Sahil Wakode Case : सूर्यनारायण डूला के समर्थन में उतरे 3 IIT के टीचर, निष्पक्ष जांच की मांग

Sahil Wakode Case : सूर्यनारायण डूला के समर्थन में उतरे 3 IIT के टीचर, निष्पक्ष जांच की मांग


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Sahil Wakode Case : आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोटे की मौत के मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में तीन IIT के फैकल्टी फोरम सामने आए हैं. IIT Bombay, IIT Madras और IIT Delhi ने एकजुटता जताते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है.

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Sahil Wakode Case : स्टूडेंट प्रो. डूला को निलंबित करने की मांग कर रहे हैं.

Sahil Wakode Case : आईआईटी बॉम्बे के बीटेक स्टूडेंट साहिल वाकोडे की मौत मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के समर्थन में तीन IITs के फैकल्टी फोरम सामने आए हैं. आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास के बाद आईआईटी दिल्ली फैकल्टी फोरम ने भी प्रोफेसर डूला के प्रति एकजुटता जताते हुए उनके खिलाफ सार्वजनिक रूप से लगाए जा रहे आरोपों पर चिंता जाहिर की है.

आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने 21 सितंबर को डूला के समर्थन में एक बयान जारी किया था. बयान में कहा गया था कि वह प्रोफेसर के साथ मजबूती से खड़ा है. फोरम ने छात्र की मौत पर दुख जाहिर करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता है. साथ ही कहा कि प्रो. डूला परीक्षा के दौरान संस्थान की सीनेट से मंजूर और लागू शैक्षणिक नीतियों के तहत अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे.

फोरम ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रोफेसर डूला को IIT बॉम्बे की सेवा से निलंबित नहीं किया गया है. उन्हें 18 सितंबर की घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए डीन (प्रशासनिक मामलों) की जिम्मेदारी से अस्थायी तौर पर मुक्त किया गया है. इसके बाद सोमवार को IIT बॉम्बे फैकल्टी फोरम के सदस्यों ने उनके समर्थन में मार्च भी निकाला.

IIT दिल्ली फैकल्टी फोरम ने भी जारी किया बयान

आईआईटी दिल्ली फैकल्टी फोरम ने भी प्रोफेसर डूला के समर्थन में बयान जारी किया है. 22 सितंबर को जारी बयान में फोरम ने कहा है कि परीक्षा के दौरान प्रोफेसर डूला संस्थान के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे. फोरम ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ बिना विश्वसनीय साक्ष्यों के सार्वजनिक रूप से कई आरोप लगाए गए और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई.

IIT दिल्ली फैकल्टी फोरम ने मौजूदा विवाद के संदर्भ में अकादमिक ईमानदारी और निष्पक्ष मूल्यांकन की आवश्यकता पर भी जोर दिया. उसने ‘मोब-ड्रिवन बिहेवियर’ यानी भीड़ के दबाव में होने वाले व्यवहार को लेकर चिंता जताई और कहा कि इस तरह के घटनाक्रम शिक्षकों के लिए निष्पक्ष तरीके से अपनी जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल बना सकते हैं. फोरम ने IIT बॉम्बे से प्रो. डूला और उनके परिवार को आवश्यक संस्थागत सहायता उपलब्ध कराने की अपील भी की है.

IIT मद्रास से भी आया समर्थन

आईआईटी मद्रास फैकल्टी एसोसिएशन ने भी 21 सितंबर को प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के प्रति एकजुटता जताई थी. उसने निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की तथा कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए.



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