हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब को घेर रखा है, कोई मदद के लिए भी आगे नहीं आ रहा. अमेरिका-पाकिस्तान और तुर्की जैसे ‘दोस्तों’ ने दगा दे दिया है. इन हालातों के बीच सऊदी अरब के समंदर में दबा वो जिन्न चर्चा में आ गया है, जिसने 16 टन खजाना उगला था. इस खजाने से ऐसी-ऐसी चीजें निकली थीं कि देखने वालों की आखें चौंधिया गई थीं. 50 सालों से दबा ये ‘जिन्न’ आज भी आधे से ज्यादा खजाना पेट में छुपाए बैठा है. इस खजाने से जुड़ा इतिहास और कहानी भी बड़ी दिलचस्प है.
समंदर में 50 साल से दबे इस खजाने का इतिहास
दरअसल, अरब सागर की गहराइयों से निकला एक पुराना जहाज खूब चर्चा में है. करीब 50 सालों तक पानी में दफन रहा अमेरिकी जहाज ‘SS जॉन बैरी’ अपने साथ 16 टन चांदी का खजाना समेटे बैठा था. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ओमान के पास जर्मन पनडुब्बी ने हमला करके इसे डुबो दिया था. उस वक्त सऊदी अरब के तेल मजदूरों के लिए भेजे जा रहे पूरे 30 लाख चांदी के रियाल समंदर में समा गए थे. दशकों बाद जब ये भारी-भरकम खजाना बाहर निकाला गया, तो हर कोई हैरान रह गया.
ये कहानी साल 1944 की है, जब पूरा विश्व दूसरे महायुद्ध की आग में जल रहा था. अमेरिका का एक लिबर्टी कार्गो शिप ‘SS जॉन बैरी’ एक बेहद गुप्त मिशन पर निकला था. इस जहाज में कोई आम सामान नहीं था, बल्कि इसके निचले हिस्से में छुपाकर रखा गया था सऊदी अरब के लिए भेजा जा रहा भारी खजाना.
अगस्त 1944 में जब ये जहाज अरब सागर से गुजर रहा था, तभी एक जर्मन यू-बोट यानी पनडुब्बी ने इस पर टारपीडो से हमला कर दिया. हमला इतना भीषण था कि जहाज ओमान के तट के पास समंदर में डूबने लगा. जहाज पर सवार करीब 70 क्रू मेंबर्स में से ज्यादातर को बचा लिया गया, लेकिन 2 लोगों की जान चली गई. जहाज के डूबने के साथ ही लाखों चांदी के सिक्के समंदर की अथाह गहराई में हमेशा के लिए खो गए.
सिक्के और सऊदी अरब के तेल मजदूरों का कनेक्शन
आखिर ये खजाना सऊदी अरब के लिए इतना जरूरी क्यों था? दरअसल, उस समय सऊदी में तेल का कारोबार तेजी से बढ़ रहा था. नए तेल क्षेत्रों में काम कर रहे मजदूरों और कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए सऊदी सरकार के पास कैश की भारी कमी हो गई थी. इसी समस्या से निपटने के लिए सऊदी अरब ने अमेरिका से मदद मांगी थी.
अमेरिकी सरकार ने फिलाडेल्फिया की सरकारी मिंट में खास सऊदी अरब के लिए 30 लाख चांदी के ‘एक रियाल’ सिक्के ढलवाए थे. ये मिशन इतना सीक्रेट रखा गया था कि जहाज के क्रू मेंबर्स को भी भनक नहीं थी कि वे अपने साथ कितना बड़ा खजाना ले जा रहे हैं. अगर ये जहाज सही-सलामत पहुंच जाता, तो सऊदी अरब के शुरुआती तेल कारोबार को बहुत बड़ी ताकत मिलती.
