Adidas vs Puma Story : दो जूतों के चक्कर में पूरे शहर में हाहाकार, टेढ़ी हो गई पब्लिक की गर्दनें, दो भाइयों ने किया राज

Adidas vs Puma Story : दो जूतों के चक्कर में पूरे शहर में हाहाकार, टेढ़ी हो गई पब्लिक की गर्दनें, दो भाइयों ने किया राज


दो कंपनियों के जूतों के चक्कर में पूरा शहर आपस में भिड़ गया था. लोग एक-दूसरे से बातचीत करना बंद कर दें, अलग-अलग दुकानों पर जाने लगें और एक-दूसरे के परिवारों में शादी तक करने से साफ इनकार कर दें? सुनने में ये किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है, लेकिन जर्मनी के हर्जोजेनौराच शहर में ऐसा सचमुच हुआ था. ये अजीबोगरीब किस्सा शुरू हुआ था दो सगे भाइयों की आपसी जिद, पारिवारिक कलह और नफरत से, जिन्होंने आगे चलकर दुनिया की दो सबसे मशहूर शू कंपनियां ‘एडिडास’ (Adidas) और ‘प्यूमा’ (Puma) बनाईं. इन दोनों भाइयों की दुश्मनी इस कदर बढ़ी कि इसने एक शहर को दो हिस्सों में बांट दिया.

1936 का बर्लिन ओलंपिक और डॉस्लर भाइयों की सफलता

ये कहानी शुरू होती है साल 1936 से, जब जर्मनी के बर्लिन शहर में ओलंपिक खेलों का आयोजन हुआ था. जर्मनी के ही हर्जोजेनौराच शहर में दो सगे भाई रहते थे, रुडॉल्फ डॉस्लर और एडॉल्फ डॉस्लर. दोनों भाई मिलकर ‘डॉस्लर शूज’ नाम की एक कंपनी चलाते थे और खेल के लिए बेहतरीन जूते बनाते थे.

1936 के बर्लिन ओलंपिक में अमेरिका के स्टार एथलीट जेसी ओवेंस ने डॉस्लर भाइयों के बनाए जूते पहनकर दौड़ लगाई और चार-चार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. जेसी ओवेंस की इस ऐतिहासिक जीत के बाद डॉस्लर भाइयों की किस्मत अचानक बदल गई. खेल की दुनिया में उनके जूतों की भारी मांग होने लगी और दोनों भाइयों की कंपनी से हर रोज हजारों जूते बिकने लगे. दोनों भाइयों का बिजनेस बहुत तेजी से आगे बढ़ने लगा.

पारिवारिक कलह, 1948 का बंटवारा और Adidas-Puma का जन्म

बिजनेस तो बहुत बढ़िया चल रहा था, लेकिन जैसे-जैसे पैसा और नाम बढ़ा, वैसे-वैसे दोनों भाइयों के बीच कड़वाहट भी बढ़ने लगी. घर की छोटी-छोटी बातों से शुरू हुई पारिवारिक कलह धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि दोनों भाइयों का एक साथ काम करना मुश्किल हो गया.

आखिरकार साल 1948 में दोनों भाइयों ने अलग होने का फैसला कर लिया. बंटवारे के बाद दोनों ने अपनी-अपनी अलग जूतों की कंपनी खोली. एडॉल्फ डॉस्लर, जिन्हें प्यार से ‘आदि’ कहा जाता था, ने अपने नाम को मिलाकर ‘Adidas’ (एडिडास) कंपनी बनाई. वहीं, रुडॉल्फ डॉस्लर ने अपनी कंपनी का नाम पहले ‘Ruda’ रखा, जिसे बाद में बदलकर ‘Puma’ (प्यूमा) कर दिया गया. इस तरह एक ही परिवार से दुनिया के दो सबसे बड़े ब्रांड्स का जन्म हुआ.

