इंडोनेशिया के बेड़े में उतरा इटली का ‘बूढ़ा शेर’, 41 साल पुराने एयरक्राफ्ट कैरियर से चीन को मिलेगी टक्कर?

इंडोनेशिया के बेड़े में उतरा इटली का ‘बूढ़ा शेर’, 41 साल पुराने एयरक्राफ्ट कैरियर से चीन को मिलेगी टक्कर?


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इटली का 41 साल पुराना विमानवाहक पोत ITS ज्यूसेपे गैरीबाल्डी अब इंडोनेशिया की नौसेना का हिस्सा बनने जा रहा है. इंडोनेशिया इसे समुद्री सुरक्षा, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और आपदा राहत अभियानों में इस्तेमाल करेगा. हजारों द्वीपों वाले देश की बढ़ती समुद्री सैन्य क्षमता के बीच इस कदम को क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी के संदर्भ में भी देखा जा रहा है.

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इटली ने इंडोेशिया को दिया एयरक्राफ्ट कैरियर. (Reuters/सांकेतिक फोटो)

इंडोनेशिया को इटली ने 41 साल पुराना एयरक्राफ्ट कैरियर दिया है. अब ये बूढ़ा शेर इंडोनेशियाई नेवी के बेड़े का हिस्सा बनने जा रहा है. लेकिन इस तोहफे ने इंडोनेशिया में नई बहस छेड़ दी है. इटली का पूर्व एयरक्राफ्ट कैरियर ITS ज्यूसेपे गैरीबाल्डी (Giuseppe Garibaldi) शुक्रवार को उत्तरी जकार्ता के तंजुंग प्रियोक बंदरगाह पहुंच गया. इंडोनेशिया इसे अपनी समुद्री सुरक्षा, हेलीकॉप्टर और ड्रोन संचालन के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए इस्तेमाल करना चाहता है. लेकिन सवाल यह है कि इतने पुराने जहाज को चलाने और मेंटेनेंस का खर्च आखिर कितना पड़ेगा?

इटली ने दिया ‘तोहफा’

इटली ने मार्च में 2024 में रिटायर किए गए इस युद्धपोत को इंडोनेशिया को देने का फैसला किया था. जहाज की खासियत यह है कि इसमें कम दूरी से उड़ान भरने और सीधे नीचे उतरने वाले विमान तथा हेलीकॉप्टर लॉन्च किए जा सकते हैं. द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशियाई नौसेना इसे अगले हफ्ते आधिकारिक तौर पर अपने बेड़े में शामिल करेगी और इसका नाम KRI Gajah Mada रखा जाएगा. यह नाम 14वीं सदी के मजापहित साम्राज्य के मशहूर सैन्य नेता गजह मादा के नाम पर रखा गया है. इसके साथ इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का विमानवाहक पोत रखने वाला सिर्फ दूसरा देश बन जाएगा. इससे पहले थाईलैंड ने 1997 में स्पेन से खरीदे गए HTMS Chakri Naruebet को अपने बेड़े में शामिल किया था.

तोहफा मुफ्त, लेकिन असली खेल खर्च का

जहाज इटली ने दे दिया, लेकिन इसे चलाना मुफ्त नहीं है. इंडोनेशिया के वित्त मंत्रालय ने 2025 में इस विमानवाहक पोत कार्यक्रम के लिए 45 करोड़ डॉलर की वित्तीय मंजूरी दी थी. लेकिन कुछ सांसदों का कहना है कि असली खर्च इससे काफी ज्यादा हो सकता है. संसद की कमीशन I के सदस्य टीबी हसनुद्दीन के मुताबिक, सिर्फ जहाज को आधुनिक जरूरतों के मुताबिक तैयार करने यानी रेट्रोफिटिंग में करीब 16 ट्रिलियन इंडोनेशियाई रुपिया यानी लगभग 90 करोड़ डॉलर तक खर्च हो सकता है. इसके बाद ईंधन, रखरखाव, चालक दल, हथियार प्रणाली और बंदरगाह से जुड़ा ढांचा अलग खर्च है.

चीन से निपटने के लिए जरूरी?

इंडोनेशिया का कहना है कि यह पोत सिर्फ दुश्मन के खिलाफ लड़ने के लिए नहीं होगा. हजारों द्वीपों वाले इस देश के लिए इसे एक तरह के चलते-फिरते कमांड सेंटर और सहायता केंद्र की तरह इस्तेमाल करने की योजना है. इंडोनेशिया का चीन से लंबे समय से उत्तरी नटुना सागर को लेकर विवाद रहा है. बार-बार चीन यहां घुसपैठ करता रहता है. यह एयरक्राफ्ट कैरियर ऐसी घुसपैठ को रोकने में काम आ सकता है.

राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के मुताबिक, जहाज पर करीब 10 मध्यम आकार के हेलीकॉप्टर रखे जा सकते हैं. इनका इस्तेमाल जंगल में लगने वाली भीषण आग से निपटने में किया जा सकता है. जहाज पर बड़ी मात्रा में पानी ले जाकर आग प्रभावित इलाकों में पहुंचाने और ड्रोन संचालित करने की भी योजना है.

रक्षा विशेषज्ञ क्या कह रहे?

इंडोनेशिया के रक्षा विशेषज्ञों को हालांकि विमानवाहक पोत की जरूरत पर ही सवाल है. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मोहम्मद फौजान मालुफ्ती ने कहा कि फैसला सिर्फ राष्ट्रीय गर्व के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक सैन्य जरूरत और जहाज को लंबे समय तक चलाने की क्षमता देखकर होना चाहिए. एक अन्य सैन्य विश्लेषक खैरुल फहमी ने कहा कि इंडोनेशिया की प्राथमिकता अपने समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा होनी चाहिए और इसके लिए पनडुब्बियां, फ्रिगेट और दूसरे असममित हथियार ज्यादा जरूरी हो सकते हैं.

इटली को क्या फायदा?

इटली के लिए यह सिर्फ एक पुराना जहाज हटाने का मामला भी नहीं है. जहाज को देने से उसे इसके निपटारे और कबाड़ बनाने का खर्च बचता है. साथ ही इटली दक्षिण-पूर्व एशिया में इंडोनेशिया के साथ रक्षा संबंध बढ़ाना चाहता है और पनडुब्बियों तथा विमानों से जुड़े सौदों की तलाश में है.



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