Inspirational Education Story: गोदारा ने 76 साल की उम्र में दोबारा किताबें उठाईं। 81 साल की उम्र में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की और अब 85 साल की उम्र में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय यानी इग्नू से एमए पूरा किया है.उन्होंने 1200 में से 965 अंक हासिल किए. अब वह पीएचडी या लॉ डिग्री करने के बारे में सोच रहे हैं.उनकी कहानी के बाद सवाल यह उठता है कि आखिर भारत में कोई व्यक्ति कितनी उम्र तक पढ़ाई कर सकता है? क्या 60 या 70 की उम्र में ग्रेजुएशन किया जा सकता है? क्या 80 साल की उम्र में एमए में एडमिशन मिल सकता है? और क्या बुजुर्ग उम्र में पीएचडी करना भी संभव है?
इसका सीधा जवाब है कि भारत में उच्च शिक्षा के लिए सभी डिग्रियों पर लागू होने वाली कोई एक सार्वभौमिक अधिकतम उम्र सीमा नहीं है लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि हर विश्वविद्यालय और हर कोर्स में उम्र की कोई शर्त ही नहीं होगी. उम्र की शर्त कोर्स, विश्वविद्यालय, प्रवेश परीक्षा और कभी-कभी सीट या स्कॉलरशिप की पात्रता के आधार पर अलग हो सकती है.
76 साल में शुरू की पढ़ाई, 85 में पूरी की एमए
लाल चंद गोदारा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि पढ़ाई दोबारा शुरू करने के लिए हमेशा कम उम्र का होना जरूरी नहीं है.उन्होंने 76 साल की उम्र में फिर से पढ़ाई शुरू की. करीब पांच साल बाद 81 की उम्र में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने इग्नू के एमए प्रोग्राम में एडमिशन लिया और 85 साल की उम्र में मास्टर डिग्री पूरी कर ली.उन्होंने एमए में 1200 में से 965 अंक हासिल किए हैं. खास बात यह है कि एमए के बाद भी उनका पढ़ाई से रिश्ता खत्म नहीं हुआ है. वह अब पीएचडी या लॉ डिग्री करने के बारे में विचार कर रहे हैं यानी जिस उम्र में बहुत से लोग औपचारिक शिक्षा को अपनी जिंदगी का पुराना अध्याय मान लेते हैं गोदारा ने उसी उम्र में किताबों के साथ अपनी दूसरी पारी शुरू की.
पहले समझिए- ग्रेजुएशन करने की कोई तय अधिकतम उम्र है?
ग्रेजुएशन के लिए पूरे देश में एक जैसी अधिकतम उम्र सीमा नहीं है. अलग-अलग विश्वविद्यालय अपने एडमिशन नियम तय कर सकते हैं इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि भारत में हर जगह ग्रेजुएशन के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है.मसलन केरल के यूनिवर्सिटी ऑफ केरल से संबद्ध कॉलेजों के एफवाईयूजीपी के 2025-26 प्रॉस्पेक्टस में साफ लिखा है कि इन प्रोग्राम में एडमिशन के लिए कोई अपर एज लिमिट नहीं है.इसी तरह कुछ अन्य संस्थान और विश्वविद्यालय भी अपने खास प्रोग्राम के लिए एज बार नहीं रखते इसलिए अगर कोई व्यक्ति 50, 60 या 70 साल की उम्र में ग्रेजुएशन करना चाहता है तो उसे सबसे पहले उस विश्वविद्यालय और चुने गए कोर्स की लेटेस्ट एलिजिबिलिटी देखनी चाहिए यानी उम्र ज्यादा होना अपने आप में हर ग्रेजुएशन प्रोग्राम के लिए अयोग्यता नहीं बनता लेकिन एडमिशन लेने से पहले संबंधित संस्थान के नियम देखना जरूरी है.
