26 महीने 8 दिन में चार हजार किमी. चले लक्ष्मण नामदेव, इंदौर से गया जी पैदल पहुंचे, किया इनका पिंडदान

26 महीने 8 दिन में चार हजार किमी. चले लक्ष्मण नामदेव, इंदौर से गया जी पैदल पहुंचे, किया इनका पिंडदान


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कहते हैं कि इंसान ठान ले तो बहुत कुछ कर सकता है. इसका उदाहरण हैं मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले लक्ष्मण नामदेव. इनकी 4 संतान हैं और चारों अपने-अपने क्षेत्र में काम कर रहे हैं. लक्ष्मण देव के बच्चे चाहते थे कि उनके पिता जो कुछ भी करना चाहते हैं यह काम वह ट्रेन का सफर करके या कार-वाहन का सफर करके पूरा कर लें. इधर लक्ष्मण देव के मन में अलग जिद है. उन्होंने….

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कुंदन कुमार/गया: मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले लक्ष्मण नामदेव गणवीर 71 वर्ष की उम्र में अपने पितृ, देश के शहीद जवान, त्रासदी और युद्ध में मारे गए लोगों के पिंडदान के लिए 4 हजार किलोमीटर पैदल चल बिहार के गया स्थित विष्णुपद पहुंचे. विष्णुपद में पिंडदान करने के बाद वापस इंदौर के लिए पैदल निकल गए हैं. 26 महीने 8 दिन में इन्होंने यह यात्रा पूरी की है. जुलाई 2024 में अपने घर इंदौर से निकलने के बाद उज्जैन, देवास, सांची स्तूप, बागेश्वर धाम, वाल्मीकि आश्रम, चित्रकूट, प्रयागराज, सीताकुंड और वाराणसी, रोहतास होते हुए गया जी पहुंचे.

26 महीने के इस सफर में इन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. बारिश गर्मी, धूप, ठंड, जंगल पहाड़ और जानवर भी इनके हौसले को डगमगा नहीं सका. बिना थके लगातार 26 महीने 8 दिन तक पैदल चलकर यहां पहुंचे. लक्ष्मण नामदेव अपने पीठ पर 30 किलो लगेज लेकर ढोल और घूंघरु बजाते हुए पैदल यात्रा कर रहे हैं. लक्ष्मण पेशे से कलाकार हैं और इंदौर में शादी विवाह या अन्य कार्यक्रम में ढोल बजाने का काम करते हैं. इनके दो बेटे और बेटियां हैं और चारों बच्चे अच्छे जॉब कर रहे हैं. इनका बड़ा बेटा एलआईसी में और दूसरा होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई कर नौकरी कर रहा है. जबकि एक बेटी शिक्षक है और दूसरी स्वास्थ्य विभाग में नर्स है.

लक्ष्मण अपने साथ एक बैनर लेकर घूम रहे हैं जिसमें सभी जाति धर्म के सम्मान आदर का संदेश दे रहे हैं. उनके बैनर पर शिक्षा की अलग जगाने का भी संदेश दर्ज है जिसमें लिखा है शिक्षित रहो संगठित रहो, संघर्ष करो, जय विश्व भारत, राष्ट्र सेवा देशभक्ति, आई लव माय इंडिया, जियो और जीने दो, हंसते रहो हंसाते रहो जैसे संदेश लिखे है. लक्ष्मण रोजाना 15-20 किलोमीटर पैदल यात्रा करते हैं और शाम 5 बजे के बाद इनकी यात्रा रुक जाती है.

लक्ष्मण नामदेव बताते हैं कि इन्होंने गया जी में अपने पितरों के अलावे स्वयं, देश के सेवा में शहीद जवान, अहमदाबाद में हुए विमान क्रैश में मारे गए लोग, बाढ़ भूकंप में मरने वाले लोग, मध्य प्रदेश में दूषित पानी पीकर मरने वाले तथा कलाकार जो अब इस दुनिया में नहीं है उनका भी पिंडदान किया. इन्होंने बताया इनके बच्चे चाहते थे कि हम किसी आरामदायक वाहन या ट्रेन से गया जी पहुंचे लेकिन मुझे पैदल यात्रा कर गया जी पहुंचना था.



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