Opinion : “हाँ, हम समझदार हुए हैं!” बूढ़ी कहने पर करीना का करारा जवाब, एज-शेमिंग के डर से आजाद होना क्यों है जरूरी?

Opinion : “हाँ, हम समझदार हुए हैं!” बूढ़ी कहने पर करीना का करारा जवाब, एज-शेमिंग के डर से आजाद होना क्यों है जरूरी?


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Kareena Kapoor Age Shaming Trolls Reply : करीना कपूर ने उम्र पर टिप्पणी करने वालों को ऐसा जवाब दिया, जो सिर्फ एक अभिनेत्री की बात नहीं, बल्कि हर उस महिला की आवाज है जो उम्र बढ़ने को लेकर समाज के बनाए पैमानों से थक चुकी है. आखिर महिलाएं कब तक उम्र छिपाने, जवां दिखने और एज-शेमिंग के डर में जीती रहेंगी?

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उम्र का बढ़ना इस बात की गारंटी है कि आप जिंदा हैं, आगे बढ़ रही हैं और जिंदगी के हर रंग को देख रही हैं. (Instagram)

Kareena Kapoor Age Shaming Trolls Reply : यह किस्सा तब शुरू हुआ जब करीना कपूर खान ने अपनी खास सहेली अमृता अरोड़ा के साथ एक पार्टी की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की. आम तौर पर दो सहेलियों का साथ हंसते-मुस्कुराते वक्त बिताना एक नॉर्मल बात है. लेकिन इंटरनेट की दुनिया अजीब है, यहाँ ट्रोलर्स का एक ऐसा वर्ग हमेशा घात लगाकर बैठा रहता है जिसे दूसरों की खुशियों से ज्यादा उनकी शारीरिक कमियां या उम्र नजर आती है.

उम्र का बढ़ना इस बात की गारंटी है कि आप जिंदा हैं, आगे बढ़ रही हैं और जिंदगी के हर रंग को देख रही हैं. (Instagram)

तस्वीर सामने आते ही कुछ ट्रोल्स ने कमेंट सेक्शन में दोनों अभिनेत्रियों को “बूढ़ी” कहकर ट्रोल करना शुरू कर दिया. मकसद साफ था- महिलाओं को यह अहसास कराना कि उनकी जवानी ढल रही है और अब वे इस तथाकथित ग्लैमरस दुनिया के ‘लायक’ नहीं रहीं. लेकिन इस बार जवाब देने वाली कोई आम महिला नहीं, बल्कि करीना कपूर थीं. 

करीना ने इन भद्दे कमेंट्स को नजरअंदाज करने या डिलीट करने के बजाय सीधे अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर उस ट्रोल का स्क्रीनशॉट शेयर किया और बेबाकी से लिखा:

“क्यों किसी को बूढ़ी बोलना एक गाली या बेइज्जती माना जाता है? मेरे लिए यह सिर्फ एक शब्द है, जिसका मतलब है बूढ़ा होना. हाँ, हम पहले से ज्यादा समझदार और अनुभवी हुए हैं!”

यह जवाब सिर्फ एक सेलिब्रिटी का पलटवार नहीं था, बल्कि यह उस रूढ़िवादी मानसिकता के मुंह पर एक करारा तमाचा था जो महिलाओं की उम्र को उनकी कमजोरी बना देना चाहती है.

एज-शामिंग (Age-Shaming) आखिर है क्या और यह महिलाओं पर ही क्यों भारी पड़ती है?
साइकोलॉजी के नजरिए से देखें तो एज-शामिंग किसी भी व्यक्ति को उसकी उम्र के आधार पर हीन भावना महसूस कराने या शर्मिंदा करने की एक सोची-समझी कोशिश है. लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इसका शिकार सबसे ज्यादा महिलाएं होती हैं.

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