मणिपुर की जिस लड़की को कभी अकेले घर से निकलने में लगता था डर, आज बनीं हैं मिरांडा हाउस की छात्रसंघ अध्यक्ष, जानें कौन हैं माटिल्डा लौरेंबाम

मणिपुर की जिस लड़की को कभी अकेले घर से निकलने में लगता था डर, आज बनीं हैं मिरांडा हाउस की छात्रसंघ अध्यक्ष, जानें कौन हैं माटिल्डा लौरेंबाम


नई दिल्ली: दिल्ली के मिरांडा हाउस में छात्र संघ चुनाव हो चुके हैं. इस बार मिरांडा हाउस का माहौल बहुत अलग है, क्योंकि यहां पर पहली बार नॉर्थ ईस्ट इंडिया की किसी स्टूडेंट ने अध्यक्ष का पद हासिल किया है. नॉर्थ ईस्ट की एक ऐसी लड़की इस बार यहां पर अध्यक्ष के पद पर चुनी गई है, जिसने 2 साल पहले मिरांडा हाउस यानी दिल्ली आकर ही हिंदी सीखी थी. 2 साल में ही उसने अपनी हिंदी को अच्छा करके स्टूडेंट के बीच इतना ज्यादा पापुलैरिटी हासिल कर ली की, तीसरे साल में पूरे मिरांडा हाउस की लड़कियों ने मिलकर 1400 वोटों से उसे अपने कॉलेज का अध्यक्ष चुन लिया.

यह कहानी है 19 साल की माटिल्डा लौरेंबाम की. माटिल्डा लौरेंबाम ने छात्र संघ चुनाव में लोकल स्टूडेंट्स को करीब 300 वोटो से मात दे दी. लोकल 18 से खास बातचीत में माटिल्डा लौरेंबाम ने बताया कि वह मणिपुर की रहने वाली हैं. 2 साल पहले ही दिल्ली आई थी और मिरांडा हाउस से बीएससी ऑनर्स इन फिजिक्स कर रही है. यह उनका फाइनल ईयर है. आइये जानते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा.

दिल्ली भेजने से पहले डर रहे थे मां-बाप

माटिल्डा लौरेंबाम ने बताया कि वह मणिपुर की रहने वाली हैं. जब 2 साल पहले वह दिल्ली के मिरांडा हाउस में पढ़ने के लिए आ रही थी, उस समय उनके मां-बाप काफी डरे हुए थे. मां-बाप दोनों ही मणिपुर में शिक्षक हैं. उन्होंने बताया कि जब वह दिल्ली आईं, तब भी मां बाप उनसे बार-बार कॉल करके सलामती पूछते थे. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपने मां-बाप को बताया कि मिरांडा हाउस के छात्र संघ चुनाव में सभी स्टूडेंट्स से मिलकर उन्हें अध्यक्ष चुन लिया है तो उनके मां-बाप काफी खुश हुए.

उन्होंने यही कहा कि जो लड़की मणिपुर में अकेले घर से बाहर भी नहीं निकलती थी, उसने दिल्ली जाकर कॉलेज की राजनीति में लोगों से इतना प्यार पाया कि वह अध्यक्ष बन गई. उन्होंने बताया कि पहले तो मां-बाप को यकीन ही नहीं हुआ था, लेकिन जब उन्होंने वीडियो कॉल करके दिखाया तब उनके मां-बाप को यकीन हुआ. माटिल्डा लौरेंबाम ने यह भी पता है कि अध्यक्ष पद के लिए दो लोग खड़े थे. टोटल 1700 वोट डाले गए थे, जिसमें की 1400 वोट उन्हें मिले हैं.

घोषणा पत्र के आधार पर मिली जीत

माटिल्डा लौरेंबाम ने बताया कि उन्होंने अपने घोषणा पत्र में स्टूडेंट को रिसर्च पर बढ़ावा देने की बात कही थी. यही बात सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स को पसंद आई. माटिल्डा लौरेंबाम ने यह भी बताया कि उनकी दिलचस्पी भी रिसर्च के क्षेत्र में ही है, इसलिए जब वह रिसर्च के मामले को लेकर के स्टूडेंट्स के बीच में गईं तो स्टूडेंट उनसे काफी सहमत हुए थे. इसके अलावा उन्होंने बताया कि कैंपेन के दौरान उन्होंने सारे स्टूडेंट से बात की थी. पूरे मिरांडा हाउस की एक-एक लड़की से बात करने पर उन्हें पता चला था कि ज्यादातर लड़कियां मिरांडा हाउस में जो ड्रिंकिंग वॉटर है, उससे संतुष्ट नहीं है.

उसकी क्वालिटी अच्छी नहीं है, इसीलिए अपने घोषणा पत्र में उन्होंने ड्रिंकिंग वॉटर पर काम करने और साफ पानी उपलब्ध कराने का भी वादा किया था. यह भी स्टूडेंट्स को काफी पसंद आया. इसके अलावा उन्होंने बताया कि पूरे मिरांडा हाउस में लिफ्ट की सुविधा नहीं है, इसे भी बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा. इन सभी वादों से सहमत होकर ही स्टूडेंट ने उनको चुना है.

कैंपेन के दौरान भाषा में हुई दिक्कत

माटिल्डा लौरेंबाम ने बताया कि जब वह कैंपेन कर रही थी, तो उन्हें थोड़ी सी दिक्कत भाषा को लेकर की हुई थी. क्योंकि उन्हें हिंदी आती नहीं थी. 2 साल पहले जब वह दिल्ली आई थी, तब उन्होंने यहीं पर हिंदी सीखना शुरू किया था. कॉलेज में जितनी भी एक्टिविटी होती थी, उन सब में वह काफी एक्टिव थी. 2 साल पहले से ही उन्होंने अध्यक्ष बनने का सपना देखा था. इसीलिए हर एक स्टूडेंट के पास जाकर बात करना और उनसे दोस्ती करना और उनकी दिक्कतों को सुनना उनकी आदत बन गया था. फिलहाल उनकी यही आदत ने स्टूडेंट्स के बीच में उन्हें काफी पापुलैरिटी दिला दी थी, जिस वजह से मिरांडा हाउस के अध्यक्ष के पद तक पहुंचना उनके लिए आसान हो गया था.



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