गेहूं-बाजरे के साथ उगा सकते हैं थाई एप्पल, खेत की मेड़ पर एक बार लगाएं पौधे
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Thai Apple Farming Tips: किसानों के लिए इस खेती का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि उन्हें गेहूं, बाजरा, चना या सरसों जैसी पारंपरिक फसलों को छोड़ने की जरूरत नहीं है. किसान अपनी मुख्य फसल के साथ खेत की मेड़ पर थाई एप्पल के पौधे लगाकर अतिरिक्त आमदनी का रास्ता बना सकते हैं. जानिए कैसे खेत की खाली जगह पर उगा सकते है थाईएप्पल
किसानों के लिए परंपरागत खेती के साथ फलदार पौधों की खेती अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकती है. खास बात यह है कि इसके लिए किसान को अपनी मुख्य फसल वाली जमीन अलग से खाली करने की जरूरत भी नहीं है. खेत की मेड़, किनारे की खाली जगह और ऐसी जगह जहां नियमित खेती नहीं हो पाती, वहां थाई एप्पल के पौधे लगाए जा सकते हैं. एक बार पौधे लगाने के बाद आने वाले वर्षों तक इससे फल प्राप्त किए जा सकते हैं.
थाई एप्पल मूल रूप से थाईलैंड से जुड़ा फल है, लेकिन अब इसकी खेती भारत के अलग-अलग हिस्सों में भी की जा रही है. कम जगह में पौधे लगाने और मुख्य फसल के साथ बागवानी को जोड़ने के कारण यह किसानों के लिए अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकता है.
इस तरह एक ही खेत से किसान को अनाज की फसल के साथ फल की अतिरिक्त आमदनी मिल सकती है. जिन किसानों के खेत में मेड़ पर पर्याप्त जगह है, उनके लिए यह मॉडल विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है. थाई एप्पल के पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल करते हुए इन्हें पेड़ के रूप में विकसित किया जा सकता है. कृषि एक्सपर्ट से अनुसार इसके पौधे करीब छह महीने में फल देना शुरू कर सकते हैं. पेड़ विकसित होने के बाद फल उत्पादन बढ़ सकता है.
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इसकी खेती में जैविक और देशी खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है. जानकरी के अनुसार इस पौधे को पानी की भी अपेक्षाकृत कम आवश्यकता होती है. बताया जाता है कि पेड़ लंबे समय तक उत्पादन देने में सक्षम रहता है.किसानों के लिए इस खेती का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि उन्हें गेहूं, बाजरा, चना या सरसों जैसी पारंपरिक फसलों को छोड़ने की जरूरत नहीं है. किसान अपनी मुख्य फसल के साथ खेत की मेड़ पर थाई एप्पल के पौधे लगाकर अतिरिक्त आमदनी का रास्ता बना सकते हैं.
खेत की जिस जमीन का उपयोग खेती के दौरान नहीं हो पाता, वहां इसके फलदार पौधे लगाए जा सकते हैं. इससे खेत की उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसान को एक अतिरिक्त आय का बढ़िया स्रोत मिल सकता है. थाई एप्पल की मांग और स्थानीय बाजार में मिलने वाला भाव क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. जानकरी के अनुसार कुछ स्थानों पर इसका थोक भाव करीब 25 रुपये प्रति किलो तक बताया गया है. हालांकि किसान को खेती शुरू करने से पहले अपने आसपास की मंडी में इसकी मांग, बिक्री व्यवस्था और वास्तविक बाजार भाव की जानकारी लें सकते है.
इस तरह थाई एप्पल को मुख्य फसल के विकल्प के बजाय अतिरिक्त फसल के रूप में अपनाकर किसान अपनी जमीन का बेहतर उपयोग कर सकते हैं. खेत की मेड़ और खाली हिस्से में फलदार पौधे लगाने का यह तरीका किसानों के लिए खेती से होने वाली कुल आमदनी बढ़ाने का एक विकल्प बन सकता है.