डेबिट-क्रेडिट कार्ड बनाम UPI: फीस लगने के बाद भी सस्‍ता है यूपीआई, विश्‍वास नहीं तो खुद देख लें पूरा हिसाब

डेबिट-क्रेडिट कार्ड बनाम UPI: फीस लगने के बाद भी सस्‍ता है यूपीआई, विश्‍वास नहीं तो खुद देख लें पूरा हिसाब


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फीस लगने के बाद भी सस्‍ता है यूपीआई, विश्‍वास नहीं तो खुद देख लें पूरा हिसाब

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UPI vs Debit Credit Cards : यूपीआई से 2000 रुपये से ज्‍यादा पेमेंट करने पर अब दुकानदारों पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया गया है. आम आदमी के लिए यह अब भी पूरी तरह फ्री है. ₹2,000 से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मामूली फीस लगने के बाद भी क्रेडिट कार्ड और डेबिड कार्ड की तुलना में UPI दुकानदारों के लिए कई गुना सस्ता और फायदेमंद है.

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI ने देश के खुदरा बाजार की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी है. आज गली-मोहल्ले की छोटी दुकानों से लेकर बड़े रिटेल स्टोर्स तक हर जगह UPI क्यूआर कोड की मौजूदगी इसलिए नहीं है कि यह सिर्फ आसान है, बल्कि यह दुकानदारों की जेब पर सबसे कम बोझ डालता है. कार्ड सिस्टम में स्वाइप मशीन (POS) का मासिक किराया, मेंटेनेंस चार्ज और भारी ट्रांजैक्शन फीस चुकानी पड़ती है, वहीं UPI बिना किसी तामझाम के काम करता है.

किसी भी पेमेंट को स्वीकार करने की असली लागत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR तय करता है. जब कोई ग्राहक कार्ड से भुगतान करता है, तो बैंक और पेमेंट नेटवर्क उस लेनदेन को प्रोसेस करने के बदले दुकानदार से तय प्रतिशत फीस काटते हैं. क्रेडिट कार्ड के मामलों में तो यह कटौती 1.5% से लेकर 2.5% तक पहुंच जाती है. इसके मुकाबले UPI पर लगने वाला MDR न केवल बेहद कम है, बल्कि छोटे भुगतानों पर यह पूरी तरह शून्य है.

यदि आंकड़ों की सीधी तुलना करें, तो यह अंतर और भी चौंकाने वाला नजर आता है. ₹2,000 से अधिक के बड़े मूल्य वाले UPI ट्रांजैक्शन पर जहां MDR अधिकतम 0.4% (अधिकतम ₹300 तक सीमित) तय किया गया है, वहीं सामान्य डेबिट कार्ड पर यह चार्ज करीब 0.90% तक चला जाता है. इसके विपरीत, क्रेडिट कार्ड से पेमेंट लेने पर दुकानदार को प्रति ट्रांजैक्शन 1.5% से 2.5% तक की भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ती है. इस तरह ₹10,000 के बिल पर क्रेडिट कार्ड स्वाइप करने से जहां ₹150 से ₹250 तक की चपत लग सकती है, वहीं UPI में यह लागत नाममात्र की रह जाती है.

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बड़े मॉल या ई-कॉमर्स कंपनियों की तुलना में स्थानीय दुकानदारों के पास मार्जिन बहुत कम होता है, ऐसे में पेमेंट गेटवे की ऊंची फीस उनकी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता घटा देती है. UPI ने इस खाई को पाटते हुए छोटे खुदरा व्यापारियों को भी बिना किसी महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर के डिजिटल भुगतान लेने का एकसमान प्लेटफॉर्म दिया है.

UPI ने डिजिटल भुगतान को तेज, सुरक्षित और सबसे किफायती बनाकर भारतीय कारोबार जगत का भरोसा जीता है. कार्ड स्वाइप मशीनों के मासिक रेंट और छिपे हुए शुल्कों के मकड़जाल से दूर, एक साधारण प्रिंटेड क्यूआर कोड या साउंडबॉक्स से चलने वाला UPI आज व्यापारियों का सबसे बड़ा वित्तीय सुरक्षा कवच बन चुका है. यही कारण है कि बड़े भुगतानों पर मामूली कैपिंग शुल्क लागू होने के बावजूद, डेबिट और क्रेडिट कार्ड कभी भी किफायती होने के मामले में UPI का मुकाबला नहीं कर सकते.

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने साफ किया कि एमडीआर सिर्फ 2,000 रुपये से ऊपर के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) ट्रांजैक्शन पर लगेगा. 2,000 रुपये तक के सभी यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे. इन पर न एमडीआर लगेगा, न जीएसटी. इसल‍िए गांव के छोटे छोटे दुकानदारों को क‍िसी भी तरह घबराने की जरूरत नहीं है. उन्‍हें इससे कोई नुकसान नहीं होने वाला.

2,000 रुपये तक के ट्रांजैक्शन यूपीआई मर्चेंट वॉल्यूम का 96 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा हैं. यानी ज्यादातर भुगतान एमडीआर और जीएसटी दोनों से पूरी तरह मुक्त रहेंगे. इसके अलावा जिन व्यापारियों की मासिक यूपीआई प्राप्तियां 1 लाख रुपये तक हैं, उन्हें भी एमडीआर नहीं देना होगा.

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