बिजनेस की अलग-अलग सोच और बढ़ती दुश्मनी

अलग होने के बाद दोनों भाइयों ने अपनी कंपनियों को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग रास्ते चुने. एडॉल्फ की सोच थी कि हर खेल की अपनी जरूरत होती है, इसलिए एडिडास हर खेल के हिसाब से अलग-अलग जूते डिजाइन करती थी. वहीं दूसरी तरफ, रुडॉल्फ की प्यूमा कंपनी का पूरा फोकस बेहद आरामदायक और बढ़िया क्वालिटी के जूते बनाने पर था.

दोनों ही भाइयों की कंपनियों को बाजार में जबरदस्त कामयाबी मिली. उनके बनाए जूते पूरी दुनिया में बिकने लगे और दोनों भाई अरबपति बन गए. लेकिन इस कामयाबी के साथ-साथ दोनों भाइयों की आपसी दुश्मनी भी दिन-ब-दिन गहरी होती गई. दोनों एक-दूसरे को नीचा दिखाने और मार्केट में पछाड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे.

जब दो धड़ों में बंट गया पूरा हर्जोजेनौराच शहर

दोनों भाइयों की ये आपसी लड़ाई सिर्फ उनके घर या दफ्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर पूरे हर्जोजेनौराच शहर पर पड़ा. शहर के लोग दो गुटों में बंट गए. आधा शहर एडिडास के साथ था और आधा शहर प्यूमा के साथ.

हालात इतने खराब हो गए थे कि एडिडास की फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारी प्यूमा के वर्करों से बात तक नहीं करते थे. दोनों कंपनियों में काम करने वाले लोगों के परिवारों के बीच रिश्ते या शादियां होना पूरी तरह से बंद हो गया था. शहर की दुकानें, रेस्टोरेंट और बेकरी तक बंट गई थीं. जिस दुकान पर एडिडास पहनने वाले लोग जाते थे, वहां प्यूमा वालों का जाना मना था. जिस नाई की दुकान पर प्यूमा के कर्मचारियों की हजामत बनती थी, वहां एडिडास वालों की एंट्री पर बैन लगा दिया गया था.

‘झुकी हुई गर्दनों वाला शहर’

हर्जोजेनौराच शहर में जब भी कोई किसी अनजान व्यक्ति से मिलता, तो सबसे पहले उसकी नजर सामने वाले के जूतों पर जाती थी. जूते देखकर ही तय होता था कि सामने वाले से बात करनी है या उससे दुश्मनी रखनी है.

हर वक्त एक-दूसरे के जूते देखने की इस आदत की वजह से इस शहर को लोग ‘झुकी हुई गर्दनों वाला शहर’ कहने लगे थे. शहर में बिना जूते देखे कोई किसी को दोस्त नहीं बनाता था. दो भाइयों की नफरत ने पूरे शहर के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर दिया था.

मौत के बाद भी बनी रही दूरी, कब्रिस्तान के अलग-अलग कोने

एडॉल्फ और रुडॉल्फ डॉस्लर की ये नफरत जिंदगी भर कायम रही और मौत के बाद भी खत्म नहीं हुई. जब दोनों भाइयों का निधन हुआ, तो उन्हें शहर के एक ही कब्रिस्तान में दफनाया गया, लेकिन उनके परिजनों ने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि दोनों की कब्रें कब्रिस्तान के बिल्कुल अलग-अलग कोनों पर बनाई जाएं, ताकि वे मौत के बाद भी एक-दूसरे के करीब न आ सकें.

समय के साथ-साथ परिस्थितियां बदलीं और अब एडिडास और प्यूमा दोनों ही ग्लोबल कंपनियां बन चुकी हैं. आज इन दोनों कंपनियों में डॉस्लर परिवार की कोई हिस्सेदारी या मालिकाना हक नहीं बचा है, लेकिन दो जूतों के चक्कर में पूरे शहर के आपस में लड़ पड़ने की ये अजीब कहानी आज भी दुनिया भर में बड़े चाव से सुनाई जाती है.



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