Vibe Movie Review: इंटरवल के बाद पटरी से उतर गई कुणाल खेमू की ‘वाइब’

Vibe Movie Review: इंटरवल के बाद पटरी से उतर गई कुणाल खेमू की ‘वाइब’


नई दिल्ली. कुणाल खेमू अपनी दूसरी डायरेक्टोरियल फिल्म ‘वाइब’ के साथ दर्शकों के सामने लौट आए हैं. इस बार, उन्होंने एक्शन, थ्रिल, दोस्ती, देशभक्ति और थोड़ी सिचुएशनल कॉमेडी को मिलाने की कोशिश की है. कुणाल खेमू, स्पर्श श्रीवास्तव और प्रीति जिंटा स्टारिंग यह फिल्म शुरू में अपने तेज और मजेदार डायलॉग से बांधे रखती है. हालांकि, इंटरवल के बाद एक उलझी हुई कहानी और एक ढीला स्क्रीनप्ले उत्साह को कम कर देता है, जिससे यह एक औसत थ्रिलर-कॉमेडी बन जाती है.

कहानी
फिल्म हार्दिक (कुणाल खेमू) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो रिहैब से बाहर आने के बाद अपनी जिंदगी को एक नई शुरुआत देना चाहता है. अपने सबसे अच्छे दोस्त ‘बग्स’, जिसे भागीरथ (स्पर्श श्रीवास्तव) के नाम से भी जाना जाता है, की मदद से हार्दिक को एक IT कंपनी में नौकरी मिल जाती है. कहानी तब मोड़ लेती है जब देश पर अचानक एक बड़ा आतंकवादी हमला होने का खतरा मंडराता है. अनजाने में हार्दिक और बग्स खुद को इस नेशनल सिक्योरिटी खतरे के बीच फंसा हुआ पाते हैं. यहीं पर मैडम एच (प्रीति जिंटा) सीन में आती हैं, जिनके लीडरशिप में दोनों दोस्त एक सीक्रेट और खतरनाक मिशन पर निकलते हैं. कहानी इंटरवल तक बहुत ही दिलचस्प और एंटरटेनिंग तरीके से आगे बढ़ती है. दो दोस्तों के बीच की नोकझोंक, सिचुएशनल कॉमेडी और हल्के-फुल्के थ्रिलर एलिमेंट दर्शकों को स्क्रीन से बांधे रखते हैं. बदकिस्मती से इंटरवल के बाद फिल्म उस रफ्तार और वाइब को बनाए रखने में नाकाम रहती है.

एक्टिंग
एक्टिंग की बात करें तो, कुणाल खेमू ने एक बार फिर खुद को बॉलीवुड के सबसे अंडररेटेड और भरोसेमंद एक्टर्स में से एक साबित किया है. एक्टिंग, कॉमेडी टाइमिंग, एक्शन और इमोशनल सीन- कुणाल ने हर तरह से अपना 100% दिया है. सबसे अच्छी बात यह है कि डायरेक्टर और लीड एक्टर दोनों होने के बावजूद, कुणाल ने अपने को-स्टार्स को चमकने का हर मौका दिया है. ‘मिसिंग लेडीज’ फेम स्पर्श श्रीवास्तव ने बग्स के रोल में जबरदस्त काम किया है. कुणाल और स्पर्श की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री और टाइमिंग फिल्म की सबसे बड़ी USP हैं. डेब्यूटेंट वंशिका धीर (करीना का किरदार) अपनी पहली फिल्म में ही कॉन्फिडेंस दिखाती हैं और एक प्रॉमिसिंग चेहरा लगती हैं. वहीं, लंबे समय के बाद वापसी कर रही प्रीति जिंटा ‘मैडम एच’ के रोल में निराश करती हैं. कुछ सीन में उनकी परफॉर्मेंस बहुत ज्यादा लाउड और थोड़ी आर्टिफिशियल लगती है. भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ और अनुभवी एक्टर यशपाल शर्मा ने अपने-अपने रोल के साथ न्याय किया है. फिल्म में कुछ मजेदार सरप्राइज कैमियो भी हैं जो दर्शकों का मनोरंजन करते हैं.

