Jyotiraditya Scindia: महान साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु के उपन्यास में एक प्रसिद्ध लाइन है कि अब आजादी के बाद ग्राम चेतना जाग रही है. यह कथन मध्य प्रदेश के गुना में बिल्कुल सही साबित हुआ, लेकिन शायद आपने आपको जनसेवक कहने वाले नेताओं को यह रास नहीं आ रहा. 1971 में प्रिवी पर्स खत्म होने के बाद राजा महाराजाओं के शाही अधिकारों को खत्म कर दिया गया था, लेकिन उसके बाद भी पुराने राजा-महाराजा के वंशज राजनीति में उतरे और अपनी ठसक को नहीं भूल पाए. जनता के बीच उन्होंने वही रुतबा कायम करना चाहा. ऐसा ही कुछ मामला गुना से सामने आया है.
शख्स पर बुरी तरह से गुस्सा हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया
ज्योतिरादित्य सिंधिया इस समय गुना के दौरे पर हैं. इसी दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जब सिंधिया कार में बैठे हुए थे और एक शख्स शिकायत का पुलिंदा लेकर उनके पास पहुंचा. जहां उसने कहा कि आपसे निवेदन है सड़क बनवा दीजिए. अगर सड़क नहीं बनी, तो हमसे कोई भी वोट नहीं डालेगा.
शख्स का इतना कहना था और ज्योतिरादित्य सिंधिया उस पर बिफर पड़े. उनके चेहरे की तल्खी बता रही थी कि वह कितना गुस्सा हैं. उन्होंने कहा कि यह भाषा मेरे साथ कभी भी उपयोग मत करना. मैं किसी की भी बात नहीं कर रहा हूं. आप निवेदन आकर करें. यह आपका काम है. मेरा काम सड़क बनवाना है.
ज्योतिरादित्य सिंधिया अभी गुना से सांसद हैं और उन्होंने शख्स से ऊंची आवाज में बात नहीं की. ना ही गाली दी. लेकिन जिस लहजे में और तमतमाए अंदाज में वह बात बोली गई. उससे लोगों को आपत्ति हो गई. शायद एक जनप्रतिनिधि को सौम्य और सरल व्यवहार का होना चाहिए, जो जनता से सीधे जुड़ सके. सिंधिया के कड़े लहजे ने मामला बिगाड़ दिया और सभी को खामोश कर दिया.
पहले कलेक्टर पर बिफरे थे ज्योतिरादित्य सिंधिया
गुना में ज्योतिरादित्य सिंधिया के और भी वीडियो वायरल हुए थे, जहां उन्होंने लोगों की समस्याएं कहते हुए कहा था कि कहां है कलेक्टर उसे बुलाओ. गाड़ी में मत बैठिए आप दोनों, मेरी ड्यूटी पर हैं.
भारत की आत्मा गांवों में बसती है. गांवों के आम नागरिक अपनी समस्याओं, जमीनी जरूरतों और हक की बात सहजता से सामने रखना चाहते हैं, लेकिन जब उनके पास कोई रास्ता नहीं बचता, तो वह उग्र रूप अपनाते हैं. कई बार व्यवस्था की आपाधापी या नेताओं की व्यस्तता में इस ग्राम चेतना की अनसुनी हो जाती है. संवाद सही तरीके से ना होने से ही उसका धागा उलझ जाता है.
ग्वालियर राजघराने से है सिंधिया का ताल्लुक
ज्योतिरादित्य सिंधिया का ताल्लुक ग्वालियर के सिंधिया राजघराने से है. उनके दादा जीवाजी राव सिंधिया ग्वालियर के महाराज थे. वहीं उनके पिता जी माधव राव सिंधिया जब बड़े हुए, तब तक राजशाही जा चुकी थी और वह कई बार कांग्रेस से सांसद रहे. उनकी दादी पहले जनसंघ और फिर भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी रहीं.
साल 2019 में चुनाव हारे थे ज्योतिरादित्य सिंधिया
सिंधिया खुद कांग्रेस से पहली बार सांसद बने थे और फिर 2020 में पाला बदलकर बीजेपी में आ गए. पिता की मौत के बाद ज्योतिरादित्य सबसे पहले 2002 में गुना से सांसद बने थे. इसके बाद 2004, 2009 और 2014 में उन्होंने इस सीट को बरकरार रखा था. लेकिन साल 2019 में वक्त बदल गया, जब उन्हें उनके ही सिपहसालार केपी सिंह यादव ने चुनाव हरा दिया. केपी सिंधिया के प्रतिनिधि के रूप में काम कर चुके थे और क्षेत्र में काफी सक्रिय रहे थे. बाद में 2024 में सिंधिया ने यह सीट जरूर जीती थी, लेकिन 2019 का चुनाव उनके लिए किसी झटके से कम नहीं था, क्योंकि गुना उनकी परंपरागत सीट थी.
लोकतंत्र में जनता ही मालिक
तो हे ज्योतिरादित्य सिंधिया जी वक्त बदलते देर नहीं लगती है. अब चुनाव 2029 में हैं. इसलिए व्यवहार को कृपया करके थोड़ा सौम्य करिए, क्योंकि लोकतंत्र में जनता ही मालिक हैं. नेता के पास सत्ता और अधिकार का बल होता है, जबकि आम नागरिक के पास सिर्फ अपनी आवाज. इसलिए संवाद में धैर्य और सहानुभूति की पहली शर्त नेता की ओर से ही पूरी होनी चाहिए.