डीयू का वो कोना, जहां जीत के बाद ABVP हो या NSUI, सब टेकते रहे हैं माथा, अटल जी से है कनेक्शन

डीयू का वो कोना, जहां जीत के बाद ABVP हो या NSUI, सब टेकते रहे हैं माथा, अटल जी से है कनेक्शन


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DUSU Election 2026 : दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में लगी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा DUSU चुनाव के बाद जीत की तस्वीरों का खास ठिकाना बन चुकी है. ABVP हो या NSUI, अलग-अलग छात्र संगठन यहां अपनी जीत का जश्न मनाते रहे हैं. लेकिन इस प्रतिमा की कहानी सिर्फ चुनावी परंपरा तक सीमित नहीं है.

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DUSU Election: डूसू चुनाव 2026 जीत के बाद ABVP (बाएं) और NSUI 2024 में जीत के बाद.

DUSU Election 2026 : दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनाव के बाद स्वामी विकेकानंद की आइकॉनिक प्रतिमा के पास खड़े होकर जीत की तस्वीरें आती हैं. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भले ही स्वामी विवेकानंद को अपना आइकॉन मानती हो, लेकिन इस प्रतिमा के के सामने सभी स्टूडेंट विंग माथा टेकते हैं. लेकिन इस प्रतिमा की कहानी सिर्फ आज की छात्र राजनीति तक सीमित नहीं है. इसकी शुरुआत करीब पांच दशक पहले हुई थी और इसके तार दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति के साथ-साथ अटल बिहारी वाजपेयी तक जुड़ते हैं.

स्वामी विवेकानंद की यह प्रतिमा दिल्ली यूनिवर्सिटी के नॉर्थ कैंपस में आर्ट्स फैकल्टी और लाइब्रेरी के बीच लगी है. इसकी स्थापना स्वामी विवेकानंद स्मारक समिति की ओर से की गई थी.

अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी नींव

स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा साल 1978 में जब लगी थी, तो उस समय भाजपा नेता विजय गोयल ABVP से डूसू अध्यक्ष थे. विजय गोयल की अपनी वेबसाइट के मुताबिक, DUSU अध्यक्ष रहते उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी से संपर्क किया और वाजपेयी ने छात्रसंघ की ओर से प्रतिमा की नींव रखी. गोयल के आधिकारिक बायोडाटा में वे यह भी कहते हैं कि उन्होंने स्वामी विवेकानंद स्मारक समिति के अध्यक्ष के रूप में DU के मुख्य परिसर में प्रतिमा स्थापित कराई. हालांकि, उपलब्ध स्रोतों से यह स्पष्ट नहीं होता कि प्रतिमा के अंतिम निर्माण के मूर्तिकार कौन थे और औपचारिक उद्घाटन किसने किया था. हालांकि, उपलब्ध स्रोतों से यह स्पष्ट नहीं होता कि प्रतिमा के अंतिम निर्माण के मूर्तिकार कौन थे और औपचारिक उद्घाटन किसने किया था.

प्रतिमा के साथ तस्वीर चुनावी परंपरा

आज डूसू चुनाव में जीत के बाद विजयी उम्मीदवारों का विवेकानंद प्रतिमा तक पहुंचना कैंपस की स्थापित चुनावी परंपराओं में गिना जाता है. दिलचस्प बात यह है कि इस परंपरा में अलग-अलग छात्र संगठनों के नेता शामिल रहे हैं. चाहे एबीवीपी हो या NSUI सभी अपनी जीत इस प्रतिमा के साथ सेलिब्रेट करते हैं.



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