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मुरादाबाद जिला कारागार की डिप्टी जेलर कृष्णा कुमारी ने बताया कि इस समय हमारे यहां 20-22 महिलाएं हैं. जो बैग बनाकर सिलाई का काम करती हैं.इन बैग्स को बाहर बेचने के लिए भी भेजा जाता है. पिछले दो-तीन महीनों से मैं देख रही हूँ कि महिलाएं बैग सिलने के साथ-साथ दीपक आदि बनाना भी सीख रही हैं. उनका कहना है जेल अधीक्षक साहब के आने के बाद NGO के माध्यम से संपर्क करके उन्हें यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके अलावा होम डेकोरेशन से जुड़े सामान बनाना भी महिलाओं को सिखाया जा रहा है.
मुरादाबादः जिला कारागार मुरादाबाद में सजा काट रही महिलाएं अब केवल सजा ही नहीं काट रही है. बल्कि आत्मनिर्भर भी बन रही हैं. वह अलग-अलग वैरायटी और अलग-अलग डिजाइन के बैग तैयार कर रही हैं. यह सभी बैक वह महिलाओं के तैयार कर रही है. जिसमें अलग-अलग डिजाइन शामिल है. जिन बैग को तैयार कर वह जेल प्रशासन की मदद से बाहर सेल करने का काम कर रही हैं. जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है और सभी महिलाएं इस काम को करके 10 से 12000 रुपए के बीच में महीने का मुनाफा कमा रहे हैं.
20 से 22 महिलाएं है जुड़ी
मुरादाबाद जिला कारागार की डिप्टी जेलर कृष्णा कुमारी ने बताया कि इस समय हमारे यहां 20-22 महिलाएं हैं. जो बैग बनाकर सिलाई का काम करती हैं.इन बैग्स को बाहर बेचने के लिए भी भेजा जाता है. पिछले दो-तीन महीनों से मैं देख रही हूँ कि महिलाएं बैग सिलने के साथ-साथ दीपक आदि बनाना भी सीख रही हैं. उनका कहना है जेल अधीक्षक साहब के आने के बाद NGO के माध्यम से संपर्क करके उन्हें यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके अलावा होम डेकोरेशन से जुड़े सामान बनाना भी महिलाओं को सिखाया जा रहा है. ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद वे आत्मनिर्भर बन सकें. इससे महिलाओं में आत्मविश्वास आता है. वे अपने परिवार की सहायता कर पा रही हैं और चार पैसे कमा रही हैं.
10 हजार से 12 हजार तक कमा रहीं है
आराम से 10000 से 12000 रुपये तक कमा लेती हैं. बाहर से NGO की मैडम आती हैं जो सिलाई सिखाती हैं और उन्हीं के द्वारा इन उत्पादों की बिक्री करवाई जाती है यहाँ 20-22 महिलाएं यह हुनर सीख रही हैं. कई महिलाएं यहाँ से सीख कर जा चुकी हैं और बाहर भी उन्होंने अपना यह काम जारी रखा हुआ है.उन्होंने बताया कि वर्तमान में 20-22 महिला बंदी बैग सिलाई और दीपक व होम डेकोरेशन का सामान बनाना सीख रही हैं. NGO के सहयोग से दिया जा रहा यह प्रशिक्षण उन्हें आत्मनिर्भर बना रहा है जिससे वे प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये तक कमा रही हैं और उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है.