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Pahadi Mooli Benefits: उत्तराखंड के पहाड़ों में मिलने वाली मूली सिर्फ एक आम सब्जी नहीं, बल्कि यहां के पारंपरिक खान-पान का खास हिस्सा है. मैदानी मूली से अलग स्वाद, खुशबू और बनावट वाली इस मूली का इस्तेमाल सलाद से लेकर सब्जी, अचार और इसके पत्तों से बनने वाले कई पहाड़ी पकवानों में किया जाता है. खास बात यह है कि पहाड़ी इलाकों में इसकी उपलब्धता भी सीमित समय के लिए रहती है, जिससे स्थानीय बाजार में इसकी अलग पहचान बनी हुई है. नैनीताल के आसपास के कुछ गांवों की मूली अपने स्वाद और आकार के लिए खास मानी जाती है. आखिर पहाड़ी मूली मैदानी मूली से कितनी अलग है, इसमें क्या खास है और नैनीताल के बाजार में इसकी कीमत कितनी है, जानिए पूरी जानकारी.
उत्तराखंड के पहाड़ सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक कृषि और खान-पान के लिए भी प्रसिद्ध हैं. पहाड़ों में उगाई जाने वाली पहाड़ी मूली भी ऐसी ही खास सब्जियों में शामिल है. सामान्य मैदानी मूली से इसका आकार, रंग और स्वाद अलग नजर आता है. पहाड़ी इलाकों में इसे लंबे समय से स्थानीय भोजन का हिस्सा बनाया जाता रहा है. सलाद से लेकर सब्जी और अचार तक, इसका इस्तेमाल कई तरह से किया जाता है.
स्थानीय लोगों के मुताबिक पहाड़ों में मुख्य रूप से दो तरह की मूली देखने को मिलती है. इनमें एक गोल आकार की होती है, जबकि दूसरी लंबी होती है. इनका आकार सामान्य मैदानी मूली से अलग हो सकता है. पहाड़ी जलवायु और स्थानीय परिस्थितियों में उगने वाली यह मूली अपने स्वाद और बनावट के लिए जानी जाती है. अलग-अलग क्षेत्रों में इसके रंग और आकार में भी अंतर देखने को मिल सकता है.
पहाड़ी मूली का स्वाद सामान्य मूली की तुलना में अधिक तीखा और इसकी खुशबू भी अलग महसूस होती है. यही वजह है कि स्थानीय लोग इसे कई पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल करते हैं. इसे कच्चा सलाद के तौर पर खाने के अलावा सब्जी और अचार के रूप में भी तैयार किया जाता है. पहाड़ के पारंपरिक भोजन में मूली का खास स्थान है और स्थानीय स्वाद पसंद करने वाले लोगों के लिए यह एक खास सब्जी मानी जाती है.
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पहाड़ी मूली की खास बात यह है कि इसके सिर्फ जड़ वाले हिस्से का इस्तेमाल नहीं होता. इसके हरे पत्ते और कोमल तने भी खाने में उपयोग किए जाते हैं. पहाड़ों में मूली के पत्तों की सब्जी बनाई जाती है और इन्हें दाल समेत कई स्थानीय पकवानों में भी मिलाया जाता है. यानी एक ही सब्जी के अलग-अलग हिस्सों का इस्तेमाल कर पारंपरिक पहाड़ी भोजन को स्वादिष्ट बनाया जाता है.
नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. एमएस दुग्ताल के अनुसार, मूली में पानी, फाइबर के साथ विटामिन सी, पोटेशियम, मैंगनीज और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद करता है. मूली और इसके पत्तों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है. हालांकि, पीलिया या लिवर संबंधी बीमारी में इसे इलाज को विकल्प नहीं मानना चाहिए हालांकि आप इसे अपने आहार में शामिल कर सकते हैं.
स्थानीय सब्जी विक्रेता दीपेश के अनुसार पहाड़ी मूली सीमित समय के लिए उपलब्ध होती है. पहाड़ों में इसकी उपलब्धता मुख्य रूप से जुलाई से अक्टूबर के बीच रहती है. वहीं मैदानी इलाकों में मूली आमतौर पर सर्दियों में अधिक मिलती है. पहाड़ी मूली का स्वाद और इसके गुण स्थानीय और पहाड़ों में आने वाले लोगों को आकर्षित करता है.
दीपेश बताते हैं कि नैनीताल के बाजार में पहाड़ी मूली करीब 50 से 60 रुपये में उपकुल जाएगी. इसकी कीमत मौसम, आकार और स्थानीय बाजार के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. नैनीताल आने वाले कई पर्यटक पहाड़ी सब्जियों और स्थानीय उत्पादों को अपने साथ ले जाना पसंद करते हैं. ऐसे में पहाड़ी मूली पर्यटकों के लिए पहाड़ के पारंपरिक स्वाद को बरकरार रखे हुए है.
नैनीताल के आसपास कई क्षेत्रों में पहाड़ी मूली की खेती और बिक्री होती है. स्थानीय लोगों के अनुसार नयना गांव, बल्दियाखान और खुर्पाताल की मूली अपने स्वाद और आकार के लिए खास पहचान रखती है. इन इलाकों की भौगोलिक परिस्थितियां और स्थानीय खेती करने का तरीका इसके स्वाद को अलग बनाता है.