50 साल बाद चला रेस्क्यू ऑपरेशन और समंदर से निकला 16 टन खजाना
जहाज डूब गया और सालों तक ये खजाना समंदर के नीचे एक दफन रहस्य बना रहा. लेकिन साल 1989 में इस डूबे हुए जहाज को खोजने और सामान निकालने का कानूनी अधिकार हासिल किया गया. इसके बाद साल 1994 में, यानी जहाज डूबने के ठीक 50 साल बाद, एक बहुत बड़ा और जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ.
समंदर की गहराई इतनी ज्यादा थी कि आम गोताखोर वहां तक नहीं पहुंच सकते थे. इसके लिए एक मॉडिफाइड ड्रिलिंग शिप और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया. देर 1994 में जब रेस्क्यू टीम जहाज के कार्गो हिस्से तक पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं. टीम ने समंदर के पेट से करीब 14 लाख चांदी के सिक्के यानी लगभग 16 टन चांदी बाहर निकाल ली.
सॉथबी की नीलामी और करोड़ों में बिका इतिहास
समंदर से निकाला गया ये 16 टन का खजाना कोई आम धातु नहीं था, बल्कि इसके साथ इतिहास की एक बहुत बड़ी कहानी जुड़ी हुई थी. साल 1995 में इस खजाने को दुनिया की मशहूर नीलामी संस्था सॉथबी की नीलामी में ले जाया गया.
उस समय उम्मीद जताई गई थी कि इस 16 टन चांदी के ढेर की कीमत कम से कम 20 मिलियन डॉलर यानी करीब 165 करोड़ रुपये से ज्यादा मिलेगी. नीलामी के बाद ये खजाना किसी एक प्राइवेट कलेक्शन में सिमटकर गायब नहीं हुआ. बाद के सालों में ‘हेरिटेज ऑक्शंस’ जैसी एजेंसियों ने भी इन चांदी के सिक्कों को दुनिया भर के सिक्का संग्रहकर्ताओं को बेचा. आज भी फिलाडेल्फिया में बने ये ऐतिहासिक चांदी के रियाल कलेक्टर्स के बीच बेहद कीमती माने जाते हैं.
अदालती लड़ाई, चांदी की ईंटें और अधूरा खजाना
इस जहाज से जुड़ा विवाद सिर्फ सिक्कों तक ही सीमित नहीं रहा. 1994 के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ये दावा भी किया जाने लगा कि जहाज में सिक्कों के अलावा बहुत बड़ी मात्रा में चांदी की ईंटें भी मौजूद थीं. इसे लेकर अदालतों में लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली.
हाल ही में साल 2026 में आए एक अमेरिकी फेडरल कोर्ट के फैसले में इस पूरे मामले के रिकॉर्ड की समीक्षा की गई. कोर्ट के दस्तावेजों ने साफ किया कि 1994 के ऑपरेशन में केवल 14 लाख के करीब चांदी के सिक्के ही बरामद हुए थे, और अतिरिक्त चांदी की ईंटों का कोई ठोस सबूत नहीं मिला. यानी कथित बुलियन का दावा विवादों में ही रहा, जबकि 14 लाख सिक्कों की बात पूरी तरह सही साबित हुई.
समंदर के सीने में आज भी दबा है आधा खजाना
‘SS जॉन बैरी’ की ये कहानी आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. जहाज में कुल 30 लाख चांदी के सिक्के लोड किए गए थे, जिनमें से 1990 के दशक में चलाए गए ऑपरेशन में लगभग 14 लाख सिक्के ही बाहर निकाले जा सके.
इसका मतलब ये है कि लगभग 16 लाख चांदी के सिक्के आज भी ओमान के पास अरब सागर की तलहटी में उस डूबे हुए जहाज के ढांचे के साथ मौजूद हैं. हूतियों के डर और लाल सागर में फैले तनाव के बीच जब आज दुनिया समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर चर्चा कर रही है, तो 80 साल पहले डूबे इस जहाज और 50 साल बाद बाहर निकले खजाने की ये कहानी हमें याद दिलाती है कि समंदर के सीने में इतिहास के न जाने कितने राज और खजाने आज भी दफन हैं.