बुलेट ट्रेन का छोटा भाई, 160 KMPH की रफ्तार से 6 घंटे में नापेगी 760 किलोमीटर – Delhi Varanasi Vande Bharat sleeper train 160 kmph speed 760 kilometre

बुलेट ट्रेन का छोटा भाई, 160 KMPH की रफ्तार से 6 घंटे में नापेगी 760 किलोमीटर – Delhi Varanasi Vande Bharat sleeper train 160 kmph speed 760 kilometre


Delhi-Varanasi Vande Bharat Sleeper: दिवाली और छठ पूजा के मौके पर हजारों-लाखों की तादाद में लोग अपने घरों की ओर जाते हैं. इसे देखते हुए भारतीय रेल की तरफ खास तैयारी की जाती है. स्‍पेशल ट्रेनें चलाई जाती हैं, ताकि उत्‍तर प्रदेश, बिहार, झारखंड जैसे प्रदेशों की ओर जाने वालों को कठिनाइयों का सामना न करना पड़े. अब दिवाली-छठ महापर्व के मौके पर इंडियन रेलवे लोगों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी है. भारतीय रेल दिल्‍ली से वाराणसी के बीच देश की दूसरी सेमी हाई-स्‍पीड वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन चलाने की तैयारी कर रहा है. बता दें कि पहली वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन कामाख्‍या से हावड़ा के बीच चलाई गई. स्‍पीड से लेकर सुविधाओं के मामले में यह ट्रेन राजधानी-दुरंतो जैसी ट्रेनों से दो कदम आगे है. वंदे भारत को बुलेट ट्रेन का छोटा भाई भी कहा जाता है.

जानकारी के अनुसार, भारतीय रेलवे नई दिल्ली और वाराणसी के बीच दूसरी स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू करने की तैयारी कर रहा है. प्रस्तावित ट्रेन रात में चलने वाली सेवा होगी और इसका संचालन प्रयागराज तथा कानपुर के रास्ते किए जाने की योजना है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेन का ट्रायल रन इसी महीने शुरू हो सकता है और दिवाली से पहले नियमित सेवा शुरू करने पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, रेलवे बोर्ड ने अभी ट्रेन का नंबर, किराया और रेगुलर ऑपरेशन की तारीख की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. दिल्‍ली से वाराणसी के बीच चलने वाली वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन बिहारवालों के लिए भी राहत बन सकती है, क्‍योंकि यह वाराणसी से पटना के बीच ब्रिज का काम करेगी.

वाराणसी से रात 9:20 बजे रवाना होने का प्रस्ताव

सीएनबीसी न्‍यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समय सारिणी के अनुसार, स्लीपर वंदे भारत वाराणसी कैंट से रात 9:20 बजे रवाना होगी. इसके बाद ट्रेन रात 10:45 बजे प्रयागराज पहुंचेगी और करीब 12:35 बजे कानपुर सेंट्रल से गुजरेगी. ट्रेन के सुबह 5 बजे नई दिल्ली पहुंचने का प्रस्ताव है. वापसी यात्रा में ट्रेन नई दिल्ली से रात 9:20 बजे चलकर सुबह 5 बजे वाराणसी पहुंच सकती है. हालांकि, ये समय फिलहाल प्रस्तावित हैं. ट्रायल रन के दौरान सामने आने वाले परिचालन संबंधी पहलुओं और जरूरी मंजूरियों के बाद अंतिम समय सारिणी में बदलाव किया जा सकता है.

160 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है रफ्तार

नई स्लीपर वंदे भारत को 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की योजना है. दिल्‍ली से बनारस की दूरी 760 किलोमीटर है. यदि यह ट्रेन पूरी रफ्तार से चली तो 5:15 घंटे में अपने डेस्टिनेशन तक पहुंच जाएगी. हालांकि, रियल ऑपरेशनल रफ्तार ट्रैक की स्थिति और रेलवे के ‘मिशन रफ्तार’ के तहत चल रहे काम की प्रगति पर निर्भर करेगी. अधिकतम ऑपरेशनल स्‍पीड हासिल होने की स्थिति में दिल्ली, प्रयागराज और वाराणसी के बीच यात्रा समय कम करने में मदद मिल सकती है.

दिल्‍ली से वाराणसी के बीच वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन चलने से लोगों को सहूलियत होने की उममीद है.

16 कोच में 823 यात्रियों की क्षमता

प्रस्तावित वंदे भारत स्‍लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे और इसमें 823 यात्रियों के बैठने-सोने की क्षमता होगी. ट्रेन में 11 AC-3, 4 AC-2 और 1 फर्स्ट AC के कोच शामिल होंगे. स्लीपर वंदे भारत में यात्रियों के लिए वंदे भारत ट्रेनों से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है. ट्रेन के प्राथमिक रखरखाव की जिम्मेदारी उत्तर रेलवे के पास रहने की उम्मीद है.

हावड़ा-कामाख्या के बाद दूसरी स्लीपर वंदे भारत

दिल्ली-वाराणसी सेवा भारतीय रेलवे की दूसरी स्लीपर वंदे भारत सेवा होगी. इससे पहले हावड़ा-कामाख्या मार्ग पर स्लीपर वंदे भारत ट्रेन ऑपरेशनल है. रेलवे बोर्ड की ओर से दिल्ली-वाराणसी ट्रेन के नंबर, किराए और नियमित संचालन की तारीख की घोषणा अभी बाकी है. ट्रायल रन और परिचालन मंजूरियों के बाद इन पहलुओं पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.

भारत-रूस की साझेदारी से बन रहे स्लीपर ट्रेनसेट

स्लीपर वंदे भारत ट्रेनसेट का निर्माण भारत-रूस संयुक्त उद्यम के तहत किया जा रहा है. रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) और रूसी कंपनी ट्रांसमाशहोल्डिंग (टीएमएच) ने किन्नेट रेलवे सॉल्यूशंस लिमिटेड का गठन किया है. यह कंपनी महाराष्ट्र के मराठवाड़ा स्थित कारखाने में 120 स्लीपर वंदे भारत ट्रेनसेट बनाएगी. प्रत्येक ट्रेनसेट में 16 कोच होंगे.



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