डायरेक्शन
एक डायरेक्टर के तौर पर कुणाल खेमू अच्छी तरह समझते हैं कि इंडियन मेनस्ट्रीम सिनेमा (कमर्शियल सिनेमा) के दर्शक क्या चाहते हैं. उन्होंने फिल्म में एक्शन, देशभक्ति, ड्रामा और कॉमेडी डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. हालांकि, कुणाल की सबसे बड़ी कमजोरी फिल्म की राइटिंग है. जहां फर्स्ट हाफ में हंसी और थ्रिल का परफेक्ट मिक्स है, वहीं सेकंड हाफ शुरू होते ही कॉमेडी गायब हो जाती है. कहानी को बेवजह खींचा गया है. क्लाइमैक्स तक इतनी सारी चीजें एक साथ होती हैं कि फिल्म एक मसालेदार मेस जैसी लगती है, जो मेन थीम से ध्यान भटकाती है.

सिनेमैटोग्राफी
जहां तक ​​फिल्म की सिनेमैटोग्राफी की बात है, यह एक टिपिकल बॉलीवुड एंटरटेनर की स्पिरिट से पूरी तरह मेल खाती है. एक्शन सीन बड़े और डायनैमिक तरीके से शूट किए गए हैं. IT ऑफिस सेटअप से लेकर सीक्रेट मिशन के हाई-ऑक्टेन सीन तक, कैमरावर्क साफ और आकर्षक है. लाइट और कलर का इस्तेमाल फिल्म के पेपी और वाइब्रेंट टोन को बनाए रखने में मदद करता है. विजुअल अपील के मामले में फिल्म निराश नहीं करती है.

म्यूजिक
फिल्म का म्यूजिक ठीक-ठाक है, लेकिन यह यादगार नहीं है. लेकिन, टाइटल ट्रैक ‘वाइब’ काफी कैची है और थिएटर से निकलने के बाद भी आपके दिमाग में रहता है. यह गाना फिल्म के मूड और जवानी की एनर्जी को पूरी तरह से दिखाता है. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर एक्शन और कॉमेडी सीन में कुछ जान डालता है, लेकिन गानों के मामले में फिल्म एक बेहतर एल्बम की हकदार थी.

कमियां
फिल्म की कुछ बड़ी कमियां इसे एक बेहतरीन थ्रिलर-कॉमेडी बनने से रोकती हैं:

  • सेकंड हाफ धीमा है: इंटरवल के बाद, फिल्म अपनी दिशा खो देती है और स्क्रीनप्ले काफी ढीला हो जाता है.
  • ह्यूमर गायब हो जाता है: सेकंड हाफ में फिल्म इतनी सीरियस और कॉम्प्लिकेटेड हो जाती है कि फर्स्ट हाफ में जो हंसी साफ दिखती थी, वह पूरी तरह से गायब हो जाती है.
  • ओवर-द-टॉप कैरेक्टराइजेशन: प्रीति जिंटा का कैरेक्टर खराब लिखा गया है और उनकी परफॉर्मेंस थोड़ी अननैचुरल लगती है.
  • क्लाइमैक्स गड़बड़ है: एंडिंग में बहुत सारे एलिमेंट (देशभक्ति, थ्रिल, बदला) एक में ठूंसने की कोशिश की गई है, जिससे असर कम हो जाता है.

अंतिम फैसला
‘वाइब’ एक ऐसी फिल्म है जो टुकड़ों-टुकड़ों में एंटरटेन करती है. अगर आप इसे देखने जाते हैं, तो फर्स्ट हाफ और कुणाल-स्पर्श की जोड़ी आपके चेहरे पर जरूर मुस्कान लाएगी. लेकिन एक सुस्त सेकंड हाफ और अनबैलेंस्ड राइटिंग ओवरऑल मजा किरकिरा कर देती है. अगर आप यह फिल्म मिस भी कर देते हैं, तो भी आप सिनेमा का एक शानदार मास्टरपीस मिस नहीं कर रहे हैं. मेरी ओर से फिल्म को 5 में 2 स्टार.



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