धरती से चांद तक जंग की तैयारी, अमेरिका ने स्पेस में उतारा ‘सीक्रेट हथियार’, सेना को मिला मैसेज

धरती से चांद तक जंग की तैयारी, अमेरिका ने स्पेस में उतारा ‘सीक्रेट हथियार’, सेना को मिला मैसेज


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US Space Force: अमेरिका अब संभावित युद्ध की तैयारी धरती से आगे चांद के आसपास के अंतरिक्ष तक कर रहा है. ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने सेना को सिस्लूनर स्पेस में लड़ने और जीतने के लिए तैयार रहने की बात कही है. अमेरिका अगले पांच साल में अपनी स्पेस फोर्स को करीब 25,000 सैनिकों तक बढ़ाने की तैयारी में है.

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अमेरिका स्पेस में युद्ध लड़ने की तैयारी कर रहा है.

US Army News: अमेरिका इस समय ईरान के साथ युद्ध में है. अभी वह इस युद्ध को न हारा है और न ही जीत सका है, लेकिन अब अमेरिका ने अपना नया लक्ष्य बना लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सेना अब सिर्फ धरती या पृथ्वी की कक्षा तक युद्ध की तैयारी नहीं कर रही. अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा है कि अमेरिकी सैनिकों को चांद के आसपास के अंतरिक्ष यानी सिस्लूनर स्पेस में भी लड़ने, टिके रहने और जीतने के लिए तैयार रहना होगा. यह बयान ऐसे वक्त आया है जब अमेरिका ने अंतरिक्ष में एक रहस्यमयी हथियार तैनात करने की बात भी स्वीकार की है. यानी धरती पर जंग के बीच अब अगला मोर्चा आसमान के पार बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है. यह जंग सुनने में स्टार वार्स फिल्म जैसी लग सकती है, जिसमें दो सेनाएं अपने अंतरिक्ष यान लेकर स्पेस में लड़ती हैं.

समंदर की तलहटी से चांद तक युद्ध का प्लान

जनरल डैन केन ने एयर, स्पेस एंड साइबर कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिकी सेना को अभी से ऐसी तैयारी करनी चाहिए कि वह समंदर की तलहटी से लेकर सिस्लूनर स्पेस तक किसी भी युद्ध में लड़ सके, टिक सके और जीत सके. सिस्लूनर स्पेस का मतलब है कि धरती से लेकर चंद्रमा तक के बीच का पूरा खाली स्पेस. यह सिर्फ भविष्य की कल्पना नहीं है. अमेरिकी सैन्य नेतृत्व अंतरिक्ष को संभावित युद्धक्षेत्र के तौर पर देख रहा है. खासकर पृथ्वी की कक्षा के बाहर चांद के आसपास का इलाका अब अमेरिकी सैन्य रणनीति में तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है.

अंतरिक्ष में भेज दिया हथियार

अमेरिकी एयरफोर्स सेक्रेटरी ट्रॉय मेइंक ने कुछ समय पहले बताया था कि अमेरिका ने सैनिकों की सुरक्षा के लिए एक हथियार अंतरिक्ष की कक्षा में लॉन्च किया है. अमेरिका ने यह नहीं बताया कि हथियार आखिर है क्या और इसे कब अंतरिक्ष में भेजा गया. माना जा रहा है कि ये हथियार ऐसा नहीं है जो अंतरिक्ष में मिसाइल जैसी चीज फायर कर सके. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हथियार जरूरत पड़ने पर किसी दुश्मन के सैटेलाइट को निशाना बनाने की क्षमता रख सकता है, खासकर तब जब उस सैटेलाइट का इस्तेमाल अमेरिकी सैनिकों या अमेरिकी अंतरिक्ष संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए किया जाए. यानी हथियार अंतरिक्ष में पहुंच चुका है, लेकिन उसकी पूरी जानकारी अभी जमीन पर बैठे लोगों को नहीं दी गई है.

चांद के पास भी जंग?

अमेरिकी स्पेस फोर्स के कॉम्बैट फोर्सेज कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ग्रेगरी गैगनन ने कहा कि मानवता अब पृथ्वी के वायुमंडल से आगे और गहरे अंतरिक्ष की तरफ बढ़ रही है. ऐसे में सेना को वहां होने वाले संभावित संघर्ष के लिए भी तैयार रहना होगा. उन्होंने खास तौर पर चीन यानी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) का जिक्र किया. गैगनन के मुताबिक, चीन अंतरिक्ष के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय गतिविधियां कर रहा है. यही वह बिंदु है जहां अमेरिका की चांद तक सैन्य तैयारी का असली कारण सामने आता है. मामला सिर्फ चांद तक पहुंचने का नहीं, बल्कि वहां और उसके आसपास रणनीतिक बढ़त बनाए रखने का भी है.

5 साल में डबल होगी अमेरिका की ‘स्पेस आर्मी’

अमेरिका अपने स्पेस फोर्स का आकार भी बढ़ाने की तैयारी में है. गैगनन के मुताबिक, अगले पांच साल में स्पेस फोर्स का आकार दोगुना करके करीब 25,000 सैनिकों तक ले जाने की योजना है. अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि इन सैन्य क्षमताओं का मकसद सिर्फ लड़ाई करना नहीं, बल्कि संभावित दुश्मन को हमला करने से रोकना भी है. यानी अमेरिका का संदेश यह है कि अंतरिक्ष में ताकत दिखाने का एक मकसद निरोध यानी दुश्मन को हमला करने से रोकना भी है.



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