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North Korea Nuclear Site Earthquake Mystery: नॉर्थ कोरिया के माउंटेन मंटैप पर जो हुआ वो देख जियोलॉजिस्ट के भी तोते उड़ गए हैं. 2017 में परमाणु धमाके बंद हुए, लगा मामला खत्म, पर असली ट्विस्ट तो अब आया है. 2025 तक इस पहाड़ के नीचे से आ रहे खौफनाक झटके कम होने के बजाय डबल स्पीड से बढ़ रहे हैं. अंदर का सोया हुआ दानव जाग चुका है. क्या यह किसी भयानक तबाही का ट्रेलर है?
न्यूक्लियर टेस्ट के बाद जमीन के अंदर की गतिविधियां डराने वाली हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
जमीन के सीने में गड़े 6 न्यूक्लियर बम, धधकती आग और फिर एक खौफनाक सन्नाटा. लगा था कि कहानी खत्म हो गई लेकिन उत्तर कोरिया के माउंटेन मंटैप के नीचे असली तबाही का मंजर तो अब शुरू हुआ है. 2017 में जब नॉर्थ कोरिया ने अपना आखिरी और सबसे खतरनाक परमाणु परीक्षण किया, तब पूरी दुनिया कांप उठी थी. लेकिन किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि इंसानी दस्तखत खत्म होने के सालों बाद यह पहाड़ खुद ब खुद चीखने लगेगा. आज धमाके तो बंद हैं मगर पहाड़ के पेट में सोए दानव जागे हुए हैं. 2025 तक इस पहाड़ के नीचे से लगातार उठते भूकंप के झटके कम होने के बजाय और तेज होते जा रहे हैं. साइंटिस्ट्स हैरान हैं और सवाल एक ही है कि क्या यह किसी बहुत बड़ी और विनाशकारी तबाही से पहले का सन्नाटा है?
धमाके 2017 में थमे, तो अब क्या हो रहा है?
आमतौर पर जब कोई न्यूक्लियर ब्लास्ट होता है तो उसके तुरंत बाद कुछ आफ्टरशॉक्स आते हैं और फिर सब शांत हो जाता है. लेकिन माउंटेन मंटैप पर कहानी बिल्कुल उलटी है. 2017 में हुए सबसे बड़े 250 किलोटन के परमाणु परीक्षण (जो हिरोशिमा बम से 16 गुना ज्यादा ताकतवर था) के करीब तीन हफ्ते बाद जमीन का कांपना शुरू हुआ. साइंटिस्ट्स ने 2008 से लेकर 2025 तक का डेटा खंगाला, जिसमें उन्हें 1,399 छोटे-बड़े भूकंप दर्ज मिले. हैरानी की बात यह है कि 2017 के बाद से यहां अर्थक्वेक की फ्रीक्वेंसी और उनकी ताकत कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है.
आखिर जमीन के नीचे चल क्या रहा है?
इस पूरे सीन को समझने के लिए एक सिंपल मिसाल लेते हैं. ‘ताश के पत्तों का घर’ या लकड़ी के गुटकों का ढेर. माउंटेन मंटैप के नीचे की जमीन पर कुदरती दबाव पहले से ही था. जब इंसान ने उस पर एक के बाद एक 6 न्यूक्लियर धमाके किए, तो जमीन के अंदर की बनावट बुरी तरह डैमेज हो गई. धमाकों की शॉकवेव्स ने सोए हुए फॉल्ट्स (जमीन के नीचे की दरारें) को जगा दिया. जब एक दरार खिसकी तो उसने दूसरी दरार पर प्रेशर डाला और इस तरह एक-एक करके झटके आने का सिलसिला शुरू हो गया. इसे आसान शब्दों में डोमिनो इफेक्ट कह सकते हैं जो सालों से रुकने का नाम नहीं ले रहा.
साइंस के लिए नई चुनौती और फ्यूचर का खतरा
यह खोज जर्नल Science में पब्लिश हुई है. साउथ कोरिया और चाइना के रिसर्चर्स का कहना है कि यह पहली बार है जब किसी न्यूक्लियर साइट पर सालों बाद इस तरह का डिलेड रिएक्शन देखा गया है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यहां कोई बहुत बड़ा भूकंप आ सकता है? वैज्ञानिकों ने पाया कि दो फॉल्ट लाइन्स में से एक लगभग 24 किलोमीटर लंबी है. अगर यह पूरी फॉल्ट लाइन एक साथ क्रैक होती है, तो 6.4 मैग्नीट्यूड तक का खतरनाक भूकंप आ सकता है. हालांकि यह सिर्फ एक थ्योरी है, कोई तुरंत आने वाली भविष्यवाणी नहीं.
बॉटम लाइन
नॉर्थ कोरिया ने जिस पहाड़ को परमाणु हथियारों की टेस्टिंग के लिए चुना था, कुदरत अब उसका हिसाब-किताब चुकता कर रही है. इस घटना ने दुनिया भर के भूशास्त्रियों (Geologists) को अलर्ट कर दिया है कि न्यूक्लियर टेस्ट साइट्स को सिर्फ धमाके के वक्त ही नहीं, बल्कि उसके दशकों बाद तक मॉनिटर करना कितना जरूरी है.