जितिया से भी कठिन हरिवासल व्रत, 12 वर्षों बाद बना है योग, मधुबनी के पंडित ने बताया नियम

जितिया से भी कठिन हरिवासल व्रत, 12 वर्षों बाद बना है योग, मधुबनी के पंडित ने बताया नियम


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मिथिला में एक ऐसा व्रत है जो जितिया से भी कठिन माना जाता है. हम आपको जिस व्रत के बारे में बताने जा रहे हैं उसकी एक बड़ी खासियत यह भी है कि इस व्रत को महिला, पुरुष, बच्चे और बूढ़े कोई भी कर सकते हैं. यह व्रत बहुत कठिन माना जाता है क्योंकि इस व्रत को करने वालें लोगों को चार दिनों तक…

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आर्या झा/मधुबनी: मिथिला में एक व्रत मनाया जाता है जो कई वर्षों बाद संयोग से आता है. जितनी मुश्किल से यह व्रत पर्व आता है उतना ही यह व्रत कठिन भी होता है. इसमें चार दिनों तक ना पानी पीते हैं और ना खाना खाते हैं. यह व्रत जितिया से भी कठिन माना जाता है. 10-12 साल बाद इस व्रत का संयोग आता है. एक बार फिर इस महीने यह व्रत होगा. तो चलिए जानते हैं कि हम किस व्रत की बात कर रहे हैं और इस व्रत को रखने का नियम और तरीका क्या है. तो हम बात कर रहे हैं हरिवासल व्रत के बारे में.

हरिवासल व्रत है खास
ऐसा कहते हैं कि जितिया व्रत सबसे कठिन होता है क्योंकि इसमें निर्जला रहना पड़ता है. हम आपको इससे भी कठिन व्रत के बारे में बता रहे हैं. यह व्रत मिथिलावासी करते हैं जो संयोग से होता है. इस व्रत को कर पाना हर किसी के वश की बात नहीं है. मिथिला में हरिवासल व्रत की ख़ास महत्ता है. इस वर्ष यह 12 सालों बाद यह योग बना रहा है. नाम से ही स्पष्ट है कि हरि का उपवास इसमें भगवान विष्णु, शिव और पार्वती की विशेष पूजा की जाती हैं.

इस वर्ष 2026 में 21 सितंबर से शुरू होकर 24 सितंबर तक व्रत का शुभ दिन है. पंडित आत्माराम कहते हैं कि यह व्रत सबसे कठिन है. पंडित ने इसे जितिया से भी ज्यादा मुश्किल बताया और कहा कि इसमें चार दिन तक बिना खाना-पानी के रहना होता है. यानि कि निर्जला व्रत होता है.

क्या है नियम और शुभ तरीका
हरिवासल व्रत कोई भी महिला-पुरुष, बच्चे, बूढ़े कर सकते हैं. हालांकि, इस व्रत को उन्हें ही करना चाहिए जो बिना पानी-खाना के चार दिनों तक रह सकते हैं. सोमवार 21 सितंबर उपवास का पहला दिन एकभुक्त ( एक समय पानी और खाना) कर दिन भर व्रत और शाम को शुद्ध भोजन करना है. दूसरे और तीसरे दिन मंगलवार और बुधवार निर्जला व्रत दो दिनों तक रहना है. उसके अगले चौथे दिन गुरुवार को पूजा पाठ करने के बाद ब्राह्मण भोजन, सामर्थ्य अनुसार दान -दक्षिणा कर एक समय शाम को शुद्ध भोजन करना होता है. कुल चार दिनों तक हरिवासल में बहुत सारा नियम है उसको मानना पड़ता है. ब्रश ( दातुन) नहीं करना, झाड़ू, जूठा बर्तन को नहीं छुआ जाता है. पारण के दिन आप स्नान के बाद गंगाजल या शरबत पीकर व्रत खोलें.



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