ओपन यूनिवर्सिटी में उम्र को लेकर ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी
उम्रदराज लोगों के लिए ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग यानी ओडीएल एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है.इसका फायदा यह है कि पढ़ाई को नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियों या दूसरी व्यस्तताओं के साथ भी जारी रखना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है.इग्नू के कई प्रोग्राम में एज बार नहीं है. विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी में कई यूजी और पीजी प्रोग्राम के लिए उम्र की पाबंदी नहीं होने की जानकारी दी गई है. उदाहरण के तौर पर इग्नू के एमए जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन प्रोग्राम में बैचलर डिग्री के साथ कोई एज बार नहीं है वहीं उसके कई एमएससी प्रोग्राम में भी एज रिस्ट्रिक्शन नहीं दी गई है इसलिए अगर कोई व्यक्ति काफी अधिक उम्र में दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहता है तो ओपन यूनिवर्सिटी के प्रोग्राम उसके लिए एक रास्ता हो सकते हैं हालांकि यहां भी हर कोर्स की एलिजिबिलिटी अलग से देखनी होगी.
MA, M.Sc या M.Com के लिए क्या उम्र की सीमा है?
पोस्ट ग्रेजुएशन में भी पूरे देश के सभी कोर्स के लिए एक समान अपर एज लिमिट नहीं है.कई विश्वविद्यालय और प्रोग्राम में उम्र की कोई अधिकतम सीमा नहीं रखी जाती. इग्नू के आधिकारिक प्रोग्राम डिटेल में कई पीजी कोर्स के लिए एज बार नहीं होने की जानकारी दी गई है.उदाहरण के लिए एमए जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में एलिजिबिलिटी बैचलर डिग्री है और एज लिमिट नो बार है.इसी तरह इग्नू के कुछ एमएससी प्रोग्राम में भी नो एज बार या नो रिस्ट्रिक्शंस दिया गया है लेकिन यहां एक जरूरी फर्क समझना होगा.किसी कोर्स में एडमिशन के लिए एज बार नहीं होना और किसी स्कॉलरशिप के लिए एज बार नहीं होना दो अलग बातें हैं.मिसाल के तौर पर यूजीसी की नेशनल स्कॉलरशिप फॉर पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज में उम्र सीमा 30 साल है यानी कोई व्यक्ति किसी पीजी प्रोग्राम में उम्र के कारण एडमिशन ले सकता है, लेकिन उस खास स्कॉलरशिप के लिए पात्र न हो इसलिए सिर्फ स्कॉलरशिप की एज लिमिट देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि पीजी एडमिशन की भी वही उम्र सीमा है.
पीएचडी के लिए भी उम्र की कोई एक आखिरी सीमा नहीं?
पीएचडी को लेकर भी तस्वीर काफी हद तक ऐसी ही है. यूजीसी ने पीएचडी के लिए मिनिमम स्टैंडर्ड्स एंड प्रोसीजर फॉर अवॉर्ड ऑफ पीएचडी डिग्री रेगुलेशंस 2022 जारी किए हैं. इन नियमों में पीएचडी एडमिशन के लिए एकेडमिक एलिजिबिलिटी, एडमिशन प्रोसेस और रिसर्च से जुड़े मानक तय किए गए हैं.वहीं यूजीसी-नेट के मौजूदा नियमों में पीएचडी एडमिशन के लिए यूजीसी-नेट में आवेदन करने की कोई अपर एज लिमिट नहीं है हालांकि जूनियर रिसर्च फेलोशिप यानी जेआरएफ के लिए अलग एज लिमिट होती है. सीएसआईआर-यूजीसी नेट के नियम भी पीएचडी एडमिशन के लिए अपर एज लिमिट नहीं बताते हैं.इसका मतलब यह है कि पीएचडी एडमिशन और पीएचडी फेलोशिप को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए. कोई व्यक्ति पीएचडी एडमिशन के लिए एज-वाइज एलिजिबल हो सकता है, लेकिन किसी फेलोशिप या स्कॉलरशिप के लिए अलग एज क्राइटेरिया लागू हो सकता है.
