Telangana Tourism: आज शांत दिखता है नेलाकोंडापल्ली, कभी गूंजता था बौद्ध भिक्षुओं की गतिविधियों से, जानें इतिहास

Telangana Tourism: आज शांत दिखता है नेलाकोंडापल्ली, कभी गूंजता था बौद्ध भिक्षुओं की गतिविधियों से, जानें इतिहास


होमताजा खबरदेश

तेलंगाना का नेलाकोंडापल्ली: कभी था बौद्ध भिक्षुओं का बड़ा केंद्र, जानें इतिहास

Last Updated:

Hyderabad News: तेलंगाना का नेलाकोंडापल्ली कभी बौद्ध भिक्षुओं का एक बड़ा केंद्र था. खम्मम जिले में स्थित यह स्थल प्राचीन काल में दक्षिण भारत के प्रमुख बौद्ध केंद्रों में गिना जाता था, जहाँ एक विशाल बौद्ध महास्तूप मौजूद है.

ख़बरें फटाफट

हैदराबाद: तेलंगाना की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत सिर्फ किलों और मंदिरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके गर्भ में बौद्ध काल के भी कई अनमोल पन्ने दबे हुए हैं. राज्य के खम्मम जिले में स्थित नेलाकोंडापल्ली एक ऐसा ही ऐतिहासिक स्थल है जो प्राचीन काल में दक्षिण भारत के सबसे प्रमुख बौद्ध केंद्रों में गिना जाता था. यहाँ मौजूद विशाल बौद्ध महास्तूप आज भी उस दौर की समृद्ध धार्मिक और वास्तुकला परंपरा की गवाही देता है.

इतिहास के जानकार पी. नागेश्वर बताते है कि ऐतिहासिक काल यानी लगभग तीसरी से चौथी शताब्दी ईस्वी का माना जाता है. जब दक्कन में सातवाहन और इक्ष्वाकु वंश का प्रभाव था. 1970 और 1980 के दशक में पुरातत्व विभाग द्वारा की गई खुदाइयों में यहाँ ईंटों से निर्मित एक विशाल महास्तूप सामने आया था. यह स्तूप आकार में इतना बड़ा है कि इसे दक्षिण भारत के सबसे बड़े ईंट-निर्मित स्तूपों में गिना जाता है.

आंध्र और दक्कन बौद्ध वास्तुकला की खास पहचान
इस स्तूप की बनावट बेहद अनूठी और दर्शनीय है. इसका निर्माण गोलाकार पहिए की तरह रिंग और स्पोक यानी तीली और पहिया शैली में किया गया है, जो बौद्ध धर्म के धर्मचक्र का प्रतीक माना जाता है. स्तूप के चारों ओर चार प्रमुख दिशाओं में आयक चबूतरे बने हुए हैं, जो उस दौर के आंध्र और दक्कन बौद्ध वास्तुकला की खास पहचान रहे हैं. उत्खनन के दौरान इस परिसर से न केवल महास्तूप बल्कि बौद्ध भिक्षुओं के रहने के लिए बने मठों की नींव, पानी के प्राचीन कुएँ, मिट्टी के बर्तन, सातवाहन काल के सिक्के और भगवान बुद्ध की दुर्लभ मूर्तियां भी बरामद हुई थीं. इन खोजों से साफ होता है कि यह स्थल केवल पूजा-अर्चना की जगह नहीं, बल्कि बौद्ध दर्शन और शिक्षा का एक सक्रिय केंद्र रहा होगा.

पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर
शोधकर्ताओं के मुताबिक नेलाकोंडापल्ली प्राचीन दक्कन के प्रमुख व्यापारिक मार्गों पर स्थित था. यह क्षेत्र तटीय आंध्र और आंतरिक दक्कन के बीच संपर्क सूत्र का काम करता था जिससे यहाँ विचारों, धर्म और व्यापार का संगम हुआ. आज नेलाकोंडापल्ली का यह महास्तूप इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर है जो तेलंगाना के समृद्ध बौद्ध अतीत को बखूबी दर्शाता है.



Source link