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Love Story: अब नारायण और मीरा नारायण सेवा संस्थान के 47वें दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में सात फेरे लेंगे. जिन दो लोगों के कदमों को कभी जिंदगी की मुश्किलों ने रोकने की कोशिश की थी, वही कदम अब एक-दूसरे का सहारा बनकर आगे बढ़ेंगे.
उदयपुर: कहते हैं, सच्चा साथ वही होता है, जो मुश्किलों में हाथ थामे और जिंदगी के हर मोड़ पर साथ चले.प्रतापगढ़ के कुम्हारी गांव के नारायण लाल मीणा और मीरा कुमारी मीणा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. दोनों दिव्यांग हैं, दोनों ने जिंदगी में कई मुश्किलों का सामना किया, लेकिन जब दोनों एक-दूसरे से मिले तो उन्हें लगा कि शायद यही वह साथी है, जो उनकी जिंदगी की चुनौतियों को समझ सकता है.
नारायण लाल जब महज एक साल के थे, तब पैर में संक्रमण हो गया था। इलाज के बाद उनका दायां पैर छोटा रह गया और आगे की जिंदगी में चलना उनके लिए आसान नहीं रहा.इसके बावजूद उन्होंने कभी खुद को कमजोर नहीं समझा.उन्होंने छोटी-सी किराना दुकान शुरू की और मेहनत कर अपने परिवार का सहारा बने.हालांकि शादी की उम्र आई तो दिव्यांगता के कारण कई बार उनके रिश्ते नहीं बन पाए.
बच्चों के लिए ऐसे जीवनसाथी की तलाश में थे
दूसरी ओर मीरा कुमारी भी बाएं पैर से दिव्यांग हैं. उन्होंने अपनी परेशानी को अपनी पढ़ाई के रास्ते में नहीं आने दिया.पढ़ाई जारी रखने के साथ वह घर के कामों में भी परिवार का हाथ बंटाती रहीं. उनके परिवार को भी उनकी शादी की चिंता थी. दोनों परिवार अपने बच्चों के लिए ऐसे जीवनसाथी की तलाश में थे, जो उनकी परिस्थितियों को समझ सके.
सामूहिक विवाह समारोह की जानकारी मिली
इसी बीच परिवार को नारायण सेवा संस्थान के सामूहिक विवाह समारोह की जानकारी मिली. यहीं से दोनों की जिंदगी में एक नई उम्मीद आई. जब नारायण और मीरा की मुलाकात हुई तो दोनों ने महसूस किया कि सामने वाला उनकी तकलीफ को सिर्फ समझ ही नहीं सकता, बल्कि उसे खुद भी जी चुका है. धीरे-धीरे बातचीत आगे बढ़ी और दोनों के बीच रिश्ता तय हो गया.परिवारों ने भी इस रिश्ते को अपनी सहमति दे दी. नारायण और मीरा के लिए यह सिर्फ शादी नहीं, बल्कि जिंदगी के उस अकेलेपन का अंत है, जिसे दोनों ने अलग-अलग महसूस किया था.
एक-दूसरे का हाथ थामकर उसे पूरा कर देते
अब नारायण और मीरा नारायण सेवा संस्थान के 47वें दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह में सात फेरे लेंगे. जिन दो लोगों के कदमों को कभी जिंदगी की मुश्किलों ने रोकने की कोशिश की थी, वही कदम अब एक-दूसरे का सहारा बनकर आगे बढ़ेंगे. नारायण और मीरा की कहानी बताती है कि प्यार हमेशा खूबसूरत चेहरों या आसान जिंदगी का मोहताज नहीं होता. कभी-कभी दो लोग अपनी अधूरी कहानियां लेकर मिलते हैं और एक-दूसरे का हाथ थामकर उसे पूरा कर देते हैं.