केलांग. हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में गुरुवार को बर्फबारी के चलते दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई. लाहौल घाटी के पवित्र पहाड़ी ड्रिलबुरी की परिक्रमा के लिए बड़े पैमाने पर श्रद्धालु गए थे, लेकिन इस दौरान सुबह अचानक बर्फबारी का दौर शुरू हो गया और दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई.
बताया जा रहा है कि धार्मिक यात्रा के दौरान बर्फ पर फिसलने, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस और हाइपोथर्मिया की चपेट में आने से 5-6 श्रद्धालु घायल भी हुए हैं और इसमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं. फिलहाल, घायलों का इलाज केलांग अस्पताल में चल रहा है.
क्षेत्रीय अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुषमा ने बताया कि ड्रिलबुरी परिक्रमा के दौरान दो महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई है. दोनों शवों का पोस्टमार्टम करवाया जा रहा है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत के वास्तविक कारणों की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी. घटना के बाद घायलों को उपचार के लिए क्षेत्रीय अस्पताल केलांग लाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है.
डॉ. सुषमा के अनुसार, परिक्रमा से लौटे श्रद्धालु कई बर्फबारी के चलते चोटिल हुए हैं. लगने और ऊंचाई से संबंधित स्वास्थ्य परेशानियों के कारण अस्पताल पहुंचे हैं. इनमें बर्फ पर फिसलने से घायल हुए लोग भी शामिल हैं, जबकि कई श्रद्धालुओं में हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के लक्षण पाए गए हैं. बताया जा रहा है कि हजारों की संख्या में श्रद्धालु परिक्रम के लिए निकले थे.
एसपी शिवानी मेहला ने बताया कि पवित्र ड्रिलबुरी कोरा यात्रा में लगभग 300 लोगों ने हिस्सा लिया और 2 लोगों की मौत और 1 व्यक्ति के घायल (हड्डी टूटने) होने की खबर है. उन्हें सुरक्षित बचाने के लिए 3 टीमें तैनात की गई थीं और अब लगभग 30 लोग बचे हैं, जो टीमों के साथ वापस लौट रहे हैं.
लाहौल स्पीति से पूर्व मंत्री राम लाल मारकंडे ने बताया कि पवित्र ड्रिलबुरी पर्वत की परिक्रमा पर निकली दो महिला श्रद्धालुओं की दुखद मृत्यु होने की सूचना मिली है. साथ ही कई लोगों के हाई एल्टीट्यूड सिकनेस ओर फिसलने से घायल होने की खबर प्राप्त हुई है. मैं परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करता हूं कि दोनों दिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान दे और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दे. मैं सभी घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं.
क्या है मान्यता
लाहौल घाटी के तांदी में चंद्रभागा संगम स्थल के ठीक ऊपर स्थित ड्रिलबुरी पर्वत को आचार्य मतीसार गुरु घंटापा का पीठ स्थान माना जाता है. नालंदा विश्वविद्यालय के आचार्य मतिसार 7 वीं शताव्दी में लाहौल घाटी थे और उन्होंने ड्रिलबुरी पर्वत की गुफाओं में घोर तप और साधना की थी. ड्रिलबुरी पर्वत को करगयुद्पा सम्प्रदाय के इष्ट देव चक्रसंवर का भी पीठ स्थान माना जाता है. ऐसे में धार्मिक महत्व को देखते हुए इससे स्थान की दलाई लामा, गलदान त्रिपा, गेलौंग ड्रकपा, तकसंग रिम्बोचे भी यात्रा कर चुके है. इसी वजह से लोग इस पहाड़ की परिक्रमा के लिए जाते हैं. ड्रिलबुरी पर्वत करीब 9 किमी सीधी चढ़ाई के बाद करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है. बौद्ध धर्म में ड्रिलबुरी पीक की एक परिक्रमा को कैलाश पर्वत की 13 परिक्रमा करने के बराबर माना गया है.
लाहौल घाटी में बर्फबारी
गौर रहे कि हिमाचल प्रदेश में गुरुवार को लाहौल स्पीति समेत प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात हुआ है. लाहौल घाटी में बारालाचा, शिंकुला और रोहतांग में भी बर्फबारी हुई है. इसके अलावा, मनाली की ऊंची चोटियों पर भी हिमपात हुआ है और ठंड का आगाज हो गया है.