संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर अपना पुराना राग अलापना शुरू कर दिया है. दुनिया भर के नेताओं के सामने ट्रंप ने एक नया दावा करते हुए कहा कि उनके दखल की वजह से ही साल 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच भीषण जंग रुक पाई थी. ट्रंप ने अपनी पीठ थपथपाते हुए और एक बेतुकी गणित लगाई है. ट्रंप के मुताबिक उनकी बदौलत 3 करोड़ लोगों की जान बची थी. हालांकि, भारत ने पहले ही कहा है कि सीजफायर के लिए पाकिस्तान खुद गिड़गिड़ाया था और भारत अपनी सुरक्षा के मामलों में किसी भी तीसरे देश की टांग अड़ाना कभी बर्दाश्त नहीं करता.
यूएन के मंच से ट्रंप ने बजाया अपनी जीत का ढोल
संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सरकार के कामकाज और दुनिया में शांति लाने के प्रयासों का जमकर बखान किया. भाषण के दौरान उन्होंने दक्षिण एशिया के संकट को अपनी सबसे बड़ी कामयाबी के रूप में पेश किया. ट्रंप ने कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध का खतरा मंडरा रहा था, तब वाशिंगटन ने बहुत तेजी से कूटनीतिक कदम उठाए. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की वजह से ही दो परमाणु हथियार वाले देश आपस में युद्ध छेड़ने से पीछे हटे. ट्रंप ने इस पूरे मामले को अपनी ‘ग्लोबल पीसमेकिंग’ नीति की एक बड़ी मिसाल बनाकर दुनिया के सामने रखा. ट्रंप ने इसका क्रेडिट देने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का शुक्रिया भी कहा.
आखिर क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और क्यों बिगड़े थे हालात?
डोनाल्ड ट्रंप जिस घटना का क्रेडिट ले रहे हैं, उसकी शुरुआत अप्रैल 2025 में हुई थी. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक कायराना आतंकी हमला हुआ था, जिसमें बेगुनाह लोगों की धर्म पूछ-पूछकर जान ली गई थी. इस आतंकी हमले का करारा जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने सीमा पार चल रहे आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था. इस ऑपरेशन में पाकिस्तान का आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हो गया और 100 से भी ज्यादा आतंकवादी मारे गए. भारतीय सेना की इस अचानक और आक्रामक कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया था.
- सीमा पर भारी गोलाबारी: नियंत्रण रेखा (LoC) पर दोनों तरफ से तोपों और भारी हथियारों का इस्तेमाल शुरू हो गया था.
- लड़ाकू विमानों की तैनाती: दोनों देशों ने अपने लड़ाकू विमानों को गश्त पर लगा दिया था और हवा से हमले का खतरा बढ़ गया था.
- सैनिकों की तैनाती: अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर हजारों सैनिकों को मोर्चे पर उतार दिया गया था.
इसी गंभीर माहौल को देखकर पूरी दुनिया को डर लगने लगा था कि ये मामूली लड़ाई कहीं परमाणु युद्ध में न बदल जाए. हालांकि, जब पाकिस्तान के हथियार एक-एक करके फेल होने लगे तो शहबाज शरीफ रोते हुए ट्रंप के पास मदद के लिए पहुंचे. अमेरिका से भारत को कई बार कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की गई लेकिन कोई फोन रिसीव नहीं किया गया. आखिरकार पाकिस्तानी ने फोन करके गिड़गिड़ाते हुए सीजफायर की गुजारिश की, तब जाकर भारत ने भी हमले रोके.
ट्रंप के भाषण के 3 सबसे बड़े दावे
- 3 करोड़ लोगों की जान बचाने का दावा: ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका तुरंत दखल नहीं देता, तो तबाही का मंजर भयानक होता. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने उन्हें बताया था कि अगर युद्ध नहीं रुका तो करीब 3 करोड़ लोग मारे जा सकते हैं.
- परमाणु हमले का डर: उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय दोनों देशों की सेनाएं इतने गुस्से में थीं कि परमाणु युद्ध का खतरा सिर पर आ खड़ा हुआ था.
- आर्थिक दबाव और सीधी बात: ट्रंप का दावा है कि उन्होंने नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बड़े नेताओं से सीधे बात की और व्यापार रोकने की चेतावनी देकर दोनों को शांत कराया.
भारत का रुख : किसी तीसरे देश का दखल मंजूर नहीं
भले ही ट्रंप अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका की वाहवाही लूट रहे हों, लेकिन भारत की नीति शुरू से ही बिल्कुल साफ रही है. भारत का मानना है कि पाकिस्तान के साथ उसका हर विवाद पूरी तरह से दोनों देशों का आपसी मामला है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बार-बार साफ किया है कि भारत अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसलों में किसी भी तीसरे देश का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करता. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत का अपना स्वतंत्र सैन्य फैसला था. भारत का कहना है कि सीमा पर हालात को सामान्य बनाने की बात भी भारत और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों के बीच तय नियमों के तहत ही हुई थी, न कि किसी अमेरिकी दबाव के कारण.
क्या है असली हकीकत? एक्सपर्ट्स ने बताई अंदर की बात
रक्षा और रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान माहौल गर्म था, तब अमेरिका ने दोनों देशों से बातचीत का रास्ता जरूर खुला रखा था. लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि भारत ने किसी के कहने पर अपनी सैन्य कार्रवाई रोकी.
- भारत की रणनीति: भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत जो लक्ष्य तय किए थे, उन्हें पूरा करने के बाद ही अपनी मर्जी से कार्रवाई रोकी थी.
- पाकिस्तान की मजबूरी: जब भारतीय सेना का दबाव बढ़ा, तो पाकिस्तान घबरा गया और उसने अमेरिका से मदद की गुहार लगाई. इसी वजह से वो अमेरिकी दावों का समर्थन करता है.
- ट्रंप का अपना फायदा: ट्रंप अपनी रैलियों में खुद को एक ऐसा नेता दिखाते हैं जो दुनिया में युद्ध रुकवाता है. इसलिए वे इस घटना को अपनी बहुत बड़ी कूटनीतिक कामयाबी बताकर पेश कर रहे हैं.
कुल मिलाकर, ट्रंप का 3 करोड़ लोगों की जान बचाने का ये दावा उनके अपने राजनीतिक प्रचार का हिस्सा है. सच्चाई यही है कि भारत ने अपनी सुरक्षा और फैसलों से कभी कोई समझौता नहीं किया और भारत को अपने कदम उठाने के लिए किसी दूसरे देश की सलाह की जरूरत नहीं है.