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Jaunpur Gharana : जौनपुर सदियों से संगीत की अविरल धारा का गवाह रहा है. संगीत साधक सूर्य प्रकाश मिश्रा कहते हैं कि उनके परिवार में संगीत की यह परंपरा कई पीढ़ियों से अनवरत बह रही है. चाहे भोजपुरी की खुशबू हो, गजल की नफासत, बिरहा की मिठास या शास्त्रीय गायन—सभी का मूल आधार शास्त्रीय राग ही हैं. सूर्य प्रकाश मिश्रा बताते हैं कि लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी जैसे दिग्गजों के सदाबहार गीत भी इन्हीं रागों की मजबूत नींव पर रचे गए. सूर्य प्रकाश मिश्रा कहते हैं कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि का मार्ग है. आज की तेज रफ्तार जिंदगी में संगीत की इस परंपरा को सहेजना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
जौनपुर. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर की धरती जौनपुर सदियों से संगीत की अविरल धारा को अपने आंचल में समेटे हुए है. यहां का संगीत घराना केवल एक कला नहीं, बल्कि पीढ़ियों की अटूट साधना और तपस्या का जीवंत रूप है. स्थानीय संगीत साधक बताते हैं कि उनके पूर्वजों के दौर से लेकर आज तक संगीत को एक पारिवारिक और ईश्वरीय परंपरा मानकर सहेजा जा रहा है. अयोध्या दरबार से लेकर आज तक की ऐतिहासिक कड़ी पर जिले के वरिष्ठ संगीत साधक सूर्य प्रकाश मिश्रा कहते हैं कि उनके परिवार में संगीत की यह परंपरा सदियों और कई पीढ़ियों से अनवरत बह रही है. उनके पूर्वज अयोध्या नरेश के राजदरबार में प्रतिष्ठित गायक और सारंगी वादक रहे हैं. उन्होंने बचपन से ही अपने बाबा और गुरुओं से संगीत की बारीकियां सीखीं और आज की पीढ़ी को भी उसी निष्ठा से यह विरासत सौंप रहे हैं.
साधक सूर्य प्रकाश मिश्रा कहते हैं कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि का मार्ग है. जब ‘स्वर’ में सच्ची लगन का ‘ई’ जुड़ता है, तब वह ‘ईश्वर’ के समान वंदनीय बन जाता है. शुद्ध मन से की गई साधना ही रागों और रागनियों को जीवन देती है. चाहे भोजपुरी की माटी की खुशबू हो, गजल की नफासत, बिरहा की मिठास या फिर शास्त्रीय गायन—सभी का मूल आधार शास्त्रीय राग ही हैं. लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी जैसे दिग्गजों के सदाबहार गीत भी इन्हीं रागों की मजबूत नींव पर रचे गए.
एक ही मांग
सूर्य प्रकाश मिश्रा के मुताबिक, आज की तेज रफ्तार जिंदगी में संगीत की इस परंपरा को सहेजना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. रागों और स्वरों को साधने में समय, धैर्य और निरंतर रियाज की जरूरत होती है.आज के युवा अक्सर त्वरित परिणाम की चाह में जल्दी पीछे हट जाते हैं, जबकि एक बार जब स्वर सध जाता है, तो कलाकार की पहचान और उसकी कला की मांग स्वतः बढ़ जाती है. इस परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए संगीतकारों ने सरकार से जौनपुर में एक व्यवस्थित संगीत संस्थान या अकादमी स्थापित करने की मांग की है. इससे जिले के उभरते कलाकारों को अपनी जड़ों से जुड़कर संगीत की शास्त्रीय और आधुनिक बारीकियों को सीखने के लिए बाहर के बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा. जौनपुर की यह ऐतिहासिक संगीत परंपरा निरंतर फलती-फूलती रहेगी.