क्या जाएगी कांग्रेस दतिया विधायक की सदस्यता! घनश्याम सिंह को लेकर एक नया विवाद, भाजपा नेता पहुंचे हाईकोर्ट

क्या जाएगी कांग्रेस दतिया विधायक की सदस्यता! घनश्याम सिंह को लेकर एक नया विवाद, भाजपा नेता पहुंचे हाईकोर्ट


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दतिया उपचुनाव में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने 6 हजार 16 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर विधानसभा में वापसी की. लेकिन चुनाव परिणाम के कुछ ही समय बाद उनके निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने से दतिया की सियासत गरमा गई है. आरोप है कि नामांकन के दौरान दाखिल किए गए हलफनामे में कई जानकारी का उल्लेख नहीं किया गया है.

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कांग्रेस विघायक घनश्याम सिंह के खिलाफ याचिका

दतिया. दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली जीत का जश्न अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि नवनिर्वाचित विधायक घनश्याम सिंह को लेकर एक नया विवाद सामने आ गया है. उनके चुनावी हलफनामे को लेकर अब जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. आरोप है कि नामांकन के दौरान दाखिल किए गए हलफनामे में साल 1991 के एक आपराधिक प्रकरण की जानकारी का उल्लेख नहीं किया गया.

याचिका भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री की ओर से अधिवक्ता शिवम गौतम के माध्यम से 17 सितंबर को दाखिल किए जाने की बात सामने आई है. हालांकि, आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा.

विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम का जिक्र
याचिका में दावा किया गया है कि साल 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम के दौरान दर्ज एक मामले में घनश्याम सिंह का नाम शामिल था. आरोप है कि हालिया उपचुनाव के दौरान दाखिल चुनावी शपथपत्र में इस प्रकरण का उल्लेख नहीं किया गया. याचिकाकर्ता ने इसी कथित जानकारी को छिपाए जाने को आधार बनाते हुए विधायक के निर्वाचन पर सवाल उठाए हैं. हालांकि, यह आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन है और अदालत के अंतिम निर्णय से ही इसकी कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी.

मामला सामने आने के बाद दतिया की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. विपक्ष इसे चुनावी पारदर्शिता से जोड़ रहा है, जबकि विधायक घनश्याम सिंह इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं. विधायक का कहना है कि जिस 1991 के मामले का हवाला दिया जा रहा है, उसकी जानकारी उनके संज्ञान में नहीं थी. उनका तर्क है कि चुनावी हलफनामे में उन्हीं मामलों की जानकारी दी जानी होती है, जो संबंधित कानूनी प्रक्रिया के दायरे में आते हैं.

घनश्याम सिंह ने दी सफाई
घनश्याम सिंह ने यह भी कहा है कि उन्होंने चुनाव आयोग को दी गई जानकारी में किसी तरह की हेराफेरी नहीं की. उनका आरोप है कि इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश के तौर पर खड़ा किया जा रहा है. उन्होंने दतिया के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती के मामले से अपनी तुलना को भी गलत बताया और कहा कि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं.

फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है. एक तरफ याचिकाकर्ता ने 1991 के कथित प्रकरण का उल्लेख नहीं किए जाने को आधार बनाकर विधायक के निर्वाचन को चुनौती दी है, तो दूसरी तरफ विधायक आरोपों को खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बता रहे हैं. सबसे अहम बात यह है कि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल होने मात्र से विधायक की सदस्यता समाप्त नहीं हुई है. अब इस मामले में अदालत की सुनवाई और सामने आने वाले दस्तावेज तय करेंगे कि 1991 के मामले की वास्तविक कानूनी स्थिति क्या थी और चुनावी हलफनामे में उसका उल्लेख करना अनिवार्य था या नहीं. यानी फिलहाल सवाल कई हैं और जवाब अदालत की प्रक्रिया से सामने आने बाकी हैं.



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