बिहार एमएलसी चुनाव: नीरज बनाम अनंत और अपनों की जंग में फंसी जेडीयू, कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तो ये है!

बिहार एमएलसी चुनाव: नीरज बनाम अनंत और अपनों की जंग में फंसी जेडीयू, कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट तो ये है!


बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर सत्ता पक्ष ने भी अपना चुनावी ब्लूप्रिंट साफ कर दिया है. इसी क्रम में उप मुख्यमंत्री और बिहार जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने कहा है कि NDA आपसी सहमति से चुनाव लड़ेगा और आठों सीटों पर जीत हासिल करेगा. हालांकि, इसी ‘मिशन-8’ के बीच JDU की पटना सीट ने पार्टी के भीतर की पुरानी कहानी फिर सामने ला दी है. नीरज कुमार और अनंत सिंह की अदावत अब सिर्फ पुरानी नाराजगी नहीं, बल्कि विधान परिषद चुनाव के साथ जुड़ा खुला राजनीतिक टकराव बन गई है.

आठ सीट, एक सहमति और एक बड़ा सवाल

दरअसल, विजय चौधरी ने साफ कहा कि एनडीए चुनाव में आपसी सहमति से उतरेगा. उम्मीदवारों के नाम पर अभी घोषणा नहीं हुई है, लेकिन समय रहते नाम सामने आ जाएंगे.
यानी गठबंधन के स्तर पर तस्वीर एकजुट दिखाई जा रही है. लेकिन इसी तस्वीर का दूसरा हिस्सा जेडीयू के भीतर दिखाई दे रहा है. पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार और अनंत सिंह की सार्वजनिक बयानबाजी ने पार्टी नेतृत्व के सामने अलग चुनौती खड़ी कर दी है.

नीरज-अनंत की कहानी सिर्फ चुनाव की नहीं

बता दें कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक टकराव नया नहीं है. इसकी बड़ी कड़ी 2015 का मोकामा विधानसभा चुनाव था. उस समय जेडीयू ने नीरज कुमार को मैदान में उतारा था, जबकि अनंत सिंह निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत गए थे. इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी बनी रही. 2019 के AK-47 मामले को लेकर भी अनंत सिंह ने नीरज कुमार पर गंभीर आरोप लगाए, जिन्हें नीरज ने खारिज किया.

अदावत की असली कहानी क्या है?

अनंत सिंह की जेडीयू में दोबारा एंट्री के बाद से ही नीरज कुमार ने मोर्चा खोल रखा था. नीरज ने कई बार अनंत सिंह के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और बाहुबली छवि पर सवाल उठाए. कहा कि पार्टी को ऐसे लोगों से बचना चाहिए. वहीं, अनंत सिंह भी कहां चुप रहने वाले थे, उन्होंने सीधे नीरज कुमार को ललकार दिया. बोले कि दम है तो मोकामा आकर चुनाव लड़ लें, पता चल जाएगा. अनंत ने यहां तक कह दिया कि नीरज कुमार सिर्फ टीवी पर बोलते हैं, जमीन पर कुछ नहीं है. हालांकि, इन बयानबाजियों के बाद गंगा में बहुत पानी बह चुका है, लेकिन एक बार फिर अब वही पुरानी राजनीतिक रंजिश एमएलसी चुनाव के बहाने फिर सुर्खियों में है.

पार्टी के भीतर सुलह की कोशिश, फिर बयानबाजी

दिलचस्प यह है कि विवाद को खत्म करने की कोशिश भी हुई. जेडीयू पर दोनों नेताओं के बीच बैठक की खबर सामने आई थी और सुलह के संकेत भी दिए गए थे. लेकिन इसके बाद भी सार्वजनिक बयानबाजी पूरी तरह थमी नहीं. अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ खुला रुख अपनाया है, जबकि नीरज कुमार ने भी पलटवार किया है. हालांकि, इसी कड़ी में विजय चौधरी का यह बयान कि- ‘समय रहते सब ठीक हो जाएगा’, चर्चा में है.

असली ट्विस्ट उम्मीदवार के नाम में

अभी जेडीयू ने उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. इसलिए पटना स्नातक सीट पर तस्वीर का एक बड़ा हिस्सा बाकी है. नीरज कुमार मौजूदा एमएलसी हैं और उनका नाम संभावित दावेदार के तौर पर चर्चा में है, वहीं दूसरी तरफ अनंत सिंह का रुख सार्वजनिक है.
ऐसे में अब सिर्फ यह सवाल नहीं है कि एनडीए आठों सीट पर किसे उतारेगा. सवाल यह भी है कि अगर पटना से नीरज कुमार का नाम सामने आता है तो JDU के भीतर अनंत सिंह को साथ लाने का फॉर्मूला क्या होगा?

MLC चुनाव में क्यों अहम है यह लड़ाई

बहरहाल, एक तरफ विजय चौधरी का ‘आठों सीट जीतेंगे’ वाला भरोसा है, दूसरी तरफ उसी गठबंधन के प्रमुख घटक जदयू में पटना सीट को लेकर खुली खींचतान. उम्मीदवारों की घोषणा के साथ अब यही तय होगा कि ‘समय रहते सब ठीक’ वाली बात सिर्फ राजनीतिक भरोसा है या उसके पीछे कोई ठोस सियासी फॉर्मूला भी तैयार है. सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी इस मामले पर नजर रखे हुए हैं और दोनों नेताओं को समझाने की कोशिश हो रही है. अब देखना दिलचस्प होगा कि कि समय रहते अपनों की यह जंग थमती है या एमएलसी चुनाव में और भड़कती है.



Source link