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Madhubani Naulakha Mahal: राजा- महाराजाओं के समय की पुरानी इमारतें ,बिल्डिंग या पुरानी नक्काशी देखनी है तो आप मधुबनी आ सकते हैं. उस समय मधुबनी में कारीगरों द्वारा बनाई गई बहुत सारी चीज देखनी को मिल जाएगी. मधुबनी के राजनगर में स्थित राजा- महाराजाओं द्वारा बनाई गई कई इमारतों को लगभग 100 वर्ष से भी अधिक पुरानी बताया जाता है.
कहा जाता है कि इसमें ताजमहल से भी ज्यादा कारीगरी, नक्काशी की गई थी. जिला के राजनगर परिसर में स्थित वैसे तो बहुत सारी इमारतें हैं, लेकिन एक नौलखा महल है, जिसे उसे समय 9 लाख चांदी सिक्के से निर्माण कराया गया था. इस वजह से इसका नाम नौलखा पैलेस पड़ गया था.
आमतौर पर माना जाता है कि ऐतिहासिक इमारतें लाल बलुआ पत्थर, संगमरमर, ग्रेनाइट और काले पत्थर या फिर पारंपरिक भट्टियों में पकाई गई मजबूत लाल ईंटों के इस्तेमाल से होता था. ऐसे में राजनगर में स्थित नौलखा महल उस दौर में अत्यधिक सीमेंट के उपयोग को लेकर जाना जाता है.
इसके निर्माण में ब्रिटिश वास्तुकार एम.ई. कोरनी की सेवा ली गई थी. ब्रिटिश वास्तुकार कोरनी ने देश में पहली बार महल निर्माण में सीमेंट का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया था. जो मधुबनी में आज भी जीता जागता उदाहरण है, जिसकी नक्काशी देखते ही आप तारीफ जरूर करेंगे.
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मधुबनी स्थित प्रसिद्ध ऐतिहासिक राजमहल का निर्माण दरभंगा रियासत के महाराजा रामेश्वर सिंह ने करवाया था. यह महल मधुबनी जिला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर कमला नदी के पूर्वी तट पर स्थित है. इतिहासकार जेपी सिंह की मानें तो इस महल का निर्माण काल 1884 से 1929 माना जाता है.
इस महल के नाम को लेकर कहा जाता है कि तकरीबन 100 साल पहले इसके निर्माण में 9 लाख रुपये ( 9 लाख चांदी के सिक्के) खर्च हुए थे. इसलिए इसे ‘नौलखा महल’ नाम दिया गया था. इसकी दीवार में सफेद और काले संगमरमर का भी उपयोग किया गया है. आज भी यहां पहुंचने पर पुरानी उपयोग की गई सामग्री की झलक दिखाई देती है. हालांकि इस भव्य महल में आज भी रखरखाव की कमी नजर आती है.