Agriculture Tips: फसल की अच्छी ग्रोथ के लिए अपनाएं ये देसी जुगाड़, घर पर तैयार करें आसान ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर

Agriculture Tips: फसल की अच्छी ग्रोथ के लिए अपनाएं ये देसी जुगाड़, घर पर तैयार करें आसान ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर


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एग्रीकल्चर टिप्स: घर पर कुछ चीज मिलाकर आसान तरीके से बनाए गए देसी फर्टिलाइजर

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Agriculture Tips: किसान जैविक खाद तैयार करते समय सामग्री की गुणवत्ता, नमी और खाद के पूरी तरह तैयार होने का ध्यान रखें. कच्ची या अधपकी खाद सीधे फसल की जड़ों के संपर्क में डालने से बचना चाहिए. खाद की मात्रा फसल, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए बड़े क्षेत्र में इस्तेमाल से पहले कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना उपयोगी रहेगा.

भीलवाड़ा – आज कल किसान बाजार की खाद के बजाय खुद घर पर खाद बनाने का मूड बना रहे हैं क्योंकि बाजार में मिलने वाली खाद महंगी भी पड़ती है और मिट्टी को भी नुकसान पहुंचता है. खेती में रासायनिक खाद पर बढ़ते खर्च के बीच किसान घर और खेत में उपलब्ध चीजों से कम लागत में देसी जैविक खाद तैयार कर सकते हैं. गोबर, गोमूत्र, सूखे पत्ते, फसल अवशेष, गुड़ और सब्जियों के छिलकों जैसी सामग्री का उपयोग कर खाद बनाई जा सकती है. इससे खेत में जैविक पदार्थ बढ़ाने और कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग में मदद मिलती है.

गोबर की खाद बनाने का आसान तरीका के लिए गोबर को किसी छायादार स्थान पर ढेर लगाकर रखें. इसमें सूखे पत्ते, भूसा और फसल के बचे हुए अवशेष मिलाएं. नमी बनाए रखने के लिए जरूरत के अनुसार पानी का हल्का छिड़काव करें. ढेर को समय-समय पर पलटते रहें, ताकि हवा का संचार बना रहे. कुछ समय बाद जब सामग्री अच्छी तरह सड़कर गहरे रंग की और भुरभुरी हो जाए तो इसे खेत में इस्तेमाल किया जा सकता है.

कम्पोस्ट खाद घर पर भी तैयार की जा सकती है. इसके लिए गड्ढे या ड्रम में सब्जियों के छिलके, सूखे पत्ते, घास और फसल अवशेष की परतें लगाएं. हर परत के बीच थोड़ी मिट्टी या पुरानी कम्पोस्ट डालें और नमी के लिए पानी का छिड़काव करें. सामग्री को समय-समय पर मिलाते रहें. पूरी तरह तैयार कम्पोस्ट में कच्चे छिलके या पत्ते आसानी से दिखाई नहीं देते और खाद भुरभुरी हो जाती है.

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जीवामृत बनाने के लिए एक सामान्य देसी तरीक़े से लगभग 10 किलो ताजा गोबर, 5 से 10 लीटर गोमूत्र, 1 से 2 किलो गुड़ और करीब 1 से 2 किलो बेसन या किसी दाल का आटा लेकर इन्हें पानी के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है. मिश्रण को छायादार स्थान पर रखें और दिन में एक-दो बार लकड़ी से चलाएं. कुछ दिनों में इसका किण्वन होने के बाद इसे पानी में उचित अनुपात में मिलाकर खेत में दिया जा सकता है. इस्तेमाल से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा.

अक्सर देखने में आता है कि फसलों के अवशेष को ज्यादातर जला देते हैं. इसके वजह से नुकसान भी होता है. फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खाद में बदलें खेत से निकले सूखे पत्ते, भूसा, घास और फसल के बचे हिस्सों को एक जगह इकट्ठा करके गोबर और थोड़ी मिट्टी के साथ मिलाया जा सकता है. इसमें नमी बनाए रखने के लिए समय-समय पर पानी डालें और ढेर को पलटते रहें. इस तरह खेत का जैविक कचरा धीरे-धीरे उपयोगी खाद में बदल सकता है और मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

किसान जैविक खाद तैयार करते समय सामग्री की गुणवत्ता, नमी और खाद के पूरी तरह तैयार होने का ध्यान रखें. कच्ची या अधपकी खाद सीधे फसल की जड़ों के संपर्क में डालने से बचना चाहिए. खाद की मात्रा फसल, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए बड़े क्षेत्र में इस्तेमाल से पहले कृषि विभाग या कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना उपयोगी रहेगा. देसी खाद का नियमित और सही तरीके से इस्तेमाल मिट्टी की संरचना सुधारने और खेत के जैविक अवशेषों के बेहतर प्रबंधन में मदद कर सकता है.



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