विश्वविद्यालय तय करते हैं पीएचडी की एलिजिबिलिटी
यहां एक और महत्वपूर्ण बात है. पीएचडी में सिर्फ उम्र ही नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की एलिजिबिलिटी, सब्जेक्ट रिक्वायरमेंट्स, एंट्रेंस टेस्ट, इंटरव्यू, रिसर्च प्रपोजल और उपलब्ध सुपरवाइजर जैसी शर्तें भी महत्वपूर्ण होती हैं.उदाहरण के लिए नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी अपने पीएचडी प्रोग्राम के लिए साफ कहता है कि आवेदन करने की कोई एज लिमिट नहीं है.आईआईएफटी के पीएचडी इन मैनेजमेंट प्रोग्राम में भी आवेदन के लिए एज लिमिट नहीं है. दूसरी तरफ कुछ संस्थानों में खास कैटेगरी या फेलोशिप के लिए एज लिमिट हो सकती है इसलिए पीएचडी के मामले में भी किसी एक विश्वविद्यालय का नियम पूरे देश के हर पीएचडी प्रोग्राम पर लागू नहीं किया जा सकता.एक और जरूरी बात-एडमिशन और एंट्रेंस एग्जाम की उम्र अलग हो सकती है. यही वह जगह है जहां कई विद्यार्थी भ्रमित होते हैं.किसी डिग्री प्रोग्राम में एडमिशन के लिए अपर एज लिमिट नहीं हो सकती, लेकिन उस प्रोग्राम में प्रवेश के लिए होने वाली एंट्रेंस एग्जामिनेशन में एज लिमिट हो सकती है.इसका उदाहरण जेईई एडवांस्ड 2026 है.आईआईटी में अंडरग्रेजुएट एडमिशन के लिए जेईई एडवांस्ड देना होता है और 2026 के नियमों में सामान्य उम्मीदवारों के लिए जन्मतिथि से जुड़ा एज क्राइटेरिया रखा गया था जबकि एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी उम्मीदवारों के लिए पांच साल की छूट थी इसलिए अगर कोई व्यक्ति दोबारा ग्रेजुएशन करना चाहता है तो उसे केवल डिग्री की एज लिमिट नहीं देखनी चाहिए. यह भी देखना होगा कि उस कोर्स में एडमिशन किस माध्यम से होता है और एंट्रेंस एग्जामिनेशन की एलिजिबिलिटी क्या है?
लॉ डिग्री का क्या मामला है?
लाल चंद गोदारा एमए के बाद लॉ डिग्री के बारे में भी सोच रहे हैं. लॉ प्रोग्राम में भी एज एलिजिबिलिटी प्रोग्राम और विश्वविद्यालय के नियमों के हिसाब से देखनी होती है.उदाहरण के तौर पर एचएसएनसी यूनिवर्सिटी मुंबई के 3 वर्षीय एलएलबी प्रोग्राम की एलिजिबिलिटी में ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट उम्मीदवारों के लिए कोई एज लिमिट नहीं दी गई है इसलिए 50, 60 या उससे अधिक उम्र में कानून पढ़ने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति के लिए रास्ता पूरी तरह बंद है ऐसा कहना सही नहीं होगा लेकिन जिस विश्वविद्यालय में आवेदन करना है उसके मौजूदा एडमिशन नोटिफिकेशन को जरूर देखना चाहिए.
क्या 80 साल की उम्र में भी पढ़ाई संभव है?
लाल चंद गोदारा की 85 साल की उम्र में एमए पूरी करने की कहानी बताती है कि उम्र अपने आप में हर उच्च शिक्षा प्रोग्राम के लिए अंतिम बाधा नहीं है लेकिन यहां एक बात साफ समझना जरूरी है. 85 साल में एमए किया जा सकता है का मतलब यह नहीं है कि देश के हर विश्वविद्यालय के हर एमए प्रोग्राम में 85 साल के व्यक्ति को बिना किसी दूसरी शर्त के एडमिशन मिल जाएगा.एडमिशन के लिए एकेडमिक क्वालिफिकेशन, कोर्स-स्पेसिफिक एलिजिबिलिटी, एंट्रेंस एग्जामिनेशन, विश्वविद्यालय के नियम और प्रोग्राम की मोड ऑफ स्टडी जैसी चीजें देखनी पड़ सकती हैं.इग्नू जैसे संस्थानों में कई प्रोग्राम में एज बार नहीं है इसलिए ऐसे लर्नर्स के लिए विकल्प उपलब्ध हैं.