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Moss Rose Plant: गोंडा के घरों के आंगन और बगीचों में लाल, गुलाबी और कई दूसरे रंगों के फूलों से सजा एक खूबसूरत पौधा इन दिनों लोगों का ध्यान खींचता है. पोर्टुलाका ग्रैंडिफ्लोरा यानी मॉस रोज देखने में बेहद आकर्षक होने के साथ सजावटी पौधे के रूप में भी काफी लोकप्रिय है. खास बात यह है कि इस पौधे में मौजूद प्राकृतिक यौगिकों के संभावित औषधीय गुणों को लेकर वैज्ञानिक शोध भी किए गए हैं. हालांकि इसके औषधीय इस्तेमाल को लेकर कई सावधानियां जरूरी हैं और इसे किसी बीमारी का प्रमाणित इलाज नहीं माना जा सकता.
गोंडा के घरों के आंगन और बगीचों में लाल, गुलाबी और दूसरे रंगों के फूलों वाला एक खूबसूरत पौधा अक्सर देखने को मिलता है. इसे पोर्टुलाका ग्रैंडिफ्लोरा यानी मॉस रोज के नाम से जाना जाता है. यह मुख्य रूप से सजावटी पौधा है, लेकिन इसके औषधीय गुणों को लेकर भी वैज्ञानिक शोध हुए है.
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति बताते है कि इस पौधे में मौजूद प्राकृतिक तत्वों को लेकर सूजन कम करने वाले संभावित गुणों पर भी शोध हुआ है. वैज्ञानिक अध्ययनों में इसके अर्क के एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभावों की जांच की गई है. इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर में सूजन या किसी बीमारी होने पर पौधे का सेवन करके इलाज किया जा सकता है. इसके लिए चिकित्सकीय सलाह जरूरी है.
पोर्टुलाका ग्रैंडिफ्लोरा में पाए जाने वाले कुछ यौगिकों के एंटीऑक्सीडेंट गुणों का भी अध्ययन किया गया है. एंटीऑक्सीडेंट शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव से जुड़े प्रभावों पर काम करने वाले यौगिक होते है.
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पारंपरिक रूप से पोर्टुलाका की पत्तियों का इस्तेमाल त्वचा से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियों में किए जाने का उल्लेख मिलता है. पत्तियों को पीसकर लेप बनाने और त्वचा पर लगाने की बात कही जाती है. छोटे कट, खरोंच या मामूली चोट में इसे लगाने की पारंपरिक जानकारी मिलती है. इसके अलावा त्वचा पर होने वाली खुजली, लालिमा और जलन में भी इसके लेप का इस्तेमाल कुछ जगहों पर किया जाता है. हालांकि खुले घाव, गंभीर चोट या संक्रमण वाली जगह पर किसी पौधे का लेप लगाने से पहले डॉक्टर की सलाह
पारंपरिक उपचार में कुछ लोग कीड़े के काटने के बाद पौधे की पत्तियों का रस या लेप लगाने का इस्तेमाल करते हैं. इससे स्थानीय स्तर पर होने वाली जलन और सूजन में राहत मिलने की बात कही जाती है. लेकिन अगर मधुमक्खी या किसी अन्य कीड़े के काटने के बाद सांस लेने में परेशानी, चेहरे पर सूजन या पूरे शरीर में एलर्जी जैसी समस्या हो तो यह आपात स्थिति हो सकती है. ऐसे समय घरेलू उपचार के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए.
कुछ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में पोर्टुलाका की पत्तियों या अर्क का इस्तेमाल गले की खराश और सूजन जैसी समस्याओं के लिए किए जाने का उल्लेख मिलता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्वों के कारण सूजन कम करने वाले संभावित गुणों पर शोध भी हुआ है. हालांकि गले के संक्रमण, टॉन्सिल या तेज बुखार की स्थिति में केवल पौधे पर निर्भर रहना उचित नहीं है.
पारंपरिक चिकित्सा में इस तरह के पौधों का इस्तेमाल पाचन और शरीर की अंदरूनी सफाई से जुड़ी समस्याओं के लिए किए जाने का उल्लेख मिलता है. कुछ लोग इसे लिवर के लिए भी उपयोगी मानते हैं.लेकिन शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने या लिवर की बीमारी ठीक करने का दावा प्रमाणित इलाज के रूप में नहीं किया जाना चाहिए. लिवर से जुड़ी समस्या होने पर जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है.
पौधा देखने में भले ही सामान्य और खूबसूरत लगे, लेकिन किसी भी पौधे की पत्तियां, फूल या जड़ को औषधि समझकर खाना ठीक नहीं है. खासकर मधुमेह, ब्लड प्रेशर या किसी दूसरी बीमारी की दवा लेने वाले व्यक्ति को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए.