Sagar News: बुंदेलखंड के सागर जिले में स्थित 1700 साल पुराने ऐतिहासिक स्थल एरण की किस्मत बदलने वाली है. केंद्र सरकार ने इसे देश के 15 VVIP पुरातात्विक स्थलों की सूची में शामिल किया है. इस हेरिटेज साइट के विकास के लिए केंद्र सरकार ने विशेष बजट की व्यवस्था की है.
विकास कार्य पूरे होने के बाद एरण खजुराहो और सांची की तरह विश्व स्तर पर चमक उठेगा. सरकार ने अगले 3 साल में यहां देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है. पर्यटकों के रहने, खाने, घूमने और इस प्राचीन विरासत को समझने के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
₹1,171 करोड़ का मेगा मास्टर प्लान
केंद्र सरकार प्राचीन धरोहरों को संवारने के लिए ‘DESH’ (डेवलपमेंट ऑफ एक्सकैवेशन साइट्स एंड हेरिटेज कॉम्प्लेक्स) योजना चला रही है. इस योजना के तहत देश भर के 15 सबसे महत्वपूर्ण प्राचीन स्थलों को चुना गया है. इसमें सागर जिला मुख्यालय से करीब 75 किलोमीटर दूर स्थित एरण भी शामिल है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने इन 15 साइटों का कायाकल्प करने के लिए ₹1,171 करोड़ का मेगा मास्टर प्लान तैयार किया है.
डिजिटल स्क्रीन पर दिखेगा गुप्तकाल का वैभव
इस विशाल बजट की मदद से एरण को एक ‘लिविंग कल्चरल स्पेस’ (जीवंत सांस्कृतिक केंद्र) के रूप में ढाला जाएगा. यहां आने वाले पर्यटक ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और 3D प्रोजेक्शन जैसी हाई-टेक तकनीकों का अनुभव कर सकेंगे. डिजिटल स्क्रीन के माध्यम से गुप्तकाल की भव्यता और राजा समुद्रगुप्त के गौरवशाली इतिहास को पर्यटकों के सामने जीवंत रूप में पेश किया जाएगा.
प्राचीन प्रतिमाओं और अभिलेखों का नया कलेवर
DESH योजना के अंतर्गत एरण में स्थित प्राचीन वराह मूर्ति, विष्णु प्रतिमा और गुप्तकालीन अभिलेखों को नए कलेवर में प्रदर्शित किया जाएगा. एएसआई यहां पर्यटकों के लिए एक विशेष ‘क्यूरेटेड वॉक-वे’ बनाएगा. इससे पर्यटक एरण के ऐतिहासिक अवशेषों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए करीब से निहार सकेंगे.
ऑन-साइट हाई-टेक म्यूजियम और व्याख्यान केंद्र
साइट पर ही एक अत्याधुनिक ऑन-साइट हाई-टेक म्यूजियम और व्याख्यान केंद्र स्थापित किया जाएगा. इस संग्रहालय में एरण की खुदाई के दौरान मिले प्राचीन सिक्के, मृदभांड और दुर्लभ मूर्तियों को सुरक्षित ढंग से सहेजा जाएगा.
इतिहास का समृद्ध खजाना और उत्खनन के प्रमाण
अमरकंटक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और एरण विषय पर पीएचडी करने वाले डॉ. मोहनलाल चढ़ार ने बताया कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बेहद समृद्ध है. यहां हड़प्पाकालीन संस्कृति के समकालीन पाषाणकालीन अवशेष मिलते हैं. एरण में गुप्तकाल के वैभव के साथ-साथ वर्तमान समय तक का एक क्रमबद्ध इतिहास देखने को मिलता है. पूर्व में डॉ. हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्राचीन संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा यहां उत्खनन कराया गया था, जिसमें ये सभी ऐतिहासिक साक्ष्य सामने आए थे.
रोजगार के नए अवसर और आर्थिक तरक्की
एरण के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने से इस क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक उन्नति होगी. पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे. युवा यहां गाइड के रूप में काम कर सकते हैं. इसके अलावा सांस्कृतिक गतिविधियों, खान-पान केंद्र, रिसॉर्ट और होमस्टे जैसी सेवाएं भी शुरू कर सकते हैं. बुंदेलखंड के लिए केंद्र सरकार की यह पहल एक बड़ा अवसर साबित होगी.