण के बाद तमिलनाडु कैडर में कई महत्वपूर्ण फील्ड पोस्ट संभालीं. बाद में वह उत्तर प्रदेश कैडर में शामिल हो गए.

तमिलनाडु में पहली तैनाती

आईएएस बनने के शुरुआती वर्षों में रणवीर प्रसाद की तैनाती तमिलनाडु में रही. सितंबर 2000 से जुलाई 2002 तक वह प्रशिक्षण अवधि में रहे. इसके बाद जुलाई 2002 से जुलाई 2004 तक सब-कलेक्टर के तौर पर काम किया. जुलाई से दिसंबर 2004 के बीच भी उन्होंने सब-कलेक्टर की जिम्मेदारी संभाली.दिसंबर 2004 में उन्हें नागपट्टिनम में एडिशनल कलेक्टर बनाया गया. वह मई 2006 तक इस पद पर रहे. इसके बाद मई 2006 से सितंबर 2007 तक तिरुवल्लूर के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर रहे. सितंबर 2007 से मार्च 2008 तक उन्होंने चेन्नई मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के सीईओ की जिम्मेदारी संभाली.मार्च से मई 2008 के बीच वह तमिलनाडु ग्रामीण विकास विभाग में एडिशनल डायरेक्टर रहे.

2008 के बाद यूपी कैडर में हो गए शामिल

मई 2008 के बाद रणवीर प्रसाद उत्तर प्रदेश कैडर में शामिल हो गए. शुरुआत में उन्हें अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग में विशेष सचिव बनाया गया. इसके बाद सितंबर 2008 में वह एजुकेशन फॉर ऑल के एडिशनल स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर भी रहे.फरवरी 2009 में उन्हें संतकबीरनगर का जिलाधिकारी और कलेक्टर बनाया गया.जुलाई 2009 में वह ललितपुर के डीएम बने. इसके बाद 2011 में कुछ समय के लिए लघु उद्योग विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी संभाली और फरवरी 2011 से अप्रैल 2012 तक मैनपुरी के जिलाधिकारी रहे.अप्रैल 2012 में वह एडिशनल कमिश्नर, रूरल डेवलपमेंट के पद पर आए. इसके बाद जून 2012 में उन्नाव के जिलाधिकारी बने और जुलाई 2012 में फिर ललितपुर के डीएम की जिम्मेदारी संभाली. इस तरह उन्हें उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जिला प्रशासन चलाने का काफी अनुभव मिला. वह आजमगढ़, मैनपुरी, ललितपुर, संतकबीरनगर, उन्नाव और भदोही समेत छह जिलों के जिलाधिकारी रह चुके हैं.

बिजली विभाग में पहले भी कर चुके हैं काम

रणवीर प्रसाद के लिए ऊर्जा विभाग पूरी तरह नया क्षेत्र नहीं है. फरवरी 2013 में उन्हें दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का एमडी बनाया गया. आगरा में उन्होंने इस जिम्मेदारी को संभाला. इसके बाद ऊर्जा विभाग से जुड़े प्रबंधन का अनुभव उनके प्रशासनिक करियर का अहम हिस्सा बना.
मार्च 2024 से जनवरी 2025 तक उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और पारेषण से जुड़े निगमों में एमडी के तौर पर काम किया. यही वजह है कि अब जब उन्हें पूरे ऊर्जा विभाग और पावर कॉरपोरेशन की कमान दी गई है तो बिजली क्षेत्र से उनका पहले का प्रशासनिक अनुभव भी चर्चा में है.

 संभाली कई जिम्मेदारियां

ऊर्जा विभाग में जिम्मेदारी मिलने से पहले रणवीर प्रसाद ने कई दूसरे महत्वपूर्ण विभागों में भी काम किया. जून 2013 में वह समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव बने. इसके बाद वह उत्तर प्रदेश समाज कल्याण निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक भी रहे.मार्च से जुलाई 2014 के बीच वह भदोही के डीएम रहे.जुलाई 2014 के बाद कुछ समय के लिए वह वेटिंग में रहे और फिर जुलाई 2014 से जनवरी 2015 तक आजमगढ़ के जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाली.2015 में उन्होंने मनरेगा से जुड़ी अतिरिक्त आयुक्त की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद सितंबर 2015 से दिसंबर 2015 तक दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव और पीसीडीएफ के चीफ जनरल मैनेजर रहे. जनवरी से मार्च 2016 के बीच वह इसी विभाग में सचिव और पीसीडीएफ के चीफ जनरल मैनेजर रहे.इसके बाद मार्च 2016 में उन्हें हैंडलूम एवं टेक्सटाइल विभाग का कमिश्नर और डायरेक्टर बनाया गया. कुछ समय बाद उनके पास लेबर कमिश्नर की जिम्मेदारी भी आई. 2017 में हैंडलूम एवं टेक्सटाइल के साथ कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी लिमिटेड यानी केस्को के एमडी की जिम्मेदारी भी संभाली. इसके बाद वह यूपीएसआईडीसी के एमडी और उद्योग विभाग के कमिश्नर एवं डायरेक्टर भी रहे.

यूपीएसआईडीसी से नगर विकास और बरेली मंडल तक

मार्च 2018 तक रणवीर प्रसाद यूपीएसआईडीसी के एमडी रहे. इसके बाद जुलाई 2018 में उन्हें नगर विकास विभाग का सचिव बनाया गया.अगस्त 2018 से मार्च 2021 तक उन्होंने बरेली मंडल के मंडलायुक्त के रूप में काम किया.मंडलायुक्त के तौर पर काम करने के बाद उन्हें राजस्व, बेसिक शिक्षा और राहत से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियां मिलीं.मार्च 2021 में वह राजस्व और बेसिक शिक्षा विभाग के सचिव तथा राहत आयुक्त बने. इसके बाद उनके पास राजस्व विभाग और राहत आयुक्त के साथ चकबंदी से जुड़े दायित्व भी रहे. सितंबर 2022 तक वह इन जिम्मेदारियों में रहे.

6 जिलों के DM से लेकर चेयरमैन तक

रणवीर प्रसाद के करीब 26 साल के प्रशासनिक करियर को देखें तो उनकी पोस्टिंग का दायरा काफी व्यापक रहा है. तमिलनाडु में सब-कलेक्टर, एडिशनल कलेक्टर और डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर से लेकर उत्तर प्रदेश में छह जिलों के डीएम, मंडलायुक्त, सचिव, प्रमुख सचिव, हाउसिंग कमिश्नर, उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बिजली क्षेत्र के एमडी तक वह अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा चुके हैं.उनके करियर में ग्रामीण विकास, शिक्षा, समाज कल्याण, उद्योग, हैंडलूम, श्रम, नगर विकास, राजस्व, राहत, आवास, खाद्य एवं रसद और ऊर्जा जैसे कई विभाग शामिल रहे हैं. अब उनके सामने उत्तर प्रदेश के पूरे ऊर्जा महकमे की कमान है.



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