Government Scheme : बज्र देहात वालों के लिए धांसू स्कीम, फ्री में मिलेगा कच्चा माल और सरकार खरीदेगी सारे प्रोडक्ट

Government Scheme : बज्र देहात वालों के लिए धांसू स्कीम, फ्री में मिलेगा कच्चा माल और सरकार खरीदेगी सारे प्रोडक्ट


Last Updated:

New Government Scheme : सरकार ने ऊर्जा सेक्टर में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए गोबरधन स्कीम को लॉन्च कर दिया है. योजना के तहत सरकार ने 27,731 करोड़ रुपये का फंड बनाया है. इसमें 10 साल तक तैयार प्रोडक्ट को सरकार खुद खरीद लेगी. योजना का मकसद देश में गैस की जरूरतों को पूरा करना है.

Zoom

सरकार ने ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए गोबरधन स्कीम शुरू की है.

नई दिल्ली. मोदी सरकार ने गांव-देहात में रहने वालों के लिए 23,731 करोड़ रुपये की धांसू स्कीम शुरू की है. इस योजना की सबसे खास बात ये है कि इसमें प्रोडक्ट बनाने के लिए कच्चा माल लगभग मुफ्त मिलेगा और जब आपका प्रोडक्ट तैयार हो जाएगा तो सारा माल सरकार खरीद लेगी. इसका मतलब है कि आपको अपने तैयार माल के बेचने की टेंशन ही नहीं लेनी है, क्योंकि सरकार पहले से ही तैयार प्रोडक्ट खरीदने का इंतजाम करके बैठी है.

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अपने नोटिफिकेशन में बताया है कि सरकार ने 23,731 करोड़ रुपये की ‘गोबरधन’ योजना को लागू कर दिया गया है. इस योजना के तहत सरकार कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादकों को उनकी बिक्री योग्य गैस की 100 फीसदी तक सुनिश्चित खरीद की जाएगी. इसके अलावा प्रोजेक्ट लगाने वालों को कम से कम 10 साल के लिए प्रशासित मूल्य और पूंजीगत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

10 साल तक चलेगी योजना 
नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह योजना वित् वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू रहेगी. इसका उद्देश्य देश में सीबीजी उत्पादन को बढ़ाना, परियोजनाओं के लिए अधिक अनुकूल बाजार तैयार करना और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है. गोबरधन यानी ‘गैल्वानाइजिंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज धन’ सरकार का ऐसा कार्यक्रम है, जिसके तहत पशुओं के गोबर, कृषि अवशेष, खाद्य अपशिष्ट और अन्य जैविक कचरे से बायोगैस, सीबीजी और जैविक खाद तैयार की जाती है. योजना के तहत बनने वाले उत्पाद सीबीजी को प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी.

योजना में 6 चीजों पर खास जोर
मंत्रालय के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि योजना के तहत 6 मुख्य चीजें सुनिश्चित की जाएंगी. इनमें सीबीजी की सुनिश्चित खरीद, मूल्य निर्धारण व्यवस्था, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन ढांचा, कर्ज गारंटी सहायता और सीबीजी पारिस्थतिकी चैलेंज फंड शामिल हैं. नई व्यवस्था के तहत पात्र सीबीजी उत्पादक बिक्री के लिए उपलब्ध अपनी गैस की 100 फीसदी तक सुनिश्चित खरीद का विकल्प चुन सकते हैं.

कंपनियां खरीदेंगी तैयार प्रोडक्ट
योजना के तहत गैस की सप्लाई को शहरी गैस वितरण (सीजीडी) कंपनियों और संबंधित भौगोलिक क्षेत्रों से जोड़ा जाएगा. इसके अलावा सीबीजी क्लस्टर के जरिये गैस का कलेक्शन कर उसे मुख्य पाइपलाइन में डालने की व्यवस्था भी की जाएगी. सीजीडी कंपनियों को अपने सीएनजी परिवहन और घरेलू पीएनजी खंड की कुल गैस आपूर्ति में निर्धारित अनुपात में सीबीजी की खरीद और बिक्री करनी होगी. यह दायित्व वित्तवर्ष 2026-27 में 3 फीसदी, 2027-28 में 4 फीसदी और 2028-29 से 5 फीसदी होगा.

एक यूनिट गैस की कितनी कीमत
सरकार ने सीबीजी के लिए 2,110 रुपये प्रति यूनिट (एमएमबीटीयू) का मूल्य तय किया है. इसमें 95 फीसदी मीथेन सामग्री के आधार पर यह करीब 98 रुपये प्रति किलोग्राम के बराबर है. इसमें टैक्स और कंप्रेशन शुल्क शामिल नहीं हैं. यह मूल्य कम से कम 31 मार्च 2036 तक लागू रहेगा. हालांकि, सीबीजी उत्पादन की लागत, महंगाई और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए इसमें भविष्य में बदलाव किया जा सकता है